स्मार्टफोन गुम या चोरी होते ही करें ये 10 काम, राजस्थान पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
राजस्थान पुलिस साइबर क्राइम शाखा ने मोबाइल गुम या चोरी होने पर तत्काल उठाए जाने वाले कदम बताए हैं। फोन लॉक करने से लेकर बैंकिंग, यूपीआई, सिम और आईएमईआई ब्लॉक कराने तक पूरी सुरक्षा प्रक्रिया जानें।

मोबाइल फोन गुम या चोरी होने की स्थिति में केवल डिवाइस की तलाश करना पर्याप्त नहीं है। उसमें मौजूद बैंकिंग, यूपीआई, ई-मेल, सोशल मीडिया, ओटीपी और निजी दस्तावेजों तक पहुंच का दुरुपयोग वित्तीय नुकसान और व्यक्तिगत डेटा के लिए खतरा बन सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन के लिए मोबाइल गुम होने पर तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की विशेष एडवाइजरी जारी की है।
जयपुर, 04 सितम्बर। महानिदेशक पुलिस राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा आमजन को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए लगातार जागरूक कर रही है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया कि आज स्मार्टफोन केवल बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि इसमें बैंकिंग, यूपीआई, ई-मेल, सोशल मीडिया, ओटीपी और निजी दस्तावेजों तक पहुंच होती है। ऐसे में मोबाइल गुम या चोरी होने पर उससे जुड़े डिजिटल खातों को तत्काल सुरक्षित करना जरूरी है।
पुलिस की एडवाइजरी के अनुसार फोन गुम होते ही सबसे पहले किसी दूसरे मोबाइल या कंप्यूटर से एंड्रॉयड के ‘फाइंड माई डिवाइस’ अथवा आईफोन के ‘फाइंड माई आईफोन’ की मदद से फोन को रिमोट लॉक करना चाहिए।
इसके बाद बैंक की आधिकारिक ऐप, वेबसाइट या कस्टमर केयर के माध्यम से मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और डिजिटल वॉलेट को अस्थायी रूप से ब्लॉक या सुरक्षित करवाना चाहिए। साथ ही बैंक खाते के लेन-देन पर लगातार नजर रखनी चाहिए। कोई अनजान या संदिग्ध ट्रांजेक्शन दिखाई देने पर तत्काल बैंक को सूचित करने की सलाह दी गई है।
गुम हुए मोबाइल में लगा सिम कार्ड भी तुरंत बंद करवाना जरूरी है। इसके लिए मोबाइल सेवा प्रदाता से संपर्क कर सिम को ब्लॉक करवाना चाहिए, क्योंकि मोबाइल नंबर का इस्तेमाल ओटीपी और अकाउंट रिकवरी में हो सकता है। इसके बाद उसी नंबर का रिप्लेसमेंट या डुप्लीकेट सिम प्राप्त करना चाहिए। सिम दोबारा सक्रिय होने के बाद महत्वपूर्ण खातों की सुरक्षा सेटिंग्स की जांच करनी चाहिए।
पुलिस ने दूसरे सुरक्षित डिवाइस से जीमेल या ई-मेल, सोशल मीडिया और अन्य महत्वपूर्ण खातों के पासवर्ड बदलने की भी सलाह दी है। साथ ही रिकवरी ई-मेल और मोबाइल नंबर की जांच करनी चाहिए। ऑनलाइन खातों की ‘लॉग-इन डिवाइस’ सूची की समीक्षा कर अनजान या पुराने डिवाइस से लॉगआउट करना चाहिए तथा अकाउंट रिकवरी विकल्पों की भी जांच करनी चाहिए।
महत्वपूर्ण खातों में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन यानी 2FA सक्रिय रखने की भी सलाह दी गई है। जीमेल या ई-मेल, सोशल मीडिया और अन्य महत्वपूर्ण खातों में यह सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय रखने से खातों की सुरक्षा मजबूत की जा सकती है।
एडवाइजरी में मोबाइल गुम या चोरी होने की सूचना नजदीकी पुलिस थाने में देने और मोबाइल का आईएमईआई नंबर सुरक्षित रखने को कहा गया है। पुलिस शिकायत के बाद सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर यानी सीईआईआर के माध्यम से मोबाइल का आईएमईआई ब्लॉक करवाने की सलाह दी गई है, ताकि चोरी या गुम हुए मोबाइल के दुरुपयोग को रोका जा सके।
राजस्थान पुलिस साइबर क्राइम शाखा ने स्पष्ट किया है कि मोबाइल खोना सिर्फ एक डिवाइस खोना नहीं है। उसमें मौजूद बैंकिंग, यूपीआई, सिम और ऑनलाइन खातों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसलिए फोन गुम होते ही पहले डिजिटल खातों को सुरक्षित करना और उसके बाद फोन की तलाश करना जरूरी है।
मोबाइल गुम या चोरी होने के बाद यदि किसी प्रकार की साइबर ठगी होती है या साइबर ठग ऐसा करने का प्रयास करते हैं, तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाना या साइबर पुलिस थाना, साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in अथवा साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की जा सकती है। राजस्थान साइबर हेल्पडेस्क के 9256001930 और 9257510100 नंबरों पर भी सूचना देने की अपील की गई है।
इस एडवाइजरी का मुख्य संदेश यही है कि स्मार्टफोन गुम होने की स्थिति में समय गंवाए बिना डिजिटल खातों, बैंकिंग, यूपीआई, सिम और ऑनलाइन अकाउंट की सुरक्षा के लिए क्रमवार कार्रवाई करना जरूरी है।

