राजस्थान में विद्युत तंत्र सुदृढ़: निर्बाध आपूर्ति के लिए नवाचार जारी
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में डिस्कॉम्स की बेहतर मॉनिटरिंग से राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों में बड़ी कमी दर्ज की गई है।

राजस्थान में सुदृढ़ होती विद्युत व्यवस्था पर चर्चा करते हुए ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरगामी निर्णयों और राज्य सरकार के बेहतर प्रबंधन के फलस्वरूप राजस्थान में विद्युत प्रसारण एवं वितरण तंत्र अभूतपूर्व रूप से सुदृढ़ हुआ है। भीषण गर्मी के दौर में भी राज्य के घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। सरकार के इस कुशल संचालन का ही परिणाम है कि जयपुर, जोधपुर एवं अजमेर विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा की जा रही सतत मॉनिटरिंग और नवाचारों से उपभोक्ताओं की शिकायतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। बीते वर्ष के अप्रेल-मई की तुलना में इस वर्ष लगभग 41 हजार शिकायतों का कम होना, विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में आए बड़े सुधार को प्रमाणित करता है।
राज्य सरकार वर्ष 2027 तक किसानों को दिन के समय पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विद्युत प्रसारण तंत्र के सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया जा रहा है। सरकार के वर्तमान कार्यकाल में अब तक प्रदेशभर में 33 केवी के 444 नए सब स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 211 सब स्टेशनों पर कार्य प्रगतिरत है। इसके अतिरिक्त 400, 220 और 132 केवी के 59 जीएसएस की स्थापना हो चुकी है और 145 जीएसएस पर निर्माण कार्य जारी है। ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाते हुए राज्य में कुसुम-ए, सी और रूफटॉप सहित सौर ऊर्जा संयंत्रों के वृहद नेटवर्क के जरिए लगभग 7 हजार 376 मेगावाट और कोयला आधारित तापीय परियोजनाओं से 7 हजार 830 मेगावाट विद्युत क्षमता का निर्माण किया गया है।
बढ़ते तापमान के बीच ट्रिपिंग और फॉल्ट की समस्याओं से निपटने के लिए डिस्कॉम्स ने पूरी तरह अलर्ट मोड पर कार्य किया है। गर्मी की दस्तक से पूर्व ही ट्रांसफार्मरों में 13 हजार 473 एमवीए की क्षमता वृद्धि, 11 केवी और 33 केवी के 4 हजार 815 फीडरों का विभाजन, लगभग 5 हजार सर्किट लाइनों का नेटवर्क विस्तार और 3 हजार 682 जीएसएस का व्यापक रखरखाव सुनिश्चित किया गया। उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु टोल फ्री कॉल सेंटर्स, ग्राहक सेवा केन्द्र, केन्द्रीय नियंत्रण कक्ष के साथ ही 1129 फॉल्ट रेक्टिफिकेशन टीमों की तैनाती की गई है। आंकड़ों के अनुसार, जयपुर, अजमेर और जोधपुर डिस्कॉम में 1 अप्रेल 2025 से 20 मई 2025 तक नो करंट की 3 लाख 52 हजार शिकायतें दर्ज हुई थीं, जो 2026 की इसी अवधि में घटकर 3 लाख 11 हजार रह गई हैं।
प्रदेश में विद्युत की मांग में भारी उछाल के बावजूद सरप्लस बिजली उपलब्ध है। हीटवेव के चलते 1 मई को 2860 लाख यूनिट की मांग बढ़कर 3850 लाख यूनिट तक पहुँच गई है। इस ग्रीष्म ऋतु में 27 मई को रात्रि 10.15 बजे सर्वाधिक 17333 मेगावाट की मांग दर्ज की गई, जिसे बिना किसी कटौती के पूरा किया गया। राज्य सरकार द्वारा 21 मई से 27 मई तक लगातार मांग के मुकाबले अतिरिक्त बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। रात्रि के समय सोलर उत्पादन न होने पर उत्पन्न होने वाली संभावित कमी को एनर्जी एक्सचेंज के माध्यम से क्रय कर पूरा किया जा रहा है।
स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा को प्राथमिकता देते हुए उत्पादन इकाइयों के रखरखाव के साथ-साथ सौर, पवन ऊर्जा, पम्प स्टोरेज, गैस, जल विद्युत और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस कड़ी में जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेवीवीएनएल) ने एक अनूठी पहल करते हुए कनिष्ठ, सहायक और अधिशासी अभियंताओं को रात्रि 8 से 11 बजे तक फील्ड में उतारकर 'विद्युत सुरक्षा' अभियान शुरू किया है। पीक ऑवर्स के दौरान जीएसएस, फीडर, ट्रांसफार्मर और पिलर बॉक्स की सघन जांच एवं लोड बैलेंसिंग से ट्रिपिंग, नो करंट और वोल्टेज उतार-चढ़ाव की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित हो रहा है, जिससे आमजन को बड़ी राहत मिली है।

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