राजस्थान पुलिस: प्रोजेक्ट लक्ष्मण रेखा के तहत नशामुक्त अभियान का तीसरा चरण पूरा
महानिरीक्षक विकास कुमार के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान में पुलिस और आमजन ने मिलकर शैक्षणिक संस्थानों के पास नशामुक्त सुरक्षा घेरा बनाने का संकल्प लिया।

जोधपुर आयुक्तालय में सालासर सेवा संस्थान द्वारा आयोजित भव्य रक्तदान शिविर के दौरान उपस्थित पुलिस अधिकारी, स्वयंसेवक और रक्तदान करते नागरिक।
राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स द्वारा राज्य को नशामुक्त बनाने की दिशा में चलाए जा रहे महत्वाकांक्षी अभियान ‘प्रोजेक्ट लक्ष्मण रेखा’ के तृतीय चरण का राज्यव्यापी आयोजन सोमवार को सम्पन्न हुआ। डीजीपी श्री राजीव कुमार शर्मा के मार्गदर्शन तथा एएनटीएफ के महानिरीक्षक श्री विकास कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस विशेष अभियान में पुलिस, गैर-सरकारी संगठनों, शिक्षण संस्थानों एवं आमजन ने संयुक्त रूप से नशे के विरुद्ध एकजुटता का परिचय दिया। अभियान में कुल 5,410 लोगों ने भाग लिया।
डीजीपी श्री राजीव कुमार शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि नशे के विरुद्ध लड़ाई केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता और जनभागीदारी से ही सफल हो सकती है। उन्होंने बताया कि राजस्थान पुलिस एक ओर नशा तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी ओर युवाओं और विद्यार्थियों को नशे से दूर रखने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान भी चला रही है। उन्होंने सभी शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आमजन से इस अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की।
एएनटीएफ के महानिरीक्षक श्री विकास कुमार ने कहा कि राजस्थान पुलिस का उद्देश्य केवल मादक पदार्थ तस्करों पर कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि समाज में नशा मुक्ति के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाना भी है। इसी क्रम में विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों एवं सामाजिक संस्थाओं को भी अभियान से जोड़ा गया है, ताकि यह आंदोलन जन-जन तक पहुँच सके।
प्रोजेक्ट लक्ष्मण रेखा के तृतीय चरण के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, कोचिंग संस्थानों एवं अन्य शैक्षणिक परिसरों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभाव, इसके सामाजिक एवं पारिवारिक परिणाम तथा स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में अवगत कराया गया। पोस्टर प्रदर्शन, व्याख्यान, संवाद सत्र, नुक्कड़ नाटक और शपथ ग्रहण जैसे माध्यमों से युवाओं को नशा मुक्ति के प्रति जागरूक किया गया।
अभियान के दौरान 5,410 प्रतिभागियों में से 180 छात्र स्वयंसेवक और 50 शिक्षक योद्धाओं का चयन किया गया, जो अपने-अपने संस्थानों एवं समुदायों में नशा विरोधी जनजागरूकता अभियान को आगे बढ़ाएंगे। पूरे प्रदेश में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं आमजन को नशा नहीं करने तथा दूसरों को भी इससे दूर रखने की शपथ दिलाई गई। जयपुर क्षेत्र में सर्वाधिक लगभग 650 प्रतिभागियों की सहभागिता दर्ज की गई।
प्रोजेक्ट के अंतर्गत शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर क्षेत्र को विशेष निगरानी एवं जागरूकता के माध्यम से नशामुक्त सुरक्षा घेरा के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस क्षेत्र में मादक पदार्थों की बिक्री, प्रचार-प्रसार एवं सेवन पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। साथ ही विद्यार्थियों को नशीली गतिविधियों की गोपनीय सूचना देने हेतु शिकायत पेटिकाएं भी स्थापित की जा रही हैं।
कार्यक्रमों के दौरान ‘मुक्तिवीरों’ ने अपने जीवन अनुभव साझा किए, जिसमें उन्होंने नशे के दलदल से बाहर निकलने की संघर्षपूर्ण यात्रा का वर्णन किया। इन अनुभवों ने उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों को भावुक कर दिया। वहीं ‘दर्पण कला मंच’ द्वारा प्रस्तुत नशे के दुष्परिणामों पर आधारित नुक्कड़ नाटक ने भी दर्शकों को गहराई से झकझोर दिया। इस भावनात्मक माहौल में उपस्थित सभी लोगों ने तस्करों की जानकारी बिना भय के पुलिस की शिकायत पेटिकाओं में देने तथा इस अभियान को गांव-गांव, ढाणी-ढाणी तक पहुँचाकर राजस्थान को पूर्णतः नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया।
राजस्थान पुलिस का यह राज्यव्यापी अभियान नशा मुक्ति की दिशा में एक सशक्त सामाजिक आंदोलन के रूप में उभरता दिख रहा है, जिसमें जनभागीदारी के माध्यम से व्यापक परिवर्तन की नींव रखी जा रही है।

Pratahkal Bureau
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