जयपुर। राजस्थान में खेजड़ी सहित राज्य के महत्वपूर्ण वृक्षों को अनधिकृत कटाई से बचाने और उनके संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को शासन सचिवालय स्थित मंत्रालय भवन में प्रस्तावित 'वृक्ष संरक्षण अधिनियम' के प्रारूप को अंतिम रूप देने के लिए गठित समिति की तीसरी महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने की, जिसमें वृक्ष संरक्षण को लेकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

बैठक के दौरान प्रस्तावित अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। समिति ने प्राप्त सुझावों और आवश्यक संशोधनों को समाहित करते हुए विधेयक के प्रारूप को अंतिम रूप प्रदान किया और संबंधित विभागों को आगामी कार्यवाही के लिए दिशा-निर्देश जारी किए। इस दौरान वन एवं पर्यावरण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संजय शर्मा के साथ-साथ विधि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

वर्तमान में केवल कृषि भूमि पर वृक्षों को हटाने के लिए अनुमति संबंधी प्रावधान प्रभावी हैं, लेकिन इस प्रस्तावित कानून के दायरे का विस्तार किया जा रहा है। नए अधिनियम के माध्यम से गैर-कृषि भूमि, आबादी क्षेत्र, पंचायती भूमि और स्थानीय निकायों की भूमि पर स्थित संरक्षित वृक्षों के संरक्षण हेतु स्पष्ट कानूनी प्रावधान किए जा रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, अब अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बाद वृक्षों को हटाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, इस अधिनियम में उन संरक्षित वृक्षों की सूची भी शामिल की जाएगी, जिन्हें बिना अनुमति हटाना पूर्णतः प्रतिबंधित होगा। यह अधिनियम राज्य में हरित आवरण को सुरक्षित रखने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक निर्णायक कानूनी सुरक्षा कवच सिद्ध होगा।

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Pratahkal Newsroom

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