वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: राजस्थान के 184 सीमावर्ती गांवों का ₹552 करोड़ से होगा विकास
मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम और वाइब्रेंट विलेज स्कीम के तहत सीमांत जिलों में सड़क, कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी राज्य सरकार।

जयपुर में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, जहां उन्होंने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम और मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन और समयबद्ध मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।
वर्षों तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहे राजस्थान के सीमावर्ती गांव अब डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता बन चुके हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi की ‘सीमावर्ती गांव देश के अंतिम नहीं, बल्कि प्रथम गांव हैं’ की सोच को आधार बनाकर मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma के नेतृत्व में राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों में व्यापक विकास की नई तस्वीर गढ़ रही है। वाईब्रेन्ट विलेज प्रोग्राम-।। के माध्यम से सीमावर्ती गांवों को आधुनिक सुविधाओं, मजबूत आधारभूत ढांचे, आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और समृद्धि से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं योजना की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं और अधिकारियों को कार्यक्रम के समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण तथा प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विकास का वास्तविक लाभ मिल सके। कार्यक्रम के तहत राजस्थान के 5 सीमावर्ती जिलों के 184 रणनीतिक गांवों का चयन किया गया है, जहां प्रत्येक गांव में 3 करोड़ रुपये की लागत से अवसंरचना एवं सामुदायिक विकास कार्य किए जाएंगे।
वाईब्रेन्ट विलेज प्रोग्राम-।। के अंतर्गत सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, बिजली, टेलीविजन, दूरसंचार कनेक्टिविटी, आजीविका सृजन, पर्यटन, संस्कृति, जागरूकता गतिविधियों, युवा सशक्तीकरण, कौशल विकास, वित्तीय समावेशन, सहकारिता, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पाद संगठनों के विकास तथा परिसंपत्तियों के रखरखाव सहित ग्राम अवसंरचना से जुड़े व्यापक विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन कार्यों से सीमावर्ती क्षेत्रों में जीवन स्तर बेहतर होने के साथ रोजगार, पर्यटन, स्थानीय आजीविका और सामाजिक सशक्तीकरण के नए अवसर विकसित होंगे।
कार्यक्रम के तहत श्रीगंगानगर जिले के 68, बीकानेर के 46, बाड़मेर के 36, जैसलमेर के 30 और फलौदी जिले के 4 गांवों को रणनीतिक गांवों के रूप में चिन्हित किया गया है। वर्तमान में चयनित 184 गांवों में से 123 गांवों में 232 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 515 कार्य करवाए जाने प्रस्तावित हैं।
राज्य सरकार ने रणनीतिक गांवों में विकास और योजनाओं की संतृप्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिवर्ष 3 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके साथ ही सीमा ब्लॉकों के 3 हजार 195 गांवों में सभी मौसम में सड़क संपर्क, दूरसंचार कनेक्टिविटी, टेलीविजन कनेक्टिविटी और ऑन ग्रिड विद्युतीकरण सुनिश्चित किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निकट रहने वाले समुदायों के साथ विश्वास और सकारात्मक संबंध मजबूत करने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामुदायिक बैठकें, पर्यटन गतिविधियां, प्रशिक्षण सत्र और जागरूकता अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी सीमावर्ती समुदायों के साथ भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए केन्द्रीय, राज्य और जिला स्तर पर समितियों के जरिए समन्वय तंत्र विकसित किया गया है। ग्राम प्रोफाइल वेरिफिकेशन और अपडेशन, गैप आकलन-मूल्यांकन तथा ग्राम कार्य योजना के माध्यम से अवसंरचना सुधार और सामुदायिक सहभागिता के स्पष्ट उद्देश्य निर्धारित किए गए हैं। गांवों के सत्यापन से लेकर प्रस्ताव प्रक्रिया तक का पूरा कार्य वाईब्रेन्ट विलेज पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा है। अब तक राजस्थान के सभी 184 रणनीतिक गांवों का सत्यापन और प्रोफाइल अपडेशन पूरा किया जा चुका है। वहीं सीमा ब्लॉकों के 3 हजार 195 गांवों में से 3 हजार से अधिक गांवों का सत्यापन और 2 हजार 558 गांवों का प्रोफाइल अपडेशन भी पूरा हो चुका है।
राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम भी शुरू किया है। इस योजना के तहत 5 सीमावर्ती जिलों के 1 हजार 206 गांवों के समग्र विकास के लिए प्रतिवर्ष 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2025-26 में बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन, खेल, पर्यटन और आधारभूत संरचना विकास से जुड़े 137 करोड़ रुपये की लागत के 1 हजार से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता दिए जाने और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार की सक्रिय कार्यशैली के चलते राजस्थान के सीमावर्ती गांव अब विकास, सुरक्षा और आत्मविश्वास के नए मॉडल के रूप में उभर रहे हैं। वाईब्रेन्ट विलेज प्रोग्राम-।। और मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के जीवन में सुविधाओं, विश्वास और समृद्धि का नया अध्याय लिखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहे हैं।

Pratahkal Bureau
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