मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के हालिया निर्देशों के बाद साइबर अपराध से सर्वाधिक प्रभावित अलवर और डीग जिलों में राजस्थान पुलिस ने व्यापक अभियान चलाते हुए साइबर ठगों के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार किया है। मुख्यमंत्री द्वारा उच्च स्तरीय बैठक में दोनों जिलों में विशेष अभियान चलाकर साइबर अपराधियों की कमर तोड़ने के निर्देश दिए गए थे। इसी के अनुरूप महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के नेतृत्व और अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वी.के. सिंह के सुपरविजन में दोनों सीमावर्ती जिलों की पुलिस ने सघन और अभूतपूर्व मेगा-ऑपरेशन शुरू किया।

अलवर पुलिस अधीक्षक श्री सुधीर चौधरी ने बताया कि जिले में संस्थागत समन्वय और प्रभावी निगरानी के लिए विशेष साइबर विंग A4C (एंटी साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर) की स्थापना की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय इंटेलिजेंस का उपयोग करते हुए साइबर अपराधियों के सबसे बड़े हथियार सिम कार्ड और मोबाइल पर सीधा प्रहार किया। प्रतिबिंब पोर्टल के माध्यम से अब तक रिकॉर्ड 1,37,522 संदिग्ध सिम कार्ड और 53,536 मोबाइल आईएमईआई नंबर ब्लॉक करवाए गए हैं। इसके साथ ही अलवर संदिग्ध सिम ब्लॉक करने के मामले में पूरे देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है।

पुलिस की लगातार कार्रवाई का असर साइबर ठगों के सक्रिय हॉटस्पॉट पर भी दिखाई दिया है। जनवरी 2026 में जिले में 1240 सक्रिय हॉटस्पॉट थे, जो जून 2026 तक घटकर 689 रह गए। जिले में साइबर संग्राम और साइबर संग्राम 2.0 की सफलता के बाद अब साइबर संग्राम 3.0 अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत तकनीकी निरक्षरता दूर करने के लिए पुलिस अधिकारियों को डिजिटल फॉरेंसिक और आधुनिक टूल्स की एडवांस ट्रेनिंग दी जा रही है।

साइबर ठगी की रकम को खपाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फर्जी बैंक खातों के खिलाफ भी अलवर पुलिस ने म्यूल हंटर ऑपरेशन के तहत रिकॉर्ड कार्रवाई की है। अप्रैल और मई 2026 के बीच चलाए गए अभियान में पूरे प्रदेश में सर्वाधिक 107 एफआईआर दर्ज की गईं। वर्ष 2025 में 7,748 म्यूल खाते चिह्नित कर 76 आरोपियों को जेल भेजा गया था, जबकि वर्ष 2026 में जून तक ही 7,579 नए खाते चिह्नित किए जा चुके हैं। इस अवधि में 107 आपराधिक मामले दर्ज किए गए और 92 से अधिक बैंक खाताधारकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

जिला स्तर पर संचालित हेल्पलाइन नंबर 8764874306 और राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 की त्वरित कार्रवाई से ठगी गई रकम होल्ड कराने का प्रतिशत 16.41 प्रतिशत से बढ़कर 27.67 प्रतिशत हो गया है। वैशाली नगर थाने में दर्ज डिजिटल अरेस्ट के एक बड़े मामले में पीड़ितों से वसूले गए 1.25 करोड़ रुपये में से पुलिस ने 60 लाख रुपये होल्ड करवाए और 22 लाख रुपये पीड़ितों को वापस रिफंड भी करवाए।

ताजा अभियान के दौरान अलवर पुलिस ने 98 हिस्ट्रीशीटरों और संदिग्धों के गहन पूछताछ नोट तैयार किए तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 170 के तहत 99 निवारक गिरफ्तारियां कीं। समन्वय पोर्टल पर 1 अगस्त 2025 से अब तक 474 एफआईआर और 699 अपराधियों का डेटा अपलोड किया गया है, जिससे अन्य राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही पुलिस ने 3,313 से अधिक साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर 2.25 लाख से अधिक नागरिकों को साइबर ठगी से बचाव के उपाय बताए।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद डीग जिले में भी साइबर अपराधियों के ठिकानों पर विशेष पुलिस टीमों ने सघन कार्रवाई की। 15 और 16 जुलाई 2026 को चलाए गए दो दिवसीय विशेष अभियान की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने चिन्हित छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर दर्ज प्रकरणों में वांछित छह आरोपियों सहित कुल 27 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे और गुप्त ठिकानों से साइबर अपराध में प्रयुक्त 10 अवैध मोबाइल फोन, 11 एक्टिवेटेड सिम कार्ड, 2 एटीएम कार्ड और 2 दुपहिया वाहन जब्त किए गए, जिनका उपयोग ठगी की रकम निकालने और फरार होने में किया जाता था। इसके अतिरिक्त 98 पूछताछ नोटिस जारी किए गए तथा बीएनएसएस की धारा 170 के तहत 99 निरोधात्मक कार्रवाइयां भी की गईं। अलवर और डीग में एक साथ चलाए गए इस अभियान ने साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर व्यापक कार्रवाई के साथ राज्य में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की सख्त रणनीति को भी स्पष्ट किया।

Pratahkal Bureau

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