मोदी सरकार के 12 साल: राजस्थान को रेलवे और तकनीक की मिली बड़ी सौगात
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जयपुर में मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियां गिनाईं और राजस्थान के लिए नई तकनीकी व रेलवे परियोजनाओं का ऐलान किया।

जयपुर में आयोजित मीडिया संवाद में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (दाएं), भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ (मध्य) और संगठन महामंत्री अजेय कुमार (बाएं)।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल ने देश के विकास और सुशासन की एक नई कार्य संस्कृति को जन्म दिया है, जिसका प्रत्यक्ष और व्यापक लाभ राजस्थान को मिल रहा है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण मीडिया संवाद कार्यक्रम में केंद्रीय रेल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रदेश के लिए बुनियादी ढांचे, तकनीकी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी घोषणाएं कीं।
मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आंकड़ों के माध्यम से यूपीए सरकार और वर्तमान सरकार के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राजस्थान राज्य को कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान रेलवे के लिए मात्र 682 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया जाता था। मोदी सरकार ने इस बजट में अभूतपूर्व वृद्धि करते हुए इसे 15 गुणा बढ़ाकर 10,828 करोड़ रुपए कर दिया है। वर्तमान में प्रदेश भर में लगभग 76,000 करोड़ रुपए की लागत से रेलवे के विभिन्न विकास कार्य तीव्र गति से संचालित किए जा रहे हैं।
रेलवे के आधुनिकीकरण पर विस्तार से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान के 85 रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ पुनर्विकसित किया जा रहा है, जिसमें जयपुर, गांधी नगर, जैसलमेर, जोधपुर, अलवर और कोटा जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। इन स्टेशनों के कायाकल्प में राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और वास्तुकला का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। कोविड-19 महामारी के बाद प्रदेश को 46 नई रेल सेवाएं मिली हैं और आज से अजमेर-जयपुर-दरभंगा रेल सेवा को नियमित करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, औद्योगिक गतिशीलता बढ़ाने के लिए 24 गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों का विकास किया जा रहा है।
शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में नई क्रांति का सूत्रपात करते हुए मंत्री ने एमएनआईटी जयपुर में क्वांटम लैब, सेमीकंडक्टर लैब और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब स्थापित करने की घोषणा की। साथ ही, जयपुर को एक अत्याधुनिक एआई डेटा सेंटर और मेडिकल हब के रूप में विकसित करने की योजना पर जोर दिया गया। 560 किलोमीटर लंबे फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के तहत 14,700 करोड़ रुपए के निवेश से राजस्थान की औद्योगिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह विकास यात्रा न केवल राजस्थान की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि 'विकसित भारत' के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो रही है।

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