आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग से साइबर अपराधियों द्वारा निवेश के नाम पर की जा रही संगठित ठगी को लेकर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन को सतर्क रहने की कड़ी चेतावनी जारी की है। पुलिस के अनुसार, प्रसिद्ध उद्योगपतियों, निवेशकों और यहां तक कि अमिताभ बच्चन जैसे सेलिब्रिटीज की फर्जी आवाज और वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से लोगों को कम समय में भारी मुनाफे का लालच दिया जा रहा है, जैसे ₹10,000 के निवेश पर रोज ₹5,000 कमाने का दावा।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) वी. के. सिंह ने बताया कि साइबर ठग फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर आकर्षक विज्ञापनों के जरिए लोगों को फंसाते हैं। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद उपयोगकर्ताओं को “Elite Investment Group” और “Super Trading Club” जैसे नामों वाले व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप्स में जोड़ लिया जाता है, जहां मौजूद अधिकांश प्रोफाइल वास्तविक नहीं होते बल्कि साइबर अपराधियों द्वारा बनाए गए फर्जी अकाउंट या बॉट्स होते हैं। इन ग्रुप्स में नकली मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा कर लोगों का विश्वास बनाया जाता है और फिर उन्हें एक लिंक या एपीके फाइल के जरिए फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

पुलिस के अनुसार, इन फर्जी ऐप्स में शुरुआत में निवेश और मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाया जाता है, जिससे निवेशक को वास्तविकता का भ्रम होता है। लेकिन जब वह अपनी राशि निकालने का प्रयास करता है, तो उससे टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, कमीशन या अन्य शुल्क के नाम पर अतिरिक्त धनराशि जमा करने की मांग की जाती है। इसके बाद ठग संपर्क तोड़कर पूरी राशि लेकर फरार हो जाते हैं।

राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी ऐप को केवल Google Play Store या Apple App Store से ही डाउनलोड किया जाए और किसी भी APK फाइल या अनजान लिंक से इंस्टॉल न किया जाए। निवेश से पहले संबंधित कंपनी का SEBI पंजीकरण अवश्य जांचने, किसी भी अनजान व्यक्ति या खाते में धनराशि ट्रांसफर न करने तथा व्हाट्सएप और टेलीग्राम की प्राइवेसी सेटिंग्स को “My Contacts” पर रखने की सलाह दी गई है। साथ ही किसी भी निवेश प्रस्ताव की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने पर जोर दिया गया है।

यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होता है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने या 1930 साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करने की अपील की गई है। इसके अतिरिक्त राजस्थान पुलिस के साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी सहायता प्राप्त की जा सकती है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका सतर्कता और सत्यापन है, क्योंकि लालच आधारित निवेश योजनाएं अक्सर बड़े वित्तीय नुकसान का कारण बन रही हैं।

Pratahkal Bureau

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