केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर सेक्टर संवाद में निवेशकों को सहायता का भरोसा दिया।

राजस्थान को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में देश का एक बड़ा हिस्सेदार बनाने के लिए राज्य में अभूतपूर्व औद्योगिक क्रांति की नींव रख दी गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित 'इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर सेक्टर पर संवाद' कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों और विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए राज्य को आर्थिक महाशक्ति बनाने का शंखनाद किया गया। इस उच्चस्तरीय संवाद में केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में राजस्थान के भीतर अपार संभावनाएं मौजूद हैं और देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस दिशा में निरंतर तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने निवेशकों का आह्वान किया कि वे प्रदेश में उद्योग स्थापना का लक्ष्य तय कर आगे बढ़ें, क्योंकि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार उन्हें हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वैश्विक परिदृश्य में भारत की मजबूत होती स्थिति का ब्योरा देते हुए बताया कि देश में विगत दो वर्षों के भीतर ही 450 नई फैक्ट्रियों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) की शानदार सफलता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि मात्र एक साल की अल्पावधि में ही इसके तहत 75 फैक्ट्रियां स्वीकृत की जा चुकी हैं। उद्योग जगत के उत्साह को देखते हुए केन्द्रीय कैबिनेट ने इस योजना के बजट में भी भारी बढ़ोतरी की है। केंद्रीय मंत्री ने बल देकर कहा कि राजस्थान में इन इकाइयों की स्थापना से न केवल तकनीकी विकास होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर बहुत बड़ी संख्या में रोजगार के नए अवसरों का सृजन भी होगा, जो राज्य की प्रगति में मील का पत्थर साबित होगा।

इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने वह ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है, जहां वह दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा है जो स्वयं सेमीकंडक्टर का उत्पादन करते हैं। भारत सरकार द्वारा 76 हजार करोड़ रुपये से अधिक के भारी-भरकम प्रोत्साहन पैकेज के साथ 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' को अत्यंत तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने वर्तमान युग में इस तकनीक की अपरिहार्य उपयोगिता को स्पष्ट करते हुए कहा कि सिम से लेकर स्पेस तक और मोबाइल से लेकर मिसाइल तक, आज हर एक क्षेत्र में सेमीकंडक्टर चिप की भूमिका सर्वोपरि और अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है। उन्होंने दूरगामी दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि भविष्य में वैश्विक पटल पर केवल उन्हीं देशों और राज्यों का वर्चस्व होगा जो इस रणनीतिक क्षेत्र में अपनी मजबूत और आत्मनिर्भर क्षमता विकसित करेंगे।

राजस्थान की इस दिशा में पहली बड़ी और ठोस उपलब्धि को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इसी माह प्रदेश के पहले सेमीकंडक्टर क्लस्टर का भिवाड़ी में भव्य शुभारंभ कर दिया गया है। पचास एकड़ के इस विशाल और अत्याधुनिक परिसर में प्रतिवर्ष करीब 6 करोड़ चिप का रिकॉर्ड उत्पादन किया जाएगा। इस नवस्थापित क्लस्टर के प्रति निवेशकों का आकर्षण इस कदर है कि अब तक 20 प्रतिष्ठित कंपनियों से 1,200 करोड़ रुपये से अधिक के भारी निवेश की योजनाएं आकर्षित की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राजस्थान का विशिष्ट 'ट्रिपल-एस' फैक्टर, जिसमें प्रचुर मात्रा में उपलब्ध सिलिका, अत्यधिक कुशल मानव संसाधन यानी स्किल और सौर ऊर्जा की अकूत क्षमता अर्थात सोलर शामिल हैं, इस सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक महान वरदान साबित होने जा रहा है।

राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों और निवेशकों को दी जा रही अभूतपूर्व रियायतों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश में इस क्षेत्र के लिए एक सर्वोत्तम और सुदृढ़ इकोसिस्टम तैयार करने के उद्देश्य से विशेष 'राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी' लागू की गई है। इसके साथ ही 'राजस्थान इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट पॉलिसी' का भी अनुमोदन किया गया है, जो विशेष रूप से सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को अभूतपूर्व प्रोत्साहन देती है। उद्योगों को धरातल पर मजबूत वित्तीय और आधारभूत सहायता प्रदान करने के लिए 'राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम 2024' (RIPS) को बेहद प्रभावी बनाया गया है। भारत सरकार के सेमीकंडक्टर मिशन के अंतर्गत स्वीकृत होने वाली परियोजनाओं को राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त कैपिटल सब्सिडी दी जा रही है और इसके साथ ही उद्योगों को वित्तीय संबल देने के लिए टर्म लोन पर 5 प्रतिशत तक के ब्याज अनुदान का भी विशेष प्रावधान नीति में शामिल किया गया है।

राजस्थान के भविष्य के औद्योगिक नक्शे को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र तथा कांकाणी क्षेत्र को विशेष रूप से 'सिलिकॉन वैली ऑफ राजस्थान' के रूप में विकसित करने की दिशा में युद्धस्तर पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इस महत्वाकांक्षी क्षेत्र में चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग तथा सिस्टम डेवलपमेंट से जुड़ी इकाइयों की स्थापना के लिए एक पूरी तरह से एकीकृत और सर्वसुविधायुक्त औद्योगिक वातावरण तैयार किया जा रहा है। भौगोलिक लाभ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान का एक बहुत बड़ा हिस्सा दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) से सीधा जुड़ा हुआ है। भिवाड़ी, नीमराणा और कोटपुतली जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अत्यंत निकट स्थित होने के कारण यहां स्थापित होने वाले उद्योगों को उत्कृष्ट कनेक्टिविटी, एक मजबूत और निर्बाध सप्लाई चेन तथा बेहद तेज परिवहन सुविधाएं सहजता से उपलब्ध होती हैं। प्रशासनिक तंत्र को चुस्त-दुरुस्त करने की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सिंगल विंडो क्लियरेंस प्रणाली को पहले से कहीं अधिक प्रभावी और जवाबदेह बना दिया है, जिसके तहत परियोजना स्वीकृति से लेकर भूमि आवंटन तक की तमाम जटिल प्रक्रियाएं एक निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से पूरी की जा रही हैं। उन्होंने सभी निवेशकों, उद्यमियों और उद्योग प्रतिनिधियों को राजस्थान की पावन धरा पर निवेश का खुला निमंत्रण देते हुए संकल्प दोहराया कि हमारा परम लक्ष्य राज्य को 350 बिलियन डॉलर की विशाल अर्थव्यवस्था बनाना है, और इस महान आर्थिक लक्ष्य को हासिल करने में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्र सबसे अग्रणी और निर्णायक भूमिका निभाएगा।

संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने एक बेहद महत्वपूर्ण और वैश्विक परिप्रेक्ष्य सामने रखा। उन्होंने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में सेमीकंडक्टर केवल एक तकनीकी पुर्जा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन और आर्थिक आत्मनिर्भरता का मुख्य आधार बन चुका है। उन्होंने ऐतिहासिक तुलना करते हुए कहा कि जिस प्रकार पुराने औद्योगिक युग में खनिज तेल और परमाणु युग में यूरेनियम रणनीतिक शक्ति के सबसे बड़े केंद्र हुआ करते थे, ठीक उसी प्रकार आज के इस अत्याधुनिक डिजिटल एज की सबसे बड़ी और निर्णायक रणनीतिक ताकत सेमीकंडक्टर है। कर्नल राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महान विजन के तहत शुरू किया गया इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन आज पूरे देश में एक समर्पित मिशन मोड में आगे बढ़ रहा है और राजस्थान अपनी भौगोलिक तथा नीतिगत विशिष्टताओं के कारण इस मिशन को साकार करने के लिए देश के सबसे उपयुक्त और अग्रणी राज्यों में से एक है। कोविड काल के संकट को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस महामारी के दौरान जब वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह से छिन्न-भिन्न हो गई थी, तब पूरी दुनिया ने सेमीकंडक्टर उत्पादन के क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता की परम आवश्यकता को तीव्रता से महसूस किया था।

उद्योग मंत्री ने निवेशकों के लिए राजस्थान सरकार द्वारा दी जा रही विशेष रियायतों का विवरण देते हुए बताया कि आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेम्बली एण्ड टेस्ट (OSAT) के साथ-साथ असेम्बली, टेस्टिंग, मार्किंग एण्ड पैकेजिंग (ATMP) इकाइयों की स्थापना के लिए राज्य सरकार पूरी तरह तत्पर है। इन इकाइयों को आकर्षित करने के लिए सरकार की ओर से बिजली शुल्क में भारी छूट, स्टांप ड्यूटी से पूर्ण राहत, उदार पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज अनुदान तथा पर्यावरण अनुकूल ग्रीन उपायों पर रीइम्बर्समेंट जैसी उत्कृष्ट सुविधाएं सीधे उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा, जो निवेशक 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेंगे, उन्हें राज्य सरकार की ओर से कस्टमाइज्ड पैकेज का विशेष लाभ भी दिया जा रहा है। इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने भूमि आवंटन की प्रक्रिया को पूरी तरह से सरल, सुगम और पारदर्शी कर दिया है। इस महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम के दौरान उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण देकर राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी और सुदृढ़ औद्योगिक नीतियों की बारीकियों से सभी को अवगत कराया। इस उच्चस्तरीय बैठक के अवसर पर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित संबंधित विभागों के सभी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं देश-विदेश से आए भारी संख्या में स्टेकहोल्डर्स और उद्योगपति मौजूद रहे, जिन्होंने राजस्थान के इस विजन की सराहना की।

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