जयपुर, 5 अक्टूबर। शादी का कार्ड, होटल का पता या प्री-वेडिंग फोटो-वीडियो देखने के नाम पर भेजी गई एक फाइल या लिंक मोबाइल और निजी डेटा के लिए खतरा बन सकता है। शादी के सीजन में साइबर ठग व्हाट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को निशाना बनाने की तैयारी में हैं। राजस्थान पुलिस के साइबर क्राइम विंग आर4सी ने ऑनलाइन ‘वेडिंग कार्ड’ के नाम पर होने वाली संभावित साइबर ठगी को लेकर आमजन के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है।

महानिदेशक पुलिस राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार राजस्थान पुलिस का साइबर क्राइम विंग आर4सी आमजन को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए लगातार जागरूक कर रहा है। इसी क्रम में पुलिस ने शादी के निमंत्रण के नाम पर भेजी जाने वाली संदिग्ध एपीके फाइलों और फिशिंग लिंक को लेकर सावधान किया है।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया कि वेडिंग सीजन में साइबर ठग लोगों की खुशी और भावनाओं का फायदा उठाकर व्हाट्सऐप या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी शादी के निमंत्रण, होटल का पता, वेडिंग कार्ड अथवा प्री-वेडिंग फोटो-वीडियो के नाम पर संदिग्ध फाइल या लिंक भेज सकते हैं। इनके जरिए मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल कर व्यक्तिगत जानकारी, एसएमएस/ओटीपी, बैंकिंग संबंधी जानकारी और अन्य संवेदनशील डेटा चोरी किया जा सकता है।

साइबर ठग व्हाट्सऐप पर संदेश भेजकर कह सकते हैं, “आपका हार्दिक स्वागत है, हमारी शादी का कार्ड और होटल का पता भेजा है” या “प्री-वेडिंग की फोटो और वीडियो हैं, जरूर देखना।” इसके साथ एपीके एक्सटेंशन वाली फाइल भेजी जा सकती है। साइबर क्राइम शाखा ने स्पष्ट किया है कि शादी का कार्ड, फोटो या वीडियो देखने के लिए एपीके फाइल डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं होती। सामान्यतः कार्ड पीडीएफ, जेपीजी/पीएनजी इमेज अथवा चैट में साझा किए जा सकते हैं। इसलिए ऐसी संदिग्ध एपीके फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल नहीं करना चाहिए।

साइबर ठग फाइल के स्थान पर फिशिंग लिंक भेजकर भी लोगों को निशाना बना सकते हैं। यह लिंक शादी के निमंत्रण, होटल बुकिंग या वेडिंग कार्ड देखने के नाम पर बनाया जा सकता है। लिंक खोलने पर फर्जी वेबसाइट मोबाइल नंबर, बैंक संबंधी जानकारी या अन्य संवेदनशील विवरण भरने के लिए कह सकती है। कुछ मामलों में संदिग्ध सॉफ्टवेयर डाउनलोड कराने का प्रयास भी किया जा सकता है।

पुलिस ने यह भी चेताया है कि किसी परिचित के नंबर से आया संदेश भी बिना सत्यापन के नहीं खोलना चाहिए। साइबर ठग किसी परिचित का व्हाट्सऐप अकाउंट हैक कर उसके नाम से संदेश भेज सकते हैं, जैसे, “भाई, शादी का कार्ड भेजा है, देखकर बताओ वेन्यू सही है या नहीं? मैं जल्दी में हूं।” परिचित के नंबर से संदेश आने के कारण व्यक्ति बिना सत्यापन किए लिंक या फाइल खोल सकता है।

ऐसे मामलों में साइबर अपराधी मोबाइल में मौजूद निजी फोटो, कॉन्टैक्ट, पासवर्ड, एसएमएस और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने का प्रयास कर सकते हैं। संक्रमित मोबाइल से संबंधित व्यक्ति के संपर्कों को भी इसी तरह के संदिग्ध संदेश भेजे जा सकते हैं।

राजस्थान पुलिस ने सलाह दी है कि शादी का कार्ड या फोटो देखने के लिए एपीके फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। मोबाइल में ‘इंस्टॉल अननोन ऐप्स’ या ‘अननोन सोर्सेज’ विकल्प बंद रखें। परिचित या रिश्तेदार के नंबर से संदिग्ध लिंक या फाइल आए तो कॉल करके पहले पुष्टि जरूर करें। अनजान लिंक पर क्लिक कर मोबाइल नंबर, बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या अन्य संवेदनशील जानकारी दर्ज न करें।

यदि गलती से संदिग्ध ऐप डाउनलोड हो गया है तो तुरंत इंटरनेट बंद या फोन फ्लाइट मोड पर करने, संदिग्ध ऐप को अनइंस्टॉल करने और मोबाइल को विश्वसनीय सुरक्षा एप्लिकेशन से स्कैन करने की सलाह दी गई है। आवश्यकता होने पर एम-कवच 2 या ई-स्कैन बॉट रिमूवल टूल जैसे विश्वसनीय मोबाइल सुरक्षा टूल का उपयोग किया जा सकता है।

राजस्थान पुलिस ने अपील की है कि साइबर ठगी का शिकार होने या ठगी का प्रयास होने पर बिना देरी किए नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस स्टेशन में सूचना दें। साइबर अपराध की शिकायत साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर अथवा साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर की जा सकती है। इसके अलावा राजस्थान साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 / 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है। शादी के डिजिटल निमंत्रण के नाम पर आने वाली संदिग्ध फाइल और लिंक को लेकर सतर्कता ही ऐसे साइबर अपराध से बचाव का अहम कदम है।

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