राजस्थान पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की कवायद: उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने 15 प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा कर दिए त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश
उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने पर्यटन और कला विभाग की 15 परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए, 'राइजिंग राजस्थान' एमओयू के तहत विकास पर जोर।

राजस्थान को विश्व पर्यटन मानचित्र पर अग्रणी पंक्ति में खड़ा करने के संकल्प के साथ उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने पर्यटन, कला, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने राज्य की 15 प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया और उनके निर्धारित समयबद्ध निष्पादन के लिए सख्त निर्देश जारी किए। इस बैठक में राज्य के पर्यटन एवं सांस्कृतिक वैभव को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की रणनीतिक रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक के दौरान उप मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से 'राइजिंग राजस्थान' के तहत हस्ताक्षरित एमओयू (MoU) के क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का प्राथमिक उद्देश्य प्रदेश को वैश्विक स्तर पर एक उत्कृष्ट पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि पर्यटन विकास से जुड़ी समस्त योजनाओं को न केवल समय पर पूरा किया जाए, बल्कि उनकी गुणवत्ता और प्रभावशीलता को भी वैश्विक मानकों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए।
समीक्षा बैठक में पर्यटन आयुक्त रुक्मणि रियाड़ ने विभाग की विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान पर्यटन के व्यापक प्रचार-प्रसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म के सुदृढ़ीकरण, विरासत संरक्षण तथा पर्यटन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से जुड़ी योजनाओं की प्रगति शामिल थी। प्रस्तुतीकरण के दौरान पुष्कर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट, मीडिया कैंपेन, आमेर लाइट एंड साउंड शो, अत्याधुनिक टूरिज्म ऐप, महाराणा प्रताप सर्किट, विदेश मंत्रालय (MEA) के सहयोग से पर्यटन प्रमोशन, और जयपुर 300 वर्ष पहल जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर चर्चा हुई। साथ ही, वॉल्ड सिटी टूरिज्म सेंटर, क्रिएटिव कैंपेन, झुंझुनूं स्थित वार म्यूजियम, आरटीडीसी (RTDC) प्रॉपर्टीज के कायाकल्प, और आमेर मास्टरप्लान के प्रथम व द्वितीय चरण की अद्यतन स्थिति से उप मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया।
बैठक के दूसरे चरण में कला एवं संस्कृति तथा पुरातत्व विभाग की उप शासन सचिव अनुपम कायल ने प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने ऐतिहासिक अल्बर्ट हॉल के विकास कार्यों और शिल्पग्राम रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट पेश की।
यह बैठक न केवल प्रशासनिक समीक्षा का हिस्सा थी, बल्कि राजस्थान के सांस्कृतिक और पर्यटन परिदृश्य में आमूलचूल परिवर्तन लाने की एक सोची-समझी रणनीति को भी दर्शाती है। इन परियोजनाओं का त्वरित क्रियान्वयन न केवल राज्य के राजस्व में वृद्धि करेगा, बल्कि स्थानीय कला और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उप मुख्यमंत्री के इन कड़े निर्देशों ने विभाग के कार्यों में एक नई ऊर्जा का संचार किया है, जिससे आने वाले समय में राज्य के पर्यटन ढांचे में व्यापक सुधार की उम्मीद जगी है।

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