राजस्थान पर्यटन विभाग ने गर्मियों के मौसम में भी पर्यटन गतिविधियों को नया आयाम देने के लिए “राजस्थान इन समर” अभियान को बड़े स्तर पर शुरू करने की मुकम्मल तैयारी कर ली है। इस अभिनव अभियान के तहत राज्य की पारंपरिक मरू-पर्यटन छवि से इतर एक शांत, समृद्ध सांस्कृतिक और अनूठे अनुभव आधारित पर्यटन मॉडल को वैश्विक पटल पर पेश किया जाएगा। विभाग द्वारा इस विशेष मुहिम को “विज़िट माई स्टेट” और “हॉलिडे इन राजस्थान” जैसी महत्वपूर्ण पहलों के साथ सीधे जोड़ा गया है, जिससे ऑफ-सीजन के दौरान भी घरेलू पर्यटकों को राजस्थान की ओर आकर्षित किया जा सके। पर्यटन विभाग का यह सुदृढ़ मानना है कि सर्दियों के भारी भीड़भाड़ वाले पारंपरिक सीजन की तुलना में शांत गर्मियों के दौरान देश-विदेश से आने वाले पर्यटक राजस्थान की मूल संस्कृति, धरोहरों और प्राकृतिक सौंदर्य को कहीं अधिक गहराई तथा नजदीकी से महसूस कर सकते हैं।

पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक दलीप सिंह राठौड़ ने अभियान की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी के कड़े व स्पष्ट निर्देशानुसार इस व्यापक अभियान का मुख्य ध्येय राजस्थान को केवल सर्दियों तक सीमित न रखकर एक सर्वकालिक यानी “ईयर राउंड टूरिज्म डेस्टिनेशन” के रूप में मजबूती से स्थापित करना है। इस रणनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभाग आधुनिक डिजिटल कैंपेन, सोशल मीडिया स्टोरीटेलिंग, गहन अनुभव आधारित पर्यटन और राज्य के उन कम चर्चित व अज्ञात स्थलों के आक्रामक प्रचार-प्रसार पर पूरी ताकत से काम कर रहा है जो अब तक मुख्यधारा के पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से नहीं आ पाए हैं। संयुक्त निदेशक के अनुसार, विभिन्न ऐतिहासिक शहरों की विशिष्ट भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को देखते हुए उनकी अलग-अलग अनूठी थीम्स तैयार की गई हैं। उदाहरण के तौर पर, झीलों की नगरी उदयपुर को सुबह और शाम के सुरम्य अनुभवों के साथ विशेष रूप से प्रचारित किया जाएगा, जबकि ऐतिहासिक शहर बूंदी को उसकी प्राचीन गलियों, समृद्ध स्थापत्य कला और अप्रतिम बावड़ियों के जरिए एक जीवंत “हिडन हेरिटेज” डेस्टिनेशन के रूप में देश के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

इसी सुनियोजित रणनीति के तहत राजधानी जयपुर और सूर्य नगरी जोधपुर में स्थित भव्य महलों, शाम के समय आयोजित होने वाले मंत्रमुग्ध कर देने वाले सांस्कृतिक अनुभवों और हेरिटेज स्टे को इस ग्रीष्मकालीन अभियान का मुख्य हिस्सा बनाया गया है। वहीं दूसरी ओर, पश्चिमी राजस्थान के सुदूर थार के रेगिस्तान व बाड़मेर को “सोलो ट्रैवल” यानी एकल यात्रियों और वास्तविक रेगिस्तानी जीवन के रोमांचकारी अनुभवों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही, राज्य के समृद्ध वन्यजीव पर्यटन को भी इस अभियान के साथ कसकर जोड़ा जाएगा; विशेषकर रणथम्भौर नेशनल पार्क में गर्मियों के महीनों के दौरान होने वाली वन्यजीवों की अत्यधिक गतिविधियों और सहज साइटिंग्स को विशेष रूप से विज्ञापित किया जाएगा, ताकि ऑफ-सीजन की तपिश में भी पर्यटकों की निरंतर आवाजाही पार्क में बनी रहे।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए पर्यटन विभाग ने उच्च स्तरीय डिजिटल कंटेंट, प्रभावी वीडियो स्टोरीज और आकर्षक सोशल मीडिया रील्स सहित तमाम आधुनिक प्रचार सामग्री तैयार करने की औपचारिक प्रक्रिया को तीव्र गति से शुरू कर दिया है। विभाग इस बार पारंपरिक विज्ञापनों के घिसे-पिटे तौर-तरीकों को छोड़कर “अनुभव आधारित कहानी” यानी डिजिटल स्टोरीटेलिंग को प्रमुखता दे रहा है, क्योंकि वर्तमान पीढ़ी केवल किसी पर्यटन स्थल पर घूमने नहीं जाती, बल्कि वहां से एक अमिट और “यादगार अनुभव” समेटना तलाशती है।

उल्लेखनीय है कि उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी ने पहले ही उच्चाधिकारियों की बैठकों में पर्यटन स्थलों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित करने, कम प्रसिद्ध व अज्ञात स्थानों को त्वरित गति से बढ़ावा देने और राज्य की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। हाल ही में संपन्न हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों में प्रदेश के मूल पर्यटन ढांचे को सुदृढ़ करने, हेरिटेज संरक्षण, सांस्कृतिक आयोजनों की निरंतरता और क्षेत्रीय पर्यटन सर्किटों को वैज्ञानिक ढंग से विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है। संयुक्त निदेशक दलीप सिंह राठौड़ के मुताबिक, इस वृहद अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए संपूर्ण होटल उद्योग, हेरिटेज प्रॉपर्टी संचालकों, प्रतिष्ठित ट्रैवल एजेंसियों और स्थानीय लोक कलाकारों को एक मंच पर जोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार का यह ठोस प्रयास है कि ऑफ-सीजन में पर्यटन का ग्राफ बढ़ने से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित हों और छोटे पर्यटन कारोबारियों की आजीविका को सीधा आर्थिक लाभ मिले। इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद राजस्थान की वैश्विक पहचान केवल “विंटर टूरिज्म” तक महदूद नहीं रहेगी, बल्कि इससे प्रदेश में लंबे समय तक ठहरने वाले पर्यटकों की संख्या में गुणात्मक वृद्धि होगी और गुमनाम पर्यटन स्थलों को एक वैश्विक पहचान मिलेगी।

Pratahkal Bureau

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