राजस्थान को गो आधारित प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खेती का राष्ट्रीय मॉडल बनाने की तैयारी, कोटा में 100 से अधिक अधिकारियों का मंथन
कोटा में आयोजित राज्य स्तरीय महा सेमिनार में राजस्थान को गो आधारित प्राकृतिक एवं ऑर्गेनिक खेती का राष्ट्रीय मॉडल बनाने की रणनीति पर बड़ा मंथन हुआ।

कोटा के श्री रामशांताय जैविक कृषि केंद्र में आयोजित राज्य स्तरीय महा सेमिनार के दौरान गो आधारित प्राकृतिक खेती के मॉडल का अवलोकन करते कृषि विभाग के अधिकारी।
राजस्थान में गो आधारित प्राकृतिक एवं ऑर्गेनिक खेती को नई दिशा देने के उद्देश्य से शनिवार को कोटा स्थित श्री रामशांताय जैविक कृषि एवं प्रशिक्षण केन्द्र एवं गोयल ग्रामीण विकास संस्थान में कृषि विभाग का राज्य स्तरीय महा सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक, उपनिदेशक एवं सहायक निदेशक स्तर सहित 100 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और प्रदेश में प्राकृतिक खेती के प्रभावी विस्तार की रणनीति पर व्यापक मंथन किया।
कृषि आयुक्त नरेश गोयल ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य राजस्थान को गो आधारित प्राकृतिक एवं ऑर्गेनिक खेती का प्रमुख हब बनाना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए किसानों को वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा तथा कोटा स्थित इस संस्थान को प्राकृतिक खेती के उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि गोयल कृषि फार्म ने गो आधारित प्राकृतिक खेती का एक सफल एवं प्रेरणादायी मॉडल विकसित किया है। कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मॉडल का गहन अध्ययन कर प्रदेश के विभिन्न जिलों में इसे लागू करने की कार्ययोजना तैयार करेंगे, ताकि अधिक से अधिक किसान रसायन मुक्त, टिकाऊ एवं लाभकारी खेती से जुड़ सकें।
कृषि आयुक्त ने बताया कि संस्थान में किसानों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यहां 100 से अधिक औषधीय पौधों का संरक्षण किया जा रहा है। साथ ही 250 से अधिक देशी एवं पारंपरिक बीजों का बीज बैंक स्थापित है तथा बीज, मिट्टी, पानी एवं कीट परीक्षण की अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि बीज बैंक की विशेषता यह है कि किसान यहां से निःशुल्क बीज प्राप्त कर सकते हैं और फसल उत्पादन के बाद उतनी ही मात्रा में बीज वापस जमा कर अन्य किसानों को भी इसका लाभ उपलब्ध करा सकते हैं।
संस्थान में देशी नस्ल आधारित गोशाला संचालित है, जहां गो आधारित प्राकृतिक खेती के विभिन्न प्रयोग किए जा रहे हैं। यहां नियमित रूप से वैदिक परंपरा के अनुरूप हवन भी आयोजित होता है। लगभग 50 बीघा क्षेत्र में विकसित इस अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिसर में 50 से अधिक प्रकार की फसलें, फल, सब्जियां एवं पुष्प पूरी तरह गो आधारित प्राकृतिक पद्धति से उगाए जा रहे हैं।
महा सेमिनार के दौरान प्रदेश में संचालित "खेत बचाओ अभियान" की भी विस्तृत समीक्षा की गई। प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने के लिए जिला स्तर पर व्यापक कार्ययोजना तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने संस्थान का भ्रमण कर प्राकृतिक खेती के विभिन्न मॉडल, बीज संरक्षण प्रणाली, जैविक अनुसंधान गतिविधियों तथा प्रशिक्षण व्यवस्थाओं का अवलोकन किया और इसे प्रदेशभर में अपनाने योग्य एक आदर्श मॉडल बताया।

Pratahkal Bureau
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