विकसित राजस्थान-2047: मुख्य सचिव ने नदी बेसिन मास्टर प्लान तैयार करने के दिए निर्देश
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जल आत्मनिर्भरता के लिए इंदिरा गांधी नहर मरम्मत और घग्गर नदी के वैज्ञानिक अध्ययन सहित स्काडा तकनीक अपनाने पर दिया जोर।

जयपुर के शासन सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास प्रदेश में जल प्रबंधन और 'विकसित राजस्थान—2047' की कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए।
जयपुर। राजस्थान को जल प्रबंधन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने और 'विकसित राजस्थान—2047' के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूर्ण करने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। मुख्य सचिव एवं राजस्थान नदी बेसिन एवं जल संसाधन योजना प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में मंगलवार को शासन सचिवालय स्थित चिंतन कक्ष में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई, जिसमें जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने और प्रदेश को जल आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य के सभी नदी बेसिनों की योजनाएं आगामी 25 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 'विकसित राजस्थान—2047' के विजन के अनुरूप अत्यंत प्रभावी ढंग से तैयार की जाएं।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने राज्य के जल संसाधनों के कुशल प्रबंधन के लिए तकनीकी रूप से सुदृढ़ योजना निर्माण और एक सतत रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रणाली विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) के मरम्मत कार्यों में तेजी लाने और अंतिम छोर तक जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। घग्गर नदी के संदर्भ में उन्होंने मुख्य अभियंता हनुमानगढ़ को निर्देशित किया कि वे मानसून अवधि के दौरान आने वाले बाढ़ के पानी, उसकी उपलब्धता और उसके संभावित उपयोग का एक विस्तृत अध्ययन कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करें। साथ ही, सभी बेसिन मुख्य अभियंता एवं बेसिन अतिरिक्त मुख्य अभियंताओं को अपने-अपने संभागों में नदी बेसिन मास्टर प्लान को अपडेट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इस महत्वपूर्ण विमर्श में जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं प्राधिकरण के आयुक्त श्री अभय कुमार ने राजस्थान के विभिन्न नदी बेसिनों की वर्तमान स्थिति का खाका प्रस्तुत किया, जबकि प्राधिकरण के मुख्य अभियंता श्री राज पाल सिंह ने जारी परियोजनाओं एवं विभागीय योजनाओं की प्रगति से अवगत कराया। बैठक में रावी-ब्यास से प्राप्त जल की मात्रा, भूजल विकास, सिंचाई, पेयजल एवं औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ती मांग तथा नहरों में जल परिवहन के दौरान होने वाले 'सीपेज लॉस' जैसे गंभीर मुद्दों पर गहन मंथन हुआ। इस दौरान आईजीएनपी, गंग नहर, भाखड़ा नहर और सिद्धमुख-नोहर परियोजनाओं को कार्ययोजना के केंद्र में रखा गया।
भूजल की गिरती गुणवत्ता और भविष्य की पेयजल चुनौतियों को रेखांकित करते हुए मुख्य अभियंता (उत्तर), हनुमानगढ़ श्री प्रदीप रूस्तगी ने घग्घर नदी बेसिन पर एक डेटाबेस आधारित विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि सीमित सतही जल और भूजल के अत्यधिक दोहन के साथ-साथ आईजीएनपी क्षेत्र में जलभराव एवं अधिक जल खपत वाली फसलें बड़ी बाधाएं हैं। इसके समाधान हेतु उन्होंने कैनाल नेटवर्क के पुनरुद्धार, जल परिवहन प्रणाली में सुधार, आउटलेट करेक्शन, माइक्रो इरिगेशन के विस्तार, वर्षा जल संचयन और लघु बांधों के निर्माण का प्रस्ताव रखा। मुख्य सचिव ने जल संरक्षण हेतु 'स्काडा' (SCADA) जैसी आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया ताकि जल बर्बादी को न्यूनतम किया जा सके। बैठक में मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों सहित विभिन्न जोनों के अभियंता व्यक्तिगत रूप से और जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्मिलित हुए, जिससे जल आत्मनिर्भरता के इस संकल्प को धरातल पर उतारने की सामूहिक प्रतिबद्धता सुनिश्चित हुई।

