स्मार्ट परियोजना: राजस्थान में AI से 3 लाख लोगों को मिला सरकारी सेवाओं का लाभ
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर 10 और योजनाओं को प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी, मूल निवास प्रमाण पत्र जैसी सेवाएं अब होंगी स्वतः जारी।

तस्वीर में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एक कार्यक्रम के दौरान डिजिटल राजस्थान बुकलेट लॉन्च करते हुए।
जयपुर, 10 अक्टूबर। राजस्थान में सरकारी सेवाओं का लाभ पात्र नागरिकों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और स्वचालित बनाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर स्मार्ट परियोजना का दायरा बढ़ाया जा रहा है। सर्विस मैनेजमेंट विद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रियल टाइम सिस्टम (SMART) के तहत शुरू की गई सात सेवाओं से अब तक 3 लाख से अधिक नागरिक लाभान्वित हो चुके हैं। वहीं, विभिन्न विभागों की 10 प्रमुख योजनाओं को भी जल्द स्मार्ट प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी है।
राज्य में आमजन को सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ सुगम, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्थाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। इसी क्रम में स्मार्ट परियोजना के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (एआई/एमएल) की मदद से सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाई जा रही है। परियोजना का प्रमुख उद्देश्य पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें संबंधित योजनाओं से स्वचालित रूप से जोड़ना और मानवीय हस्तक्षेप कम करते हुए लाभों का पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 1 जुलाई को जयपुर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में स्वचालित नागरिक सेवा प्रदायगी मंच स्मार्ट परियोजना का शुभारंभ किया था। इसके अंतर्गत शुरू की गई सात सेवाओं से अब तक 3 लाख से अधिक नागरिकों को लाभ मिल चुका है। इसके बाद मुख्यमंत्री ने राज उन्नति की 9वीं बैठक में विभिन्न विभागों की 10 प्रमुख योजनाओं को भी स्मार्ट प्लेटफॉर्म पर लाने के निर्देश दिए। इन योजनाओं से जुड़ी सेवाएं भी जल्द आमजन के लिए उपलब्ध होंगी।
मूल निवास प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम करने की दिशा में भी स्मार्ट परियोजना के तहत महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री ने 2 अक्टूबर को राज्य स्तरीय विकसित भारत-जन सेवा अभियान कार्यक्रम में मूल निवास प्रमाण-पत्र स्वतः जारी करने की सेवा का शुभारंभ किया था। इस व्यवस्था के तहत पात्र नागरिकों को मूल निवास प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए न तो आवेदन करना होगा और न ही किसी कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे।
इस सेवा के पहले चरण में स्कूल शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर राजस्थान में लगातार 10 वर्षों तक अध्ययन करने वाले लगभग 3 लाख विद्यार्थियों की पहचान की गई है। इन विद्यार्थियों को उनकी सहमति के आधार पर मूल निवास प्रमाण-पत्र स्वतः जारी किए जा रहे हैं। 9 अक्टूबर तक 27 हजार से अधिक नागरिक इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं।
स्मार्ट परियोजना के तहत जन आधार, राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) और राशन कार्ड से जुड़ी सेवाओं को भी स्वचालित बनाया जा रहा है। इनमें नवजात सदस्य को जन आधार परिवार कार्ड में स्वतः जोड़ना और सदस्य की मृत्यु होने पर उसका नाम परिवार कार्ड से स्वतः हटाना शामिल है। इसी तरह नवजात सदस्य का आरजीएचएस परिवार कार्ड में स्वचालित रूप से जुड़ना और मृत्यु होने पर सदस्य का नाम आरजीएचएस परिवार कार्ड से स्वतः हटना भी इस व्यवस्था का हिस्सा है।
इसके अतिरिक्त नवजात सदस्य को राशन कार्ड में स्वचालित रूप से जोड़ने और सदस्य की मृत्यु होने पर राशन कार्ड से उसका नाम स्वतः हटाने जैसी सेवाएं भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
स्मार्ट परियोजना के माध्यम से राजस्थान में सरकारी सेवाओं की प्रदायगी को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। पात्र नागरिकों की पहचान से लेकर प्रमाण-पत्र जारी करने और परिवार से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव तक की प्रक्रियाओं को स्वचालित करने से आमजन को सेवाएं प्राप्त करने में होने वाली औपचारिकताओं में राहत मिलेगी।

