राजस्थान पुलिस का सख्त रुख: 20 दिनों में 1.58 लाख वाहनों पर चला चाबुक
राजस्थान की सड़कों पर पुलिस का महा-अभियान: नियमों का उल्लंघन करने वाले 1.58 लाख वाहनों पर हुई कार्रवाई। ब्लैक फिल्म और फैंसी नंबर प्लेट वालों की खैर नहीं। क्या आपकी गाड़ी भी है नियमों के दायरे में? जानिए क्या है पुलिस का अगला कदम।

जयपुर। राजस्थान की सड़कों पर अनुशासनहीनता के खिलाफ पुलिस विभाग ने एक अभूतपूर्व और कठोर अभियान छेड़ दिया है। सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पुलिस ने नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले वाहन चालकों पर 'वज्रपात' करते हुए बीते 20 दिनों में 1.58 लाख से अधिक वाहनों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की है। महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार और यातायात एडीजी अनिल पालीवाल के पर्यवेक्षण में संचालित इस महा-अभियान ने प्रदेश में यातायात व्यवस्था के प्रति पुलिस की सख्ती को स्पष्ट रूप से दर्शा दिया है।
चार जून से शुरू हुए इस विशेष अभियान के दौरान पुलिस की निगाहें मुख्य रूप से उन वाहनों पर टिकी रहीं, जो सड़क सुरक्षा के मानदंडों को दरकिनार कर रहे थे। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस यातायात डॉ. बी.एल. मीणा ने जानकारी दी कि 23 जून तक कुल 1,58,517 वाहनों पर प्रवर्तन कार्रवाई की गई है। इस दौरान ब्लैक फिल्म लगे वाहनों पर सबसे अधिक 58,965 कार्रवाई की गईं, जबकि नियम विरुद्ध नंबर प्लेट के मामले में 40,367 वाहन चालकों का चालान किया गया। इसके अतिरिक्त, अनाधिकृत शब्द और चिन्हों के उपयोग, अवैध बॉडी या चेचिस में बदलाव, अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, हूटर तथा तेज आवाज वाले प्रेशर हॉर्न के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई है।
अभियान की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल 23 जून को ही पूरे राज्य में 7,416 चालान काटे गए। जिलावार आंकड़ों के अनुसार, इस विशेष दिन पर जालोर जिला 829 कार्यवाहियों के साथ प्रदेश में अग्रणी रहा, जबकि अजमेर जिला 710 चालानों के साथ दूसरे स्थान पर बना रहा। जयपुर कमिश्नरेट में कुल 807 वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, जिसमें जयपुर पश्चिम का योगदान सर्वाधिक रहा।
एडीजी डॉ. मीणा ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि एक सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों के खिलाफ यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे निर्धारित मानकों के अनुरूप ही वाहनों का संचालन करें, ताकि प्रदेश की सड़कों को सुरक्षित और अनुशासित बनाया जा सके। यह महा-अभियान महज एक दंडात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि सुरक्षित यातायात के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जो भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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