राजस्थान में रबी सीजन के दौरान किसानों को डीएपी और यूरिया की उपलब्धता को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की मांग के अनुरूप समय पर उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। खरीफ सीजन-2026 में प्रदेश में डीएपी और यूरिया की मांग से अधिक आपूर्ति की गई है। रबी सीजन में भी केंद्र सरकार से लगातार उर्वरक मिलने के कारण उपलब्धता बनाए रखने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने 9 अक्टूबर को बताया कि खरीफ सीजन-2026 में डीएपी की 5 लाख 10 हजार मीट्रिक टन मांग के मुकाबले 5 लाख 44 हजार 995 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया। इसी तरह यूरिया की 11 लाख मीट्रिक टन मांग के विरुद्ध 17 लाख 15 हजार 814 मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति की गई। इन आंकड़ों के अनुसार, खरीफ सीजन में दोनों प्रमुख उर्वरकों की मांग से अधिक उपलब्धता सुनिश्चित की गई।

रबी सीजन में बुवाई अभी प्रारंभिक अवस्था में है। वर्तमान में प्रदेश में 1 लाख 5 हजार 584 मीट्रिक टन डीएपी और 3 लाख 63 हजार 969 मीट्रिक टन यूरिया का स्टॉक उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त डीएपी के 14 रैक परिवहन के दौरान हैं, जिनमें लगभग 35 हजार मीट्रिक टन उर्वरक है। इनके 14 अक्टूबर, 2026 तक किसानों के लिए उपलब्ध होने की संभावना है।

डॉ. मीणा ने बताया कि वर्तमान साप्ताहिक खपत के आधार पर प्रदेश में लगभग 18 दिन के लिए डीएपी और 35 दिन के लिए यूरिया का स्टॉक उपलब्ध है। केंद्र सरकार से लगातार आपूर्ति जारी रहने के कारण रबी सीजन में भी किसानों की मांग के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सरकार का जोर समयबद्ध आपूर्ति बनाए रखने पर है, ताकि किसानों को खेती के लिए जरूरी उर्वरक मिलने में परेशानी न हो।

उर्वरकों की उपलब्धता के साथ ही कृषि विभाग ने जमाखोरी, कालाबाजारी, यूरिया के अवैध डायवर्जन और वितरण में अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज की है। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि उर्वरक वितरण में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग विशेष अभियान चलाकर जमाखोरी, कालाबाजारी, यूरिया के अवैध डायवर्जन, टैगिंग और अन्य अनियमितताओं में शामिल विक्रेताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रहा है।

वर्ष 2026-27 में अब तक विभाग ने 11,770 उर्वरक विक्रेताओं का निरीक्षण किया है और 9,585 नमूने लिए हैं। अनियमितताएं मिलने पर 1,238 फर्मों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। इसके अलावा 64 उर्वरक विक्रेताओं के विक्रय पर रोक लगाई गई, जबकि 128 फर्मों के उर्वरक प्राधिकार पत्र निलंबित अथवा निरस्त किए गए। इस दौरान 25 व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई और 11 गिरफ्तारियां भी की गई हैं।

उर्वरकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए कृषि विभाग विशेष गुण नियंत्रण अभियान चला रहा है। इसके तहत औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सभी जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, जहां से उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण और आपूर्ति की निरंतर निगरानी की जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराना है।

कृषि मंत्री ने नैनो डीएपी और नैनो यूरिया की खरीद को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि किसानों पर इन उत्पादों को खरीदने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया जा रहा है। किसान अपनी इच्छा और आवश्यकता के अनुसार इन उत्पादों को खरीदने और उपयोग करने का निर्णय ले सकते हैं। सरकार उपलब्ध परिणामों को ध्यान में रखते हुए नैनो उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है।

उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग रोकने के लिए भी सरकार ने सख्ती बरतने की बात कही है। कृषि मंत्री के अनुसार, उर्वरकों का वितरण कृषि विभाग के कार्मिकों की उपस्थिति में कराया जा रहा है, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार उर्वरक मिल सकें। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखने तथा किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

राजस्थान में रबी सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए मौजूदा स्टॉक, परिवहन के दौरान मौजूद डीएपी रैक, केंद्र से जारी आपूर्ति और जिलास्तरीय निगरानी व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही, निरीक्षण, नमूना जांच और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई के जरिए गुणवत्ता तथा वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

Next Story