जयपुर, 26 सितंबर 2026। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने शनिवार को राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास (आईएएस) से मुलाकात की। बैठक में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तन की गति बढ़ाने और नाबार्ड तथा राजस्थान सरकार के बीच साझेदारी को मजबूत करने पर व्यापक चर्चा हुई। इसमें जल सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन, डिजिटल कृषि, ग्रामीण ऋण, कृषि बाजार और उद्यम-संचालित सहकारिता को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रखा गया।

मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने राजस्थान के ग्रामीण विकास में नाबार्ड के योगदान की सराहना की। नाबार्ड अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने राज्य में बैंक के विभिन्न हस्तक्षेपों का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास के अगले चरण में केवल परिसंपत्ति सृजन तक सीमित रहने के बजाय त्वरित क्रियान्वयन, मजबूत ग्रामीण उद्यमों की स्थापना, जलवायु अनुकूलन और आजीविका के मापने योग्य परिणामों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

बैठक में जल सुरक्षा को राजस्थान की ग्रामीण विकास रणनीति का केंद्रीय स्तंभ स्वीकार किया गया। नाबार्ड ने सिंचाई के आधुनिकीकरण, जल उपयोग दक्षता, भूजल पुनर्भरण, जलागम विकास और नदी जोड़ो परियोजनाओं सहित महत्वपूर्ण जल बुनियादी ढांचे के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। राज्यभर में जल सुरक्षा से जुड़ी अवसंरचना को गति देने के लिए नाबार्ड ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) और अन्य वित्तीय तंत्रों के माध्यम से सहयोग बढ़ाएगा।

बैठक में प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) और सहकारी संस्थाओं को केवल ऋण उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं तक सीमित रखने के बजाय गतिशील, आत्मनिर्भर और उद्यम-संचालित ग्रामीण संस्थानों के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। नाबार्ड रियायती वित्तीय सहायता, क्षमता निर्माण और व्यावसायिक विकास के माध्यम से इस बदलाव में सहयोग करेगा।

पैक्स और अन्य सहकारी संस्थाएं कृषि इनपुट आपूर्ति, उपज खरीद, भंडारण, कस्टम हायरिंग, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और ग्रामीण खुदरा कारोबार में विविधीकरण कर सकती हैं। पैक्स, डेयरी सहकारी समितियों, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) तथा विपणन महासंघों के बीच बेहतर समन्वय से एकीकृत सहकारी उद्यम तंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया। इससे वित्त और बाजारों तक पहुंच सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में त्वरित, सरल और अधिक सटीक कृषि एवं ग्रामीण ऋण व्यवस्था स्थापित करने के लिए भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, एग्रीस्टैक और डिजिटल फसल सर्वेक्षण आंकड़ों के उपयोग पर भी चर्चा हुई। डिजिटल भूमि अभिलेखों का उपयोग भारतीय रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (आरबीआईएच) के यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (यूएलआई) और ‘कृषिका’ ऐप के माध्यम से पारदर्शी और सुगम ग्रामीण ऋण उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा।

एग्रीस्टैक और फसल सर्वेक्षण आंकड़ों के माध्यम से विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए फसल आधारित त्वरित मूल्यांकन, डिजिटल ऋण आकलन और समयबद्ध ऋण वितरण को सुगम बनाने पर बल दिया गया।

राजस्थान में ई-नाम की वर्तमान स्थिति और क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। इसके प्रभावी उपयोग के तहत बाजार एकीकरण, डिजिटल लेनदेन में वृद्धि, पारदर्शी मूल्य निर्धारण तथा किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सहकारी समितियों और खरीदारों के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

नाबार्ड राज्य में विपणन महासंघों को उपज एकत्रीकरण, बाजार तक पहुंच, मूल्य संवर्धन और कुशल कृषि विपणन अवसंरचना के विकास के लिए सहयोग देगा। कृषि विपणन के डिजिटलीकरण को किसानों को मिलने वाले मूल्य प्रतिफल में सुधार के प्रमुख कारक के रूप में स्वीकार किया गया।

बैठक में राजस्थान सरकार, नाबार्ड, वित्तीय संस्थानों, विकास एजेंसियों और जमीनी स्तर के हितधारकों को एक मंच पर लाने के लिए अक्टूबर 2026 में संयुक्त रूप से ‘ग्रामीण विकास सम्मेलन’ आयोजित करने का निर्णय लिया गया। सम्मेलन का उद्देश्य स्पष्ट प्राथमिकताओं, परियोजनाओं, वित्तपोषण के मार्गों, संस्थागत दायित्वों और मापने योग्य परिणामों के साथ ‘जलवायु-अनुकूल एवं जल-सुरक्षित ग्रामीण राजस्थान’ के लिए व्यावहारिक कार्य योजना तैयार करना होगा।

नाबार्ड अध्यक्ष और राजस्थान के मुख्य सचिव के बीच हुई यह उच्चस्तरीय बैठक जल सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन, डिजिटल कृषि, ग्रामीण ऋण, कृषि बाजार और सहकारी उद्यमों को केंद्र में रखकर ग्रामीण विकास की कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में हुई चर्चा को सामने लाती है। अक्टूबर में प्रस्तावित ग्रामीण विकास सम्मेलन में इन प्राथमिकताओं को परियोजनाओं, वित्तपोषण और संस्थागत दायित्वों से जोड़ते हुए मापने योग्य परिणामों वाली कार्य योजना तैयार की जाएगी।

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