राजस्थान पुलिस 1 जून से शुरू करेगी 'उमंग-VII' अभियान, बालश्रम और बाल तस्करी पर लगेगी रोक
प्रदेशभर में 30 जून तक चलने वाले इस विशेष अभियान में रेस्क्यू टीमों के जरिए बच्चों को मुक्त कराकर उनका सुरक्षित पुनर्वास सुनिश्चित किया जाएगा।

राजस्थान पुलिस मुख्यालय द्वारा 1 जून से 30 जून 2026 तक चलाए जाने वाले विशेष राज्यव्यापी अभियान "उमंग-VII" का आधिकारिक पोस्टर, जिसके तहत प्रदेश को बालश्रम मुक्त बनाने और बच्चों के पुनर्वास के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
राजस्थान में बालश्रम, बाल बंधुआ मजदूरी और मानव दुर्व्यापार (बाल तस्करी) के खिलाफ राजस्थान पुलिस ने बड़ा अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर प्रदेशभर में 1 जून से 30 जून 2026 तक विशेष राज्यव्यापी अभियान “उमंग-VII” चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य बालश्रम और बाल तस्करी जैसी गंभीर सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना तथा पीड़ित बच्चों का सुरक्षित पुनर्वास सुनिश्चित करना है।
इस संबंध में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (सिविल राइट्स एवं एएचटी) हवासिंह घुमरिया ने प्रदेश के सभी पुलिस आयुक्तों, रेंज आईजी, पुलिस उपायुक्तों, जिला पुलिस अधीक्षकों तथा जीआरपी अजमेर और जोधपुर को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पुलिस मुख्यालय ने अभियान को पूरी संवेदनशीलता और समन्वय के साथ संचालित करने के निर्देश दिए हैं।
अभियान के प्रभावी संचालन के लिए प्रत्येक जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, बाल अधिकारिता विभाग, बाल कल्याण समिति, शेल्टर होम, चिल्ड्रन होम और विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त रणनीति तैयार करें। इसके लिए संबंधित विभागों और हितधारकों के साथ विशेष बैठकें आयोजित की जाएंगी।
पुलिस मुख्यालय ने प्रत्येक जिले में थानेवार विशेष रेस्क्यू टीमों के गठन के निर्देश भी दिए हैं। प्रत्येक टीम में एक एसआई अथवा एएसआई सहित चार पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। अभियान शुरू होने से पहले इन टीमों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि बालश्रम और मानव तस्करी से जुड़े मामलों की पहचान और कार्रवाई प्रभावी ढंग से की जा सके। इन टीमों में महिला एवं बाल विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, बाल अधिकारिता विभाग, बाल कल्याण समिति और एनजीओ प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे रेस्क्यू और पुनर्वास की प्रक्रिया अधिक संवेदनशील और समन्वित हो सके।
विशेष अभियान के दौरान होटल, ढाबे, ईंट भट्टे, फैक्ट्रियां, रेलवे प्लेटफॉर्म, बस स्टैंड, धार्मिक स्थल, हाईवे किनारे स्थित ढाबों और अस्थायी बस्तियों में रह रहे बच्चों की व्यापक स्क्रीनिंग की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि संदिग्ध परिस्थितियों में पाए जाने वाले बच्चों का पूरा विवरण दर्ज किया जाए तथा उनके फोटोग्राफ और आवश्यकता पड़ने पर वीडियोग्राफी भी कराई जाए। यदि कोई बच्चा गुमशुदा अथवा मानव तस्करी का शिकार पाया जाता है तो उसके संबंध में तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुक्त कराए गए बच्चों का मेडिकल परीक्षण भी कराया जाएगा और आवश्यकता अनुसार उनकी मानसिक स्थिति की जांच भी की जाएगी।
रेस्क्यू किए गए बच्चों को संबंधित चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही बच्चों के माता-पिता और परिजनों की जानकारी जुटाकर उन्हें परिवार से दोबारा मिलाने के प्रयास किए जाएंगे। अन्य राज्यों से लाए गए नाबालिग बच्चों के मामलों में संबंधित राज्य और स्थानीय थानों को तत्काल सूचना देने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
राजस्थान पुलिस ने विशेष रूप से बालश्रम और बाल तस्करी के पीछे सक्रिय संगठित गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बच्चों के रात्रि निवास स्थलों की जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि कहीं कोई संगठित गैंग तो सक्रिय नहीं है। मानव तस्करी से जुड़े मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143, 144, 145, 146, 98 और 99 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 75 और 79 तथा बालश्रम प्रतिषेध अधिनियम 1986 के प्रावधानों के तहत भी सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि बालश्रम, बाल बंधुआ मजदूरी और बाल तस्करी जैसे अपराधों के खिलाफ राज्य सरकार और राजस्थान पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति है। “उमंग-VII” अभियान के जरिए न केवल बच्चों को शोषण से मुक्त कराया जाएगा, बल्कि ऐसे अपराधों में शामिल संगठित गिरोहों और अपराधियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।

Pratahkal Bureau
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