मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में राजस्थान कृषि विपणन के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति का नया अध्याय लिख रहा है। राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) के एक दशक के सफर में प्रदेश ने न केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, बल्कि ई-नाम प्लेटफॉर्म पर व्यापार के मामले में देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 14 अप्रैल, 2016 को शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना ने राजस्थान की 173 मंडियों को डिजिटल रूप से एकीकृत कर कृषि व्यापार को पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-आधारित बनाया है। आज प्रदेश का किसान स्थानीय मंडियों की सीमाओं को लांघकर देश भर के खरीदारों से सीधे जुड़ रहा है, जिससे उन्हें अपनी उपज का वास्तविक मूल्य मिल रहा है और उनकी आमदनी में अभूतपूर्व वृद्धि हो रही है।

प्रदेश में ई-नाम की सफलता का प्रमाण इसके विस्तृत आंकड़े हैं, जिसके अनुसार 2016 से जनवरी 2026 तक राजस्थान में 3.16 करोड़ मीट्रिक टन कृषि उपज का व्यापार हुआ है, जिसका कुल मूल्य 1 लाख 30 हजार 772 करोड़ रुपए से अधिक है। इस प्रदर्शन के साथ राजस्थान कुल आवक के मामले में देश में दूसरे स्थान पर रहा है। वर्तमान में इस मंच पर 15 लाख 55 हजार से अधिक किसान, 87 हजार 509 व्यापारी और 27 हजार 989 कमीशन एजेंट सक्रिय हैं। साथ ही 546 किसान-उत्पादक संगठन (एफपीओ) भी इस पोर्टल पर पंजीकृत हैं, जो कुल 138 कृषि वस्तुओं का निर्बाध व्यापार कर रहे हैं। इस पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 12 फरवरी, 2026 से ई-नाम 2.0 का नवीन संस्करण लागू किया है, जो स्वचालित बोली प्रणाली, मांग-आपूर्ति डेटा और फिनटेक सहायता के जरिए अंतर-राज्यीय व्यापार को नई गति प्रदान कर रहा है।

तकनीकी नवाचार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश की 134 मंडियों में उपज की गुणवत्ता जांच के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आधारित मशीनों का उपयोग शुरू किया गया है। इससे न केवल परीक्षण के समय में कमी आई है, बल्कि गुणवत्ता मूल्यांकन में सटीकता और पारदर्शिता भी बढ़ी है। डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भी राजस्थान ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है, जहां 44 हजार 711 सौदों के माध्यम से 505 करोड़ रुपए से अधिक का ई-भुगतान किया गया है, जिससे प्रदेश देश में चौथे स्थान पर काबिज है। किसानों को वित्तीय समावेशन से जोड़ने और सुरक्षित लेनदेन हेतु 'कृषक उपहार योजना' के तहत ई-भुगतान करने वाले किसानों और व्यापारियों को नकद पुरस्कार एवं लॉटरी में शामिल कर प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि व्यापार के इस सुदृढ़ ढांचे में उपयोगकर्ताओं की सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18002700224 भी क्रियाशील है, जो तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करता है। राजस्थान का यह मॉडल आज देश के अन्य राज्यों के लिए आधुनिक कृषि विपणन की एक अनुकरणीय मिसाल बन चुका है।

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