जयपुर में आयोजित दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति ने राजस्थान को समृद्ध विरासत, वीरता और गहरी सांस्कृतिक परंपराओं की भूमि बताते हुए इसे उत्कृष्टता और चरित्र निर्माण की धरा करार दिया। उन्होंने कहा कि जयपुर विरासत और प्रगति का जीवंत प्रतीक है, जबकि राजस्थान विश्वविद्यालय ज्ञान, सत्यनिष्ठा और सेवा के प्रति समर्पित विचारकों, नेताओं और परिवर्तनकर्ताओं की पीढ़ियों को निरंतर गढ़ रहा है।

स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह एक अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत का संकेत है। उन्होंने छात्रों से अपने ज्ञान को प्रगति का साधन बनाने का आह्वान किया और स्पष्ट किया कि शिक्षा का वास्तविक महत्व समाज की बेहतरी, नवाचार और नैतिक आचरण में उसके उपयोग से निर्धारित होता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्नातकों को रोजगार सृजनकर्ता, नवप्रवर्तक और राष्ट्र निर्माता बनने के लिए प्रेरित किया। साथ ही राजस्थान सरकार द्वारा मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में युवाओं के लिए नवाचार और अवसरों को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की।

महिला सशक्तिकरण पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने महिला स्नातकों की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में स्वर्ण पदक विजेताओं में अधिकांश महिलाएं रही हैं, जो महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए समान अवसर, गरिमा और नेतृत्व की भूमिका के बिना विकसित राष्ट्र की परिकल्पना अधूरी है। साथ ही उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम से विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व में वृद्धि की आशा व्यक्त की।

तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच उपराष्ट्रपति ने छात्रों को आलोचनात्मक चिंतन, नैतिक आचरण और आजीवन सीखने की भावना अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने दृढ़ता, असफलताओं से सीखने और मूल्यों पर अडिग रहने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सहानुभूति के बिना उत्कृष्टता और विनम्रता के बिना उपलब्धि अधूरी रहती है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने स्नातकों से समाज में सार्थक योगदान देने, करुणा बनाए रखने, विविधता का सम्मान करने और सार्वजनिक हित में कार्य करने का आह्वान किया। साथ ही नशे से दूर रहने और सोशल मीडिया का रचनात्मक उपयोग करने की सलाह दी।

इस अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसानराव बागडे, उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा, संसद सदस्य (राज्यसभा) डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल और राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर अल्पना कटेजा भी उपस्थित रहीं। यह समारोह शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण के प्रति नई पीढ़ी के संकल्प का सशक्त संदेश बनकर उभरा।

Pratahkal Bureau

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