राजस्थान की धरा पर साझा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में एक युगांतकारी अध्याय का सूत्रपात करते हुए आज जयपुर स्थित इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान (IGPRS) में "राजस्थान शामलात अधिवेशन 2026" का गरिमामय शुभारंभ हुआ। "Shaping our Prosperity with Commons" (साझा संसाधनों से समृद्धि का निर्धारण) के संकल्प के साथ आयोजित इस दो दिवसीय अधिवेशन का उद्घाटन प्रदेश के पंचायती राज मंत्री श्री मदन दिलावर द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। अपने संबोधन में मंत्री श्री दिलावर ने स्पष्ट किया कि चारागाह, जल स्रोत, वन और वेटलैंड्स जैसे शामलात संसाधन न केवल ग्रामीण आजीविका की रीढ़ हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए भी अपरिहार्य हैं, जिनका प्रभावी प्रबंधन वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

प्रदेश में निराश्रित गौवंश की सुरक्षा और सेवा के प्रति राज्य सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए श्री मदन दिलावर ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश की सभी 457 पंचायत समितियों में से एक-एक ग्राम पंचायत का चयन कर वहां 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय चारागाह विकास आधारित गौ माता आश्रय स्थल' स्थापित किए जाएंगे। ये आश्रय स्थल आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होंगे, जहां जल संरक्षण के व्यापक कार्य, पानी की पक्की खेल, सघन वृक्षारोपण, चारागाह विकास, वैज्ञानिक चारा भंडारण और जैविक खाद के रूप में कंपोस्ट उत्पादन जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन आश्रय स्थलों के माध्यम से गौवंश को प्राकृतिक वातावरण के साथ-साथ पर्याप्त आहार और पानी उपलब्ध होगा, जिससे न केवल भूजल स्तर में सुधार होगा बल्कि किसानों को खेती के लिए उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद भी सुलभ हो सकेगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने और लुप्त होती वनस्पतियों के पुनरुद्धार के लिए मंत्री श्री दिलावर ने बीज बैंकों की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने जानकारी दी कि गोचर एवं औरण भूमि के विकास तथा देशी वृक्षों और स्थानीय चारे की प्रजातियों को बढ़ावा देने हेतु प्रदेश में अब तक 150 बीज बैंक स्थापित किए जा चुके हैं, जिन्हें आगामी समय में बढ़ाकर 300 करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन बैंकों के माध्यम से स्थानीय घास और औषधीय पेड़ों के बीजों का व्यवस्थित संग्रहण और भंडारण किया जाएगा, जिससे चारागाह विकास को नई गति मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। इस पुनीत कार्य हेतु विशेष रूप से 'बीज गुणी' व्यक्तियों का चयन भी किया गया है।

अधिवेशन के दौरान इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान के महानिदेशक और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्री नीरज के. पवन ने ग्राम पंचायतों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पंचायतें ही साझा संसाधनों की सबसे प्रभावी संरक्षक सिद्ध हो सकती हैं। कार्यक्रम के विशेष सत्र में श्री मदन दिलावर ने विभिन्न क्षेत्रों से आए उन समुदायों को सम्मानित किया जिन्होंने साझा संसाधनों के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान दिया है। इसी कड़ी में उन्होंने जमीनी स्तर के लेखकों की प्रेरणादायी कहानियों के संकलन "शामलात की गाथा" पुस्तक का विमोचन किया और शामलात उत्पादों पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इस दो दिवसीय महाकुंभ में अधिकारी, विशेषज्ञ, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, पंचायत प्रतिनिधि, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी शामलात संसाधनों के प्रति एक नई चेतना का संचार कर रही है।

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