राजस्थान में 200 नई ट्रेनों के संचालन की तैयारी, रेल इंफ्रास्ट्रक्चर का होगा कायाकल्प
केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने जालोर से दिल्ली के लिए पहली सीधी ट्रेन को हरी झंडी दिखाई; उत्तर पश्चिम रेलवे में पिट लाइनों की संख्या दोगुनी की जाएगी।

राजस्थान में उत्तर पश्चिम रेलवे की परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए मदार, खातीपुरा और बाड़मेर सहित विभिन्न स्टेशनों पर तीव्र गति से बनाई जा रही नई रेल पिट लाइन का एक दृश्य।
राजस्थान में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर का अभूतपूर्व कायाकल्प होने जा रहा है, जिससे आगामी समय में राज्य को 200 से अधिक नई ट्रेनों की शानदार सौगात मिलेगी। केंद्रीय रेलमंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने जालोर रेलवे स्टेशन पर आजादी के बाद पहली बार जालोर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से जोड़ने वाली सीधी नई रेलसेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर रेलमंत्री ने घोषणा की कि राजस्थान में रेलवे की आधारभूत संरचना को आधुनिक, सुदृढ़ एवं यात्री-केंद्रित बनाने की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। राज्य के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर पिट लाइनों, कोचिंग टर्मिनलों, यार्ड आधुनिकीकरण, दोहरीकरण, नये परीक्षण, ट्रेक की गति में वृद्धि एवं स्टेशन पुनर्विकास जैसे क्रांतिकारी कदम उठाए जा रहे हैं। ट्रेनों के रखरखाव, धुलाई, निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण की क्षमता में इस वृद्धि से न केवल परिचालन दक्षता बढ़ेगी, बल्कि उत्तर पश्चिम रेलवे परिक्षेत्र में रेल यातायात वृद्धि और समग्र अवसंरचना विकास के लिए नए रास्ते भी खुलेंगे।
राजस्थान में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के चलते नई ट्रेनों की संचालन क्षमता तेजी से विकसित की जा रही है, जिसका सीधा और विशेष लाभ सीमावर्ती क्षेत्रों, ग्रामीण अंचलों तथा औद्योगिक क्षेत्रों को प्राप्त होगा। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन के अनुसार, उत्तर पश्चिम रेलवे अपनी रेल रखरखाव क्षमताओं के व्यापक विस्तार की दूरगामी योजना पर योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहा है, क्योंकि रेल परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए ट्रेन रखरखाव क्षमता में वृद्धि किया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में, ट्रेनों के प्राइमरी मेंटिनेंस के लिए अति आवश्यक पिट लाइनों की संख्या उत्तर पश्चिम रेलवे के अधिकार क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर 22 है।
रेलवे ने अब अपनी इन रखरखाव क्षमताओं का रणनीतिक विकेन्द्रीकरण करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में मदार, उमरा, लालगढ़, श्रीगंगानगर, हिसार, सूरतगढ़, खातीपुरा (जयपुर), बाड़मेर और जैसलमेर स्टेशनों पर रेल रखरखाव के लिए 20 नई रेल पिट लाइनों के निर्माण का कार्य अत्यंत तीव्र गति से चल रहा है। इन सभी विकास कार्यों के प्रगति की उच्च स्तर पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। इसके अतिरिक्त, जयपुर शहर के विस्तार को देखते हुए अधिकाधिक रेल परिवहन की सुविधाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जयपुर के निकट भट्टो की गली को एक मेगा कोचिंग टर्मिनल के रूप में विकसित करने की योजना भी प्रस्तावित की गई है। इस प्रस्तावित मेगा टर्मिनल में पिट लाइन, वॉशिंग लाइन, स्टेबल लाइन और सिक लाइन जैसी अत्याधुनिक अनुरक्षण सुविधाएँ विकसित की जाएगी, ताकि वन्दे भारत तथा अन्य ट्रेनों के रैक का सुचारू रूप से अनुरक्षण किया जा सके।
इस व्यापक और ऐतिहासिक विस्तार से उत्तर पश्चिम रेलवे की मौजूदा रखरखाव क्षमता लगभग दोगुनी होने की उम्मीद है, जिससे रेल संचालन क्षमता में अभूतपूर्व तब्दीली आएगी। इससे देश के विभिन्न हिस्सों के लिए नई रेल सेवाओं की शुरुआत के पर्याप्त और नए अवसर पैदा होंगे, जो सभी श्रेणी के यात्रियों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होंगे और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को एक नया बूस्ट देंगे। राजस्थान में रेलवे विकास के यह वर्तमान कार्य आने वाले वर्षों में राज्य की परिवहन व्यवस्था को एक नई और आधुनिक दिशा प्रदान करेंगे। ये बुनियादी सुधार प्रदेश को देश के प्रमुख आर्थिक एवं पर्यटन केंद्रों से और अधिक मजबूती के साथ जोड़ेंगे, जिससे आगामी समय में राजस्थान भारतीय रेल के सबसे तेज़ी से विकसित होने वाले राज्यों में अग्रणी भूमिका निभाएगा और नई ट्रेनों, आधुनिक स्टेशनों तथा सुदृढ़ रेल नेटवर्क के माध्यम से आमजन को व्यापक लाभ प्राप्त होगा।

Pratahkal Bureau
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