राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम: 7171 मेगावाट बिजली उत्पादन का रिकॉर्ड
निगम ने 23 कोयला आधारित इकाइयों से 7580 मेगावाट की कुल क्षमता का 94.60 प्रतिशत उपयोग कर अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया है।

जयपुर, 3 जून 2026। राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम ने अपने विद्युत गृहों के माध्यम से अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। निगम ने 7580 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता वाली 23 कोयला आधारित इकाइयों से 2 जून 2026 की रात्रि 10 बजे 7171 मेगावाट का रिकॉर्ड विद्युत उत्पादन कर एक गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य सरकार के प्रभावी दिशा-निर्देशों के अनुरूप, उत्पादन निगम ने इकाइयों में व्याप्त पूर्व की तकनीकी खामियों को चरणबद्ध तरीके से दूर कर और उनका उचित रखरखाव सुनिश्चित करके यह ऐतिहासिक लक्ष्य प्राप्त किया है। यह उपलब्धि उत्पादन निगम के गठन के पश्चात से अब तक का सर्वाधिक विद्युत उत्पादन है।
इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ऊर्जा मंत्री श्री हीरालाल नागर ने निगम के सीएमडी, अभियंताओं और समस्त कर्मचारियों को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 7580 मेगावाट क्षमता की सभी 23 थर्मल इकाइयों से दर्ज किया गया यह 7171 मेगावाट का उच्चतम उत्पादन, पूर्व में 31 जनवरी 2025 को कोल आधारित इकाइयों द्वारा किए गए 6833 मेगावाट के रिकॉर्ड से कहीं अधिक है। पूर्व के आंकड़ों के अनुसार, 22 इकाइयों से उपलब्ध 7330 मेगावाट की क्षमता का 93.22 प्रतिशत उपयोग हुआ था, जबकि 2 जून को कोल आधारित इकाइयों ने अपनी कुल 7580 मेगावाट क्षमता का 94.60 प्रतिशत उपयोग दर्ज किया, जो अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए ऊर्जा सचिव सुश्री आरती डोगरा ने कहा कि यह सफलता बेहतर रखरखाव, कुशल वार्षिक अनुरक्षण और श्रेष्ठ संचालन का परिणाम है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि 2 जून 2026 को सूरतगढ़ थर्मल विद्युत गृह की सभी 8 इकाइयों ने अपनी कुल 2820 मेगावाट क्षमता के विरुद्ध अब तक का सर्वश्रेष्ठ 2790 मेगावाट उत्पादन किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इसी प्रकार की कार्यकुशलता के साथ भविष्य में भी निगम प्रदेश की विद्युत आवश्यकताओं में अपना विशिष्ट योगदान देता रहेगा।
राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक श्री देवेन्द्र श्रृंगी ने इस उपलब्धि का श्रेय निगम के अभियंताओं और कर्मचारियों की कड़ी मेहनत तथा अनवरत प्रयासों को दिया है। उन्होंने कर्मचारियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आपसी समन्वय और निरंतर कार्यप्रणाली के माध्यम से ही यह गौरवशाली सफलता संभव हुई है और आगे भी इसी समर्पण के साथ कार्य करना प्राथमिकता रहेगी।

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