राजस्थान में विशेष योग्यजनों के लिए 75 करोड़ जारी, युवाओं को मिला संबल
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 'सपनों की उड़ान' कार्यक्रम में 5.5 लाख से अधिक लाभार्थियों के खातों में डीबीटी से राशि ट्रांसफर की और सहायक उपकरण बांटे।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में विशेष योग्यजन खिलाड़ी को सम्मानित किया।
जयपुर। राजस्थान में विशेष योग्यजनों के सशक्तीकरण, स्वावलंबन और समान अवसरों को लेकर राज्य सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि दृढ़ संकल्प, हौसले और निरंतर प्रयासों से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। सरकार विशेष योग्यजनों के सपनों को साकार करने में सारथी बनेगी और उन्हें सम्मान, स्वावलंबन तथा समान अवसर उपलब्ध करवाने के लिए काम करेगी।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शनिवार को जयपुर में आयोजित ‘सपनों की उड़ान-असंभव कुछ भी नहीं’ कार्यक्रम के तहत विशेष योग्यजन युवा संवाद को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सामाजिक सुरक्षा पेंशन (विशेष योग्यजन) के साढ़े पांच लाख से अधिक लाभार्थियों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 75 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की। साथ ही विशेष योग्यजनों को सहायक उपकरण वितरित किए और उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले खिलाड़ियों एवं समाजसेवियों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं में ऊर्जा, नए विचार, कुछ नया करने का जुनून और असंभव को संभव बनाने का साहस है। उन्होंने विशेष योग्यजन युवाओं से बुलंद हौसलों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य सरकार उनके सपनों को साकार करने के लिए उनके साथ खड़ी है। सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मूलमंत्र के अनुरूप विशेष योग्यजनों के सशक्तीकरण के लिए काम कर रही है। हमारा संकल्प ऐसा राजस्थान बनाना है, जहां प्रत्येक विशेष योग्यजन को सम्मान, स्वावलंबन और समान अवसर मिलें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विशेष योग्यजनों के प्रति संवेदना और सम्मान का भाव रखते हैं। इसी भावना के अनुरूप प्रधानमंत्री ने विशेष योग्यजनों के लिए दिव्यांग शब्द का उपयोग किया, जिससे समाज में उनकी गरिमा बढ़ी और उनके योगदान को भी स्वीकृति मिली। प्रधानमंत्री की पहल पर शुरू किए गए सुगम्य भारत अभियान से दिव्यांगजनों को सम्मान और समृद्धि का जीवन मिला है। इसके साथ ही दिव्यांगता की श्रेणियों की संख्या 7 से बढ़ाकर 21 की गई है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने विशेष योग्यजनों के लिए समान अवसर नीति, 2025 लागू की है। प्रदेश में 2 लाख 71 हजार यूडीआईडी कार्ड जारी किए गए हैं। अनुजा निगम के माध्यम से विशेष योग्यजनों सहित विभिन्न श्रेणियों के 7 हजार व्यक्तियों को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध करवाया गया है। विशेष योग्यजनों के लिए संचालित आवासीय संस्थानों में मैस भत्ते की राशि बढ़ाकर 3 हजार 250 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए साढ़े 5 लाख लोगों को 1 हजार 350 रुपये मासिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है। इसके अलावा गत वर्ष 2 हजार 500 स्कूटी और गत दो वर्षों में 44 हजार अंग उपकरण वितरित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के युवा शक्ति के प्रति विश्वास से प्रेरणा लेकर डबल इंजन सरकार ने नई युवा नीति और नई रोजगार नीति लागू की है। प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए 410 से अधिक परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न करवाई जा चुकी हैं। राज्य में 1 लाख 93 हजार पदों पर सरकारी नियुक्तियां दी गई हैं, जबकि 1 लाख 18 हजार पदों पर भर्तियां प्रक्रियाधीन हैं। इसके अतिरिक्त 70 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी।
उन्होंने बताया कि निजी क्षेत्र में 5 लाख युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए गए हैं। राज्य सरकार अब तक 3 लाख 70 हजार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर चुकी है। मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के तहत 4 लाख लाभार्थियों को 1 हजार 643 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। प्रदेश में 21 नवीन राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज और 76 नवीन राजकीय महाविद्यालय स्थापित किए गए हैं। वहीं, सरकार अब तक 220 सरकारी कॉलेज भवनों का निर्माण कर चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए प्रदेश के 305 महाविद्यालयों में नई किरण नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं। युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में स्टार्टअप के अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। इसके परिणामस्वरूप 5 हजार से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हुए हैं और 65 आई-स्टार्ट लॉन्चपैड नेस्ट स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने प्रदेश में खेल सुविधाओं और खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि 17 नए खेलो इंडिया केंद्र शुरू किए गए हैं। 41 जिला मुख्यालयों पर एक जिला एक खेल योजना के तहत खेल अकादमियां संचालित की जा रही हैं। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए राजस्थान टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम भी लागू की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि युवा भारत के नौजवानों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। युवाओं को सामर्थ्य, स्वाभिमान, स्वावलंबन, सुविधा और संसाधनों की शक्ति मिलने पर हर लक्ष्य आसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के युवा खिलाड़ियों ने हाल ही में आयोजित पैरा एशियन गेम्स में प्रदेश का नाम रोशन किया है। वहीं, कई विशेष योग्यजन युवाओं ने अपनी मेहनत के दम पर प्रशासनिक सेवाओं में भी मुकाम हासिल किया है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने खेल जगत में प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले विशेष योग्यजन खिलाड़ियों मोना अग्रवाल, सृष्टि अरोड़ा और कृष्णा नागर को सम्मानित किया। विशेष योग्यजनों के सशक्तीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म भूषण डी.आर. मेहता का भी सम्मान किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वन विभाग में नियुक्त पैरा खिलाड़ियों के स्थायीकरण के संबंध में आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में दृष्टिबाधित प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी मनु गर्ग ने प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी में आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत के महत्व पर अपने विचार साझा किए। पैरालंपिक पदक विजेता निशानेबाज मोना अग्रवाल ने अपने संघर्ष के अनुभव बताए। पूर्व आईएएस अधिकारी एवं भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के संस्थापक डी.आर. मेहता ने विशेष योग्यजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार और संस्थाओं के साझा प्रयासों की आवश्यकता पर विचार रखे।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उदयपुर की राष्ट्रीय पैरा फेंसिंग खिलाड़ी सुनिता कुमारी और जैसलमेर के सामाजिक कार्यकर्ता सज्जन खां ने भी अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव युवा मामले एवं खेल प्रवीण गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता दिनेश कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में विशेष योग्यजन युवा उपस्थित रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न जिलों के विशेष योग्यजन युवा भी कार्यक्रम से जुड़े।
राज्य सरकार की ओर से पेंशन हस्तांतरण, सहायक उपकरण वितरण, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार, शिक्षा और खेल सुविधाओं से जुड़े प्रयासों के माध्यम से विशेष योग्यजनों को आत्मनिर्भर बनाने तथा युवाओं को समान अवसर उपलब्ध करवाने की प्रतिबद्धता इस कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र रही।

