राजस्थान का वागड़ अंचल अब जल आत्मनिर्भरता की नई गाथा लिखने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व और जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत के मार्गदर्शन में राज्य सरकार 'अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना' को युद्धस्तर पर पूरा करने में जुटी है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना जनजाति बहुल क्षेत्रों के लिए एक ऐसा मील का पत्थर साबित होने जा रही है, जो न केवल कृषि व्यवस्था को संबल प्रदान करेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। लगभग 2500 करोड़ रुपए की लागत वाली यह परियोजना बांसवाड़ा जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों—बांसवाड़ा, बागीदौरा और कुशलगढ़—की छह तहसीलों के 338 गांवों में खुशहाली की सौगात लेकर आएगी। इस वृहद सिंचाई परियोजना के माध्यम से 42 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को लिफ्ट सिंचाई प्रणाली के जरिए जल उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे लगभग 3.5 लाख की आबादी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होगी।

इस परियोजना की इंजीनियरिंग का स्तर आधुनिकता और तकनीकी दक्षता का अनूठा उदाहरण है। 102 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर के निर्माण में 22.50 किलोमीटर की सुरंगें और 'कट एंड कवर' जैसी जटिल संरचनाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, नहर तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए सुपरपासेज, ड्रेनेज साइफन और रोड ब्रिज जैसी 230 अन्य महत्वपूर्ण संरचनाएं भी बनाई जा रही हैं। परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 'प्रेशर प्रणाली' आधारित कमांड क्षेत्र की अवधारणा है, जो स्काडा प्रणाली के माध्यम से पूर्णतः ऑटोमाइज्ड होगी। इस व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक 200 हेक्टेयर के चक पर डिग्गियों का निर्माण कर भूमिगत पाइपलाइन के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा, जिससे जल का समान वितरण और न्यूनतम अपव्यय सुनिश्चित हो सकेगा। वर्तमान में नहर के 42 किलोमीटर हिस्से पर निर्माण कार्य जारी है, और इनटेक स्ट्रक्चर एवं स्लूइस बैरल का कार्य पूर्ण किया जा चुका है।

प्रशासनिक स्तर पर भी कार्यों में पारदर्शिता और गति बनाए रखने के लिए निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को भी त्वरित रूप से संचालित किया जा रहा है, जिसके तहत 78 गांवों की निजी भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। अब तक 67 गांवों के लिए 47 करोड़ रुपए के अवार्ड पारित किए जा चुके हैं और प्रभावित किसानों को मुआवजे का वितरण भी किया जा रहा है। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत का मानना है कि परियोजना के पूर्ण होने के बाद क्षेत्र में मक्का, गेहूं, दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों का दायरा बढ़ेगा, जिससे किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि होगी। भू-जल स्तर में सुधार और जल संरक्षण के उद्देश्य से निर्मित यह परियोजना वागड़ क्षेत्र के समग्र सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए एक निर्णायक कदम सिद्ध होगी।

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