पीएम-सेतु योजना: राजस्थान में भिवाड़ी आईटीआई क्लस्टर के लिए 241 करोड़ रुपये मंजूर
राजस्थान में आईटीआई अपग्रेडेशन के लिए शेयर होल्डर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार मिलेगा।

जयपुर में पीएम-सेतु योजना के तहत भिवाड़ी हब-स्पोक क्लस्टर के लिए 241 करोड़ रुपये की निवेश योजना मंजूर हुई।
राजस्थान में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) की तस्वीर बदलने और युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप हुनरमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विशेष प्रयासों से प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (पीएम-सेतु) योजना के तहत भिवाड़ी हब-स्पोक क्लस्टर के लिए 241 करोड़ रुपये की रणनीतिक निवेश योजना को मंजूरी मिल गई है। इसके बाद केंद्र सरकार, राज्य सरकार और एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के बीच शेयर होल्डर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। इसके साथ ही राजस्थान यह समझौता करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
12 अक्टूबर को जयपुर में जारी जानकारी के अनुसार, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की पीएम-सेतु योजना का उद्देश्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक बनाकर युवाओं को हुनरमंद, आत्मनिर्भर और रोजगार योग्य बनाना है। यह पहल ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य के अनुरूप युवाओं के कौशल विकास और रोजगार क्षमता को मजबूत करने पर केंद्रित है।
राजस्थान में 12 हब-स्पोक क्लस्टर्स से बढ़ेगा कौशल विकास
प्रदेश में प्रस्तावित 12 हब-स्पोक क्लस्टर्स के माध्यम से राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत प्रशिक्षण सुविधाओं और उद्योगों से सीधे जोड़ने की योजना है। प्रत्येक क्लस्टर की कुल लागत में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार, 33 प्रतिशत राज्य सरकार और 17 प्रतिशत उद्योग जगत वहन करेगा।
क्लस्टर के प्रबंधन के लिए गठित होने वाले विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) में एंकर इंडस्ट्री पार्टनर की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत होगी, जबकि केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 24.5-24.5 प्रतिशत रहेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और रोजगार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
भिवाड़ी क्लस्टर के अलावा शेष 11 क्लस्टर्स के लिए राज्य सरकार ने एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। ये क्लस्टर्स जयपुर, जोधपुर, कोटा, भरतपुर, बांसवाड़ा, बालोतरा, बीकानेर, भीलवाड़ा, कोटपूतली, सीकर और पाली में प्रस्तावित हैं।
भिवाड़ी हब से चार आईटीआई संस्थानों को मिलेगा लाभ
भिवाड़ी क्लस्टर के लिए एंकर इंडस्ट्री पार्टनर एच.जी. इन्फ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड होगी। कंपनी का फोकस इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं कंस्ट्रक्शन क्षेत्र पर रहेगा। इस क्लस्टर में राजकीय आईटीआई भिवाड़ी को हब बनाया जाएगा, जबकि राजकीय आईटीआई अलवर, नीमराणा, तिजारा और किशनगढ़बास स्पोक आईटीआई के रूप में इससे जुड़ेंगे।
हब में विकसित किए जाने वाले स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाओं और डिजिटल कंटेंट का लाभ चारों स्पोक संस्थानों के विद्यार्थियों को भी मिलेगा। एनसीआर से सटे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग बेल्ट की औद्योगिक मांग को ध्यान में रखते हुए एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमेशन और इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।
इस व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को नियमित शिक्षण के साथ ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग और वास्तविक कार्य-अनुभव प्राप्त होगा। इससे प्रशिक्षण को उद्योगों की जरूरतों से जोड़ने और विद्यार्थियों को व्यावहारिक कौशल उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
60,000 करोड़ रुपये की योजना से 1,000 सरकारी आईटीआई होंगे अपग्रेड
पीएम-सेतु योजना का कुल बजट 60,000 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 30,000 करोड़ रुपये, राज्य सरकारों का 20,000 करोड़ रुपये और उद्योग जगत का योगदान 10,000 करोड़ रुपये निर्धारित है। योजना के तहत देशभर में 1,000 सरकारी आईटीआई को अपग्रेड किया जाएगा। इनमें 200 हब और 800 स्पोक संस्थान शामिल हैं।
योजना के अंतर्गत राजस्थान के युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, 5जी नेटवर्क, इलेक्ट्रिक व्हीकल, साइबर सुरक्षा, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी और कंस्ट्रक्शन ऑटोमेशन जैसे 32 से अधिक नए पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण मिलेगा।
इसके साथ ही पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों को वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे राजस्थान के आईटीआई प्रशिक्षकों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
राजस्थान में पीएम-सेतु योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से कौशल प्रशिक्षण को औद्योगिक विकास की जरूरतों के अनुरूप बनाने, युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने और स्थानीय उद्योगों को कुशल कार्यबल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। भिवाड़ी क्लस्टर के लिए 241 करोड़ रुपये की मंजूरी और शेयर होल्डर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास को उद्योगों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

