जयपुर, 03 फरवरी 2026। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने बताया कि केंद्र सरकार लघु, कुटीर एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के माध्यम से देशभर में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत आधार प्रदान कर रही है मोदी सरकार।


सदन में दी गई महत्वपूर्ण जानकारी

राज्यसभा में मदन राठौड़ के सवाल के जवाब में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे ने यह जानकारी सदन को दी। मदन राठौड़ के अनुसार राजस्थान सहित पूरे देश में एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए निम्नलिखित प्रमुख योजनाएं संचालित की जा रही हैं:

  • प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी)
  • खादी विकास योजना (केवीवाई)
  • ग्रामोद्योग विकास योजना (जीवीवाई)
  • कोयर विकास योजना (सीवीवाई)

राजस्थान में एमएसएमई पंजीकरण और ऋण गारंटी के आंकड़े

राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने बताया कि उद्यम पंजीकरण एवं उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म के आंकड़ों के अनुसार:

  • "1 जुलाई 2020 से 25 जनवरी 2026 तक राजस्थान में कुल 42,95,930 एमएसएमई इकाइयां पंजीकृत की गई हैं, जो राज्य में औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार सृजन की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।"
  • 31 दिसंबर 2025 तक की स्थिति में राजस्थान में इस योजना के अंतर्गत 5,97,050 ऋण गारंटियों के माध्यम से 55,021 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान की जा चुकी है।

एमएसएमई मंत्रालय द्वारा सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (सीजीटीएमएसई) के माध्यम से क्रेडिट गारंटी योजना लागू की जा रही है।


परंपरागत उद्योगों और क्लस्टर विकास को प्रोत्साहन

सांसद मदन राठौड़ ने बताया कि हस्तशिल्प, पत्थर-शिल्प एवं वस्त्र उद्योग जैसे परंपरागत क्षेत्रों को बढ़ावा देने हेतु:

  • एमएसई-क्लस्टर विकास कार्यक्रम के अंतर्गत राजस्थान में 4 सामान्य सुविधा केंद्र (सीएफसी) स्वीकृत किए गए हैं।
  • परंपरागत उद्योगों के पुनर्सृजन हेतु निधि (स्फूर्ति) योजना के तहत राज्य में 20 क्लस्टर स्वीकृत हैं, जिनमें से 16 क्रियाशील तथा 4 निर्माणाधीन हैं।

निर्यात संवर्धन मिशन (EPM) और भविष्य का विजन

एमएसएमई इकाइयों को निर्यात से जोड़ने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक के लिए निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) को मंजूरी दी है। इसके तहत निम्नलिखित सुविधाएं सुदृढ़ की जाएंगी:

"निर्यात वित्त, ब्याज छूट, ई-कॉमर्स निर्यातकों को ऋण, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता व अनुपालन सहायता, लॉजिस्टिक्स और बाजार पहुंच जैसी सुविधाएं।"

केंद्र सरकार के ये प्रयास “विकसित भारत” के संकल्प को साकार करने की दिशा में एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं और राजस्थान के उद्यमियों को नए अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।

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