कानून व्यवस्था और सुरक्षा के साथ संवेदनशील पुलिसिंग का उदाहरण बन चुके राजस्थान पुलिस के विशेष ‘महिला सुरक्षा संकल्प’ अभियान ने प्रदेशभर में महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के बीच भरोसे की नई मिसाल कायम की है। महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के दिशा-निर्देशन में चलाए जा रहे इस अभियान के तीसरे सप्ताह में राजस्थान पुलिस ने कच्ची बस्तियों, कारखानों, ईंट-भट्टों, निर्माण स्थलों और प्रवासी बस्तियों में कार्यरत 41,923 महिला श्रमिकों से सीधा संवाद स्थापित किया। इसके साथ ही पुलिस टीमों ने 7,834 बुजुर्ग दंपत्तियों और अकेली रह रही माताओं-बहनों के घर पहुंचकर उनका हालचाल जाना और उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान भी किया।

पुलिस के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार महिला श्रमिकों और झुग्गी-झोपड़ियों (स्लम एरिया) में संवाद स्थापित करने में औद्योगिक जिले सबसे आगे रहे। भिवाड़ी जिला पुलिस ने सर्वाधिक 3,896 महिला श्रमिकों तक पहुंच बनाई। इसके बाद खैरथल-तिजारा में 3,315, जयपुर वेस्ट में 2,850, बीकानेर में 2,712, चित्तौड़गढ़ में 2,700, करौली में 2,020 और अलवर में 1,978 महिला श्रमिकों से पुलिस टीमों ने बड़े स्तर पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किए।

अभियान के दौरान पुलिस ने विभिन्न कार्यस्थलों पर पहुंचकर महिला श्रमिकों को जागरूक किया। कच्ची बस्तियों एवं स्लम क्षेत्रों में 10,182 महिलाओं से संपर्क किया गया, जिनमें चित्तौड़गढ़ में 1,240 और पाली में 775 महिलाएं प्रमुख रहीं। कारखानों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में 7,349 महिला श्रमिकों को जागरूक किया गया, जिनमें भिवाड़ी में 1,328 और जयपुर वेस्ट में 700 महिलाएं शामिल रहीं। निर्माण स्थलों पर 4,622 महिलाओं से संवाद स्थापित किया गया, जिनमें बीकानेर में 425 और उदयपुर में 336 महिलाएं प्रमुख रहीं। ईंट-भट्टों पर कार्यरत 3,682 महिलाओं तक पुलिस पहुंची, जिनमें खैरथल-तिजारा में 796 और श्रीगंगानगर में 367 महिलाएं शामिल रहीं। प्रवासी महिला श्रमिकों में 3,890 महिलाओं से संपर्क किया गया, जिनमें जयपुर वेस्ट में 500 और बीकानेर में 410 महिलाएं प्रमुख रहीं। इसके अतिरिक्त 12,198 महिलाओं से अन्य सार्वजनिक एवं असंगठित क्षेत्रों में भी संवाद स्थापित किया गया।

‘महिला सुरक्षा संकल्प’ अभियान के तहत बुजुर्ग महिलाओं और अकेले रह रहे दंपत्तियों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष गृह-संवाद अभियान चलाया गया। अपराधों और साइबर ठगी से बचाव के उद्देश्य से पुलिस टीमों ने सीधे उनके घरों पर पहुंचकर व्यक्तिगत संवाद किया। पूरे राज्य में 7,834 बुजुर्ग महिलाओं को जागरूक किया गया। इस अभियान में करौली जिला पुलिस ने सर्वाधिक 960 बुजुर्ग महिलाओं तक पहुंचकर रिकॉर्ड बनाया। इसके अलावा जोधपुर सिटी वेस्ट में 580, सवाई माधोपुर में 493, अजमेर में 458 और बाड़मेर में 320 बुजुर्ग महिलाओं तक पहुंचकर सुरक्षा और सहायता संबंधी जानकारी दी गई।

आत्मीय संवाद के दौरान पुलिस ने एकल महिलाओं और बुजुर्ग दंपत्तियों को सुरक्षित एवं सतर्क जीवन के लिए आवश्यक सुझाव दिए। उन्हें घर के मुख्य दरवाजे, खिड़कियों और तालों को हमेशा सुरक्षित रखने, किसी भी अनजान व्यक्ति को पहचान के बिना घर में प्रवेश नहीं देने तथा घरेलू सहायकों, किरायेदारों और देखभाल करने वालों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य रूप से कराने की सलाह दी गई। पुलिस ने बैंक, एटीएम, ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड और अन्य व्यक्तिगत जानकारी किसी से साझा नहीं करने, साइबर ठगी से सतर्क रहने तथा किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या लालच भरे निवेश प्रस्ताव पर भरोसा नहीं करने के लिए भी जागरूक किया। साथ ही आपात स्थिति में 112, साइबर अपराध की स्थिति में 1930 तथा महिला सुरक्षा संबंधी सहायता के लिए 1090 हेल्पलाइन पर संपर्क करने की जानकारी भी दी गई।

महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि राजस्थान पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और विश्वास के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा संकल्प अभियान इसी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है, जिसके माध्यम से पुलिस और समाज के बीच विश्वास एवं सहभागिता को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। अभियान के तीसरे सप्ताह के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि राजस्थान पुलिस सुरक्षा के साथ संवाद और जनविश्वास को भी समान प्राथमिकता देते हुए समाज के संवेदनशील वर्गों तक लगातार पहुंच बना रही है।

Pratahkal Bureau

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