राजस्थान: 16 नदी बेसिनों के विकास के लिए बनेगा मास्टर प्लान, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 16 नदी बेसिनों की समीक्षा की और जल संरक्षण कार्यों की तकनीकी मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।

जयपुर के शासन सचिवालय में शुक्रवार को आयोजित बैठक के दौरान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार और अन्य अधिकारी प्रदेश की जल सुरक्षा और नदी बेसिन विकास योजना पर चर्चा करते हुए।
जयपुर, 3 अप्रैल। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में शासन सचिवालय में शुक्रवार को राजस्थान नदी बेसिन एवं जल संसाधन योजना प्राधिकरण और जल संसाधन के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित हुई। इसमें राज्य की 16 नदी बेसिनों के विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं प्राधिकरण के आयुक्त श्री अभय कुमार ने कार्यों और प्रगति से अवगत कराया। प्राधिकरण के मुख्य अभियंता श्री राज पाल सिंह ने कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
बेसिन-वाइज प्लानिंग और जल सुरक्षा की रणनीति
मुख्य सचिव ने जल उपलब्धता के आकलन और उसके समुचित उपयोग में राजस्थान नदी बेसिन एवं जल संसाधन योजना प्राधिकरण की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने राज्य में प्राधिकरण के महत्व को देखते हुए 16 नदी बेसिनों के समग्र विकास के लिए बेसिन-वाइज प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल की कमी वाले क्षेत्रों में अन्य क्षेत्रों से जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए योजना बनाने के भी निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि "जल संरक्षण एवं प्रबंधन के क्षेत्र में समन्वित प्रयासों से ही राज्य में दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।" उन्होंने कहा कि जल संसाधनों का संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए जल उपलब्धता और मांग का सटीक आकलन किया जाए।
सिंचाई एवं जन भागीदारी पर विशेष ध्यान
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि "जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया जाए और योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए।" उन्होंने कहा कि राज्य की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है, ऐसे में किसानों को सिंचाई हेतु पर्याप्त जल उपलब्ध होना चाहिए। बैठक में केंद्रीय जल आयोग, नई दिल्ली द्वारा नदी बेसिन मास्टर प्लान की गाइडलाइन एवं विकास से संबंधित प्रस्तुतीकरण दिया गया। साथ ही रिजर्वेशन मास्टर प्लान के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। राजस्थान नदी बेसिन एवं जल संसाधन योजना प्राधिकरण, जयपुर द्वारा प्रगति पर आधारित विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया।
तकनीकी मॉनिटरिंग और विभिन्न योजनाओं की समीक्षा
मुख्य सचिव ने एमजेएसए 2.1 एवं 2.2 के तहत जल संरक्षण कार्यों की तकनीकी प्लानिंग, मॉनिटरिंग, मोबाइल एप आधारित ट्रैकिंग और सर्वे को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्थान नदियों के पुनर्जीवन (पुनरुद्धार) परियोजना, जल शक्ति अभियान, जल संचय जन भागीदारी, वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान, कर्मभूमि से मातृभूमि कार्यक्रम तथा विकसित भारत जी-राम जी अधिनियम के अंतर्गत जल संरक्षण से जुड़े कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा कर निर्देश दिए। उन्होंने जिला पुनर्भरण योजना के तहत भूजल पुनर्भरण कार्यों को गति देने, जल संरक्षण में नवाचार अपनाने, नदियों के विकास कार्यों को प्राथमिकता देने तथा इंदिरा गांधी नहर के मरम्मत कार्य और जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस महत्वपूर्ण बैठक में सभी जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

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