PM पोषण योजना: राजस्थान में ₹953.97 करोड़ का बजट मंजूर, मुख्य सचिव ने दिए जांच के आदेश
मुख्य सचिव वी श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई बैठक में वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना को मंजूरी दी गई और पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए 'RAJSIMS' पोर्टल अपडेट करने के निर्देश दिए गए।

जयपुर स्थित सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा एवं संचालन समिति की बैठक में मुख्य सचिव श्री वी श्रीनिवास (मध्य में) अधिकारियों के साथ पी एम पोषण योजना के वर्ष 2026-27 के बजट और कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए।
जयपुर। राज्य के विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए मुख्य सचिव श्री वी श्रीनिवास ने एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि पी एम पोषण योजना के अन्तर्गत भोजन की पौष्टिकता एवं गुणवत्ता जांचने के लिए अधिकारी राज्य के विभिन्न विद्यालयों में निरंतर भ्रमण एवं निरीक्षण सुनिश्चित करें। सोमवार को सचिवालय में मुख्य सचिव श्री वी श्रीनिवास की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समीक्षा एवं संचालन समिति (State Steering cum Monitoring Committee) की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जिसमें केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना की वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना पर विस्तृत एवं गहन चर्चा की गई। भारत सरकार द्वारा उक्त योजना हेतु राजस्थान राज्य के लिए 953.97 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है, जिसे इस उच्च स्तरीय समिति द्वारा सर्वसम्मति से अनुमोदित कर दिया गया।
इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा श्री राजेश यादव, अतिरिक्त मुख्य सचिव यूडीएच श्री आलोक गुप्ता, सचिव ग्रामीण विकास श्री कृष्ण कुणाल, सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति श्री अम्ब्रीश कुमार, संयुक्त सचिव वित्त (व्यय) डॉ. भारती दीक्षित, आईसीडीएस निदेशक श्री वासुदेव मलावत, मिड-डे-मिल आयुक्त श्री विश्व मोहन शर्मा तथा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं पी एम पोषण योजना से जुड़े संबंधित अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। मुख्य सचिव श्री वी श्रीनिवास ने योजना के पारदर्शी एवं प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल देते हुए अधिकारियों को दोटूक निर्देश दिए कि पीएम पोषण योजना के 'RAJSIMS' पोर्टल को तत्काल अद्यतन (अपडेट) किया जाए। उन्होंने भारत सरकार की ओर से राज्य में संचालित प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना की बारीकी से समीक्षा की और दोहराया कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में कोई कोताही न बरती जाए और अधिकारी वर्ग इसके लिए धरातल पर उतरकर लगातार निरीक्षण करे।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव को विभागीय अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुसार संतुलित व पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य, पोषण स्तर व शैक्षणिक विकास को एक सशक्त आधार दिया जा रहा है। आंकड़ों और जमीनी फीडबैक के हवाले से यह भी बताया गया कि इस योजना के प्रभावी संचालन से बच्चों में कुपोषण की समस्या में भारी कमी आ रही है, विद्यालयों को बीच में ही छोड़ देने (ड्रॉपआउट) की प्रवृत्ति भी तेजी से घट रही है और बच्चों की शिक्षा के प्रति रुचि में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव के समक्ष राज्य सरकार के अभिनव नवाचार 'श्री कृष्ण भोग योजना' की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना का धरातल पर बेहतरीन प्रभाव देखा गया है, जिसकी स्वयं देश के प्रधानमंत्री ने भी सराहना की है। श्री कृष्ण भोग योजना न केवल बच्चों की पोषण सम्बन्धी आवश्यकताओं की शत-प्रतिशत पूर्ति कर रही है, बल्कि बच्चों में कुपोषण एवं एनीमिया जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को कम करने में भी निर्णायक और महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। योजना की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अन्तर्गत वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 60 लाख 54 हजार 768 भोजन थाली बच्चों को परोसी गई हैं।
इसके साथ ही, बैठक में अनूठे 'अतिथि माता कॉन्सेप्ट' की सफलता को भी रेखांकित किया गया। इस अनूठी पहल के तहत विद्यार्थियों की माताओं एवं महिला अभिभावकों को विद्यालय में विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है, ताकि वे मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, पोषण मानकों एवं वितरण व्यवस्था का प्रत्यक्ष रूप से खुद अपनी आंखों से निरीक्षण कर सकें। व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन के स्वाद और गुणवत्ता परीक्षण हेतु इन माताओं को स्वयं भोजन भी करवाया जाता है, जिसके बाद माताएं एवं महिला अभिभावक अपनी निष्पक्ष प्रतिक्रिया और सुझाव भी रजिस्टर में दर्ज करवाती हैं। महिला सशक्तिकरण और जनभागीदारी की इस अनूठी मिसाल के अन्तर्गत अभी तक राज्य में कुल 55 लाख 19 हजार 810 अतिथि माताओं द्वारा विभिन्न विद्यालयों का भ्रमण कर मध्यान्ह भोजन व्यवस्था का प्रत्यक्ष अवलोकन किया जा चुका है, जो इस योजना की व्यापक स्वीकार्यता और सफलता को प्रमाणित करता है।

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