राजस्थान पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अपराधियों की 220 करोड़ की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर बीएनएसएस की धारा 107 के तहत 636 माफियाओं पर शिकंजा, 32 करोड़ की संपत्ति सरकारी कब्जे में आई और 35 करोड़ के अवैध निर्माण ध्वस्त।

जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के जीरो टॉलरेंस नीति के निर्देशों के बाद राजस्थान पुलिस मुख्यालय द्वारा अपराधियों और नशा तस्करों की काली कमाई से अर्जित अवैध संपत्तियों को कुर्क और ध्वस्त करने के लिए जारी की गई विधिक गाइडलाइन।
राजस्थान में अपराध और माफिया तंत्र के समूल नाश के लिए राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के स्पष्ट एवं कड़े निर्देशों पर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत राजस्थान पुलिस ने आर्थिक मोर्चे पर चौतरफा घेराबंदी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने साफ शब्दों में कहा है कि अब अपराधियों को केवल जेल की सलाखों के पीछे ही नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि अपनी काली कमाई के बल पर खड़े किए गए करोड़ों रुपये के साम्राज्य और अवैध संपत्तियों से भी पूरी तरह हाथ धोना पड़ेगा।
इस महाभियान की धरातलीय विधिक प्रगति की जानकारी देते हुए महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा ने बताया कि जुलाई 2024 से देश में लागू हुई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 107 इस पूरी चौतरफा कार्रवाई का मुख्य विधिक आधार बनी है, जो अपराधियों को पंगु बनाने का नया और बेहद अचूक हथियार साबित हो रही है। इस नए कानून का मूल उद्देश्य अपराधियों को सिर्फ जेल भेजना ही नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक रीढ़ और शक्ति को पूरी तरह समाप्त कर उन्हें अक्षम करना है। इस विधिक हथियार को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के सभी जिलों को विस्तृत एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी की है, जिसके परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं।
महानिदेशक पुलिस श्री शर्मा ने इस विधिक कार्रवाई के विस्तृत आंकड़े साझा करते हुए बताया कि राजस्थान पुलिस द्वारा प्रदेश भर के ऐसे 636 हार्डकोर अपराधियों की एक व्यापक सूची तैयार की गई है, जिन्होंने विभिन्न संगीन अपराधों के जरिए करोड़ों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर रखा था। इन सभी अपराधियों की चल और अचल संपत्तियों को पूरी तरह चिन्हित किया जा चुका है और इन अवैध संपत्तियों को हमेशा के लिए जब्त व कुर्क करने के लिए पुलिस ने विभिन्न सक्षम न्यायालयों में कुल 584 प्रकरणों में इस्तगासे (प्रार्थना पत्र) पेश किए हैं। न्यायालयों ने भी इस अत्यंत गंभीर विषय पर त्वरित विधिक रुख दिखाते हुए अब तक 182 प्रकरणों में बाकायदा कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए हैं, जिसके चलते विधिक प्रक्रिया के तहत पुलिस को बहुत बड़ी सफलताएं मिलने लगी हैं।
इस कड़ी विधिक घेराबंदी के अंतर्गत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 107 के तहत राज्य के इन 636 अपराधियों की आपराधिक गतिविधियों से अवैध रूप से अर्जित की गई कुल 220 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध विभिन्न न्यायालयों में कड़ी कानूनी कार्यवाही अत्यंत तीव्र गति से जारी है। राजस्थान पुलिस की मजबूत पैरवी के चलते अब तक कुल 13 अहम प्रकरणों में करीब 32 करोड़ रुपये की अपराधियों की अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्ति को न्यायालय के बकायदा आदेश से पूरी तरह सरकारी कब्जे में लेकर जब्त किया जा चुका है। इस जब्ती अभियान के तहत जिला बूंदी द्वारा अभूतपूर्व कार्य करते हुए एक ही प्रकरण में लगभग 12 करोड़ रुपये की भारी-भरकम संपत्ति को पूरी तरह जब्त कर मिसाल कायम की गई है।
आर्थिक चोट के साथ-साथ पुलिस द्वारा अपराधियों के मनोबल को पूरी तरह तोड़ने के लिए उनके अवैध निर्माणों को जमीनीदोज़ करने की बड़ी कार्रवाई भी समानांतर रूप से की जा रही है। महानिदेशक पुलिस श्री शर्मा ने बताया कि संगठित अपराध से जुड़े अपराधियों द्वारा अवैध रूप से अर्जित संपत्ति के माध्यम से खड़ी की गई इमारतों को सूचीबद्ध किया गया और फिर संबंधित विभागों व निकायों से मजबूत समन्वय स्थापित कर उन्हें पूरी तरह ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में 01 जनवरी से लेकर 28 मई तक की अवधि में अपराधियों की अवैध संपत्ति को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने की कुल 39 बड़ी कार्यवाहियां की गईं, जिनमें अपराधियों की अनुमानित 35 करोड़ 10 लाख 81 हजार रुपये की अवैध संपत्तियां पूरी तरह ध्वस्त कर दी गईं। चालू वर्ष 2026 में झालावाड़ जिले ने इस दिशा में पूरे सूबे में सर्वाधिक पराक्रम दिखाते हुए कुल 12 बड़ी कार्यवाहियां कीं, जिसके तहत झालावाड़ पुलिस ने अनुमानित राशि 22 करोड़ 90 लाख रुपये की काली कमाई से निर्मित अवैध संपत्तियों को मलबे में तब्दील कर दिया।
संगठित अपराध के साथ-साथ राज्य को पूरी तरह से नशा मुक्त बनाने के संकल्प को दोहराते हुए मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त माफियाओं पर भी सरकार ने कड़ा शिकंजा कसा है। राज्य सरकार द्वारा इसके लिए विशेष तौर पर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) का गठन कर उसे धरातल पर क्रियान्वित किया गया है। नशामुक्त राजस्थान अभियान के तहत एएनटीएफ और स्थानीय पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 68-एफ का बेहद प्रभावी व कठोर प्रयोग किया है। इसके अंतर्गत जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच कुल 36 बड़े नशा तस्करों के विरुद्ध न्यायालय में इस्तगासे पेश किए गए। इनमें से 28 मादक पदार्थ तस्करों के विरुद्ध अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की सीजिंग एवं फ्रीजिंग हेतु भेजे गए इस्तगासे पूरी तरह स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिसके परिणामस्वरूप तस्करों की अनुमानित लगभग 33 करोड़ रुपये की संपत्तियां विधिक रूप से पूरी तरह सीज और फ्रीज की जा चुकी हैं। नशा तस्करों की कुल 66 करोड़ रुपयों की संपत्ति को फ्रीज करने का यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा ताकि नशे के इस काले और अवैध कारोबार पर पूर्ण प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर अपराधियों की आर्थिक कमर को हमेशा के लिए तोड़ा जा सके।
नए कानूनों की संवेदनशीलता, मानवीय दृष्टिकोण और इसके दूरगामी जनहितैषी प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि अपराधियों से जब्त की गई इन करोड़ों रुपये की संपत्तियों का वास्तविक लाभ अब सीधे तौर पर अपराध के पीड़ितों को भी मिलेगा। नए विधिक प्रावधानों के अनुसार, जिला कलेक्टर के माध्यम से इन जब्त और कुर्क की गई संपत्तियों में से पीड़ितों को उनकी लूटी गई या हड़पी गई संपत्ति पूरी तरह वापस लौटाई जा सकेगी। सरकार के इस कदम से उन आम नागरिकों को बहुत बड़ी और ऐतिहासिक राहत मिलेगी जो अब तक इन खूंखार माफियाओं के क्रूर शोषण और अत्याचार का शिकार हुए थे। राजस्थान सरकार और पुलिस द्वारा पीड़ितों को उनका हक दिलाने और राहत प्रदान करने की दिशा में भी बेहद संवेदनशीलता के साथ ठोस विधिक कार्रवाई लगातार की जा रही है।

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