राजस्थान में खाद की कालाबाजारी पर सरकार का बड़ा एक्शन, दोषियों को 7 साल तक जेल
अनुदानित यूरिया और डीएपी के औद्योगिक दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार ने मुखबिर योजना लागू की, लापरवाही पर अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज।

राजस्थान में किसानों के लिए मिलने वाली सब्सिडी वाली खाद की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और औद्योगिक उपयोग करने वालों पर अब सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। राज्य सरकार ने अनुदानित यूरिया एवं डीएपी के दुरुपयोग और गैर-कृषि कार्यों में उनके इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए प्रदेशभर में सख्ती बढ़ा दी है। कृषि आयुक्तालय ने इस संबंध में कड़े निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसानों के लिए निर्धारित रियायती उर्वरकों का औद्योगिक या अन्य गैर-कृषि गतिविधियों में उपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। अनियमितताओं में शामिल लोगों के साथ कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय होगी।
कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने बताया कि भारत सरकार किसानों को सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए यूरिया के प्रति बैग पर लगभग 2,700 रुपये तथा डीएपी के प्रति बैग पर लगभग 3,500 रुपये तक की सब्सिडी दे रही है। इस वित्तीय सहायता का उद्देश्य खेती की लागत कम करना, किसानों को आर्थिक राहत देना और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना है। ऐसे में अनुदानित उर्वरकों को औद्योगिक या अन्य गैर-कृषि कार्यों में इस्तेमाल करना किसानों के हितों के साथ धोखा और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग है।
कृषि आयुक्तालय ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत उर्वरकों को आवश्यक वस्तु की श्रेणी में रखा गया है। अधिनियम की धारा 7 के अंतर्गत नियमों का उल्लंघन करने पर तीन माह से सात वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, धारा 10 के तहत दोषी कंपनियों के साथ उनके जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा अवैध परिवहन में इस्तेमाल किए गए वाहनों को नियमानुसार जब्त किया जा सकेगा।
राज्य सरकार ने सभी उर्वरक निर्माता एवं विपणन कंपनियों, थोक और खुदरा विक्रेताओं तथा यूरिया का उपयोग करने वाली औद्योगिक इकाइयों को निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। अनुदानित कृषि ग्रेड यूरिया एवं डीएपी की अवैध बिक्री, दूसरे कार्यों में डायवर्जन, निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री या गैर-कृषि उपयोग पाए जाने पर संबंधित दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
यूरिया के गैर-कृषि उपयोग पर निगरानी मजबूत करने के लिए औद्योगिक इकाइयों की जवाबदेही भी तय की गई है। औद्योगिक, प्लाईवुड, रेजिन, पशु आहार तथा अन्य गैर-कृषि इकाइयों में यूरिया का इस्तेमाल करने वाली इकाइयों को प्रत्येक महीने गैर-अनुदानित यूरिया की खरीद और उससे संबंधित उत्पादन का विवरण विभागीय अधिकारियों को उपलब्ध कराना होगा। इस व्यवस्था के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि औद्योगिक इकाइयां केवल नियमानुसार प्राप्त गैर-अनुदानित यूरिया का ही इस्तेमाल करें और किसानों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाले उर्वरकों का औद्योगिक गतिविधियों में उपयोग न हो।
कृषि आयुक्तालय ने उर्वरक वितरण और निगरानी व्यवस्था में अधिकारियों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट कर दी है। अनुदानित यूरिया एवं डीएपी के गैर-कृषि उपयोग, कालाबाजारी, अवैध भंडारण, डायवर्जन या निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री की शिकायत अथवा अनियमितता सामने आने पर संबंधित दोषियों के खिलाफ तत्काल नियमानुसार कार्रवाई करनी होगी। यदि ऐसी गड़बड़ियां सामने आने के बावजूद संबंधित कृषि अधिकारी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। इसका उद्देश्य उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
उर्वरकों की अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार की मुखबिर योजना के तहत भी लोगों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। योजना के प्रावधानों के अनुसार उर्वरकों की कालाबाजारी, अवैध परिवहन, जमाखोरी और डायवर्जन की प्रमाणिक सूचना देने वाले व्यक्तियों को नकद प्रोत्साहन अथवा इनाम राशि दी जाएगी। इससे किसानों, आम नागरिकों और जागरूक व्यक्तियों को अवैध गतिविधियों की जानकारी समय पर विभाग तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई के साथ किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप यूरिया एवं डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता है। विशेषकर रबी बुवाई के महत्वपूर्ण समय में उर्वरकों का सही वितरण जरूरी है। अनुदानित खाद के गैर-कृषि उपयोग और अवैध डायवर्जन पर रोक लगने से वास्तविक किसानों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता सुरक्षित रखने और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
कृषि विभाग ने सभी उर्वरक कंपनियों, विक्रेताओं, औद्योगिक इकाइयों और संबंधित अधिकारियों को जारी निर्देशों की तत्काल प्रभाव से पालना सुनिश्चित करने को कहा है। विभाग ने साफ किया है कि किसानों के हितों से जुड़े इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों के लिए निर्धारित सरकारी सब्सिडी का वास्तविक लाभ उन्हीं तक पहुंचे और उन्हें रबी सीजन में समय पर उचित दरों पर खाद उपलब्ध हो।

