डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का बढ़ा खतरा, राजस्थान पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
राजस्थान पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हो रही साइबर ठगी को लेकर एडवाइजरी जारी की है। जानिए फर्जी वारंट, वीडियो कॉल और नोटिस के जरिए ठग कैसे लोगों को फंसाते हैं और इससे कैसे बचें।

जयपुर, 17 अगस्त। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ रहे साइबर अपराधों को लेकर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन को सतर्क किया है। महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार जारी एडवाइजरी में लोगों से अपील की गई है कि फर्जी कॉल, वीडियो कॉल, नोटिस या गिरफ्तारी के नाम पर डरने के बजाय सतर्कता बरतें और ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल पुलिस को सूचना दें।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी इन दिनों खुद को सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कस्टम या एटीएस का अधिकारी बताकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ठग फर्जी वारंट, समन और नोटिस भेजकर लोगों को भयभीत करते हैं। इसके बाद वीडियो कॉल के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट का एहसास कराकर उनकी जमा पूंजी हड़प लेते हैं।
एडीजी श्री सिंह ने बताया कि इस तरह की धोखाधड़ी से बचाव के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने ‘अभय’ नामक एआई आधारित पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक पुलिस, न्यायालय या सीबीआई के नाम से भेजे गए संदिग्ध नोटिस और वारंट की सत्यता की जांच कर सकते हैं।
साइबर अपराधी फोन, व्हाट्सएप या वीडियो कॉल के जरिए लोगों से संपर्क कर दावा करते हैं कि उनके आधार कार्ड, बैंक खाते या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किसी अवैध गतिविधि में किया गया है। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला, मादक पदार्थों की तस्करी या किसी गैरकानूनी पार्सल भेजने जैसी गतिविधियों का हवाला दिया जाता है।
इसके बाद ठग पुलिस स्टेशन या सीबीआई कार्यालय जैसा माहौल तैयार कर वीडियो कॉल करते हैं। वे फर्जी गिरफ्तारी वारंट और नोटिस भेजकर पीड़ित को धमकाते हैं और मामले को गोपनीय रखने का दबाव बनाते हैं।
साइबर अपराधी बैंक खाते, एफडी और अन्य वित्तीय जानकारी हासिल करने के बाद लोगों से कहते हैं कि उनकी राशि अपराध से जुड़ी हो सकती है। इसके बाद सत्यापन के नाम पर पूरी धनराशि अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेते हैं।
राजस्थान पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी प्रकार की धमकी मिलने पर घबराएं नहीं। पुलिस के अनुसार कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से गिरफ्तारी नहीं करती। लोगों को आधार नंबर, पैन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी और ओटीपी किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी गई है।
पुलिस ने कहा है कि किसी भी संदिग्ध नोटिस या वारंट का सत्यापन सीबीआई के अभय पोर्टल https://abhay.cbi.gov.in पर किया जा सकता है। साथ ही लोगों को यह भी याद रखने को कहा गया है कि भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है।
यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे तुरंत निकटतम पुलिस थाने या साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 तथा साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी शिकायत की जा सकती है। राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी का उद्देश्य डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी से लोगों को सतर्क करना और समय रहते साइबर अपराध की सूचना देने के लिए जागरूक करना है।

Pratahkal Newsroom
प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
