जयपुर, 22 सितम्बर। राजस्थान में वन स्टेट-वन इलेक्शन के तहत हुए निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अब तक घोषित 303 निकायों में से 200 में अपना प्रमुख बनाकर कांग्रेस पर 105 सीटों की बढ़त दर्ज की है। भाजपा ने इसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व, जमीनी मुद्दों पर केंद्रित चुनाव अभियान और मजबूत संगठनात्मक रणनीति का परिणाम बताया है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा प्रत्याशी सर्वे से लेकर टिकट वितरण तक सक्रिय रहे। राजस्थान में पहली बार निकाय चुनाव प्रचार में रोड शो जैसा मॉडल भी स्थापित किया गया। भाजपा के अनुसार इसी रणनीति के तहत 309 निकायों में एक साथ हुए चुनाव में पार्टी ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। आने वाले पंचायत चुनाव में भी भाजपा इसी मॉडल को बरकरार रखते हुए अपनी जीत के प्रतिशत को और बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

संभागवार परिणामों में भाजपा का सबसे बेहतर प्रदर्शन जोधपुर संभाग में रहा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तीन बार के मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत का गढ़ कहे जाने वाले जोधपुर संभाग में भाजपा ने 87 प्रतिशत निकायों में अपना बोर्ड बनाया। कुल 41 निकायों में से भाजपा ने 35 में बोर्ड बनाया, जबकि कांग्रेस 5 बोर्ड तक सिमट गई। भाजपा को यहां 30 सीटों की बड़ी बढ़त मिली। पाली नगर निगम में पिछड़ने के बावजूद भाजपा ने निर्दलीयों के समर्थन से अपना बोर्ड बनाया। वहीं, जोधपुर नगर निगम का परिणाम आना बाकी है, जहां भाजपा निर्दलीयों के समर्थन से मजबूत स्थिति में है।

भरतपुर संभाग में भाजपा ने 75 प्रतिशत निकायों में अपना बोर्ड बनाया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इसी क्षेत्र से आते हैं और संगठन में मजबूत पकड़ होने के कारण वे यहां की राजनीति को ग्राउंड जीरो से जानते हैं। संभाग के कुल 32 निकायों में से भाजपा ने 24 पर अपना कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस को 7 सीटें ही मिल पाईं। भाजपा यहां 16 सीटों से आगे रही।

अजमेर संभाग में भाजपा ने कुल 69 प्रतिशत निकायों में बोर्ड बनाया। अजमेर नगर निगम में भाजपा पिछड़ने के बावजूद निर्दलीयों के समर्थन से अपना महापौर बनाने में सफल रही। संभाग में कुल 52 निकाय प्रमुखों में से भाजपा ने 36 प्रमुख बनाए, जबकि कांग्रेस ने 14 सीटें जीतीं। यहां भाजपा 22 सीटों से आगे रही।

बीकानेर संभाग में भाजपा ने 66 प्रतिशत से अधिक निकायों पर अपना बोर्ड बनाया। कुल 37 निकायों में से भाजपा ने 24 में बोर्ड बनाया, जबकि कांग्रेस ने 10 सीटें हासिल कीं। भाजपा की बढ़त 14 सीटों की रही। श्रीविजयनगर नगरपालिका का परिणाम आना अभी बाकी है।

उदयपुर संभाग में भाजपा ने 64 प्रतिशत निकाय प्रमुख बनाए हैं। संभाग के कुल 28 निकायों में से भाजपा 18 पर विजयी रही, जबकि कांग्रेस ने 9 सीटें हासिल कीं। यहां भाजपा की बढ़त 9 सीटों की रही।

कोटा और जयपुर संभाग में भी भाजपा ने आधे से अधिक निकायों में अपने प्रमुख बनाए। कोटा संभाग के कुल 28 निकायों में से भाजपा ने 15 और कांग्रेस ने 10 में अपना प्रमुख बनाया। भाजपा को 55 प्रतिशत सफलता के साथ 5 सीटों की बढ़त मिली। कोटा नगर निगम और सुकेत नगर पालिका का परिणाम फिलहाल बाकी है।

जयपुर संभाग के कुल 91 शहरी स्थानीय निकायों में से भाजपा ने 48 और कांग्रेस ने 40 पर जीत दर्ज की। भाजपा को 54 प्रतिशत सफलता के साथ 8 सीटों की बढ़त मिली। जयपुर नगर निगम के अलावा खाटूश्यामजी नगर पालिका का परिणाम आना बाकी है।

प्रदेशभर में अब तक घोषित 303 निकायों में भाजपा ने 200 और कांग्रेस ने 95 सीटों पर जीत हासिल की है। इस तरह भाजपा ने कांग्रेस पर 105 सीटों की कुल बढ़त बनाई है। भाजपा की सभी निकायों में कुल सफलता दो-तिहाई यानी 66 प्रतिशत दर्ज हुई। जयपुर, जोधपुर एवं कोटा नगर निगम के अलावा सुकेत, खाटूश्यामजी एवं श्रीविजयनगर नगर पालिका के परिणाम अभी आना बाकी हैं।

चुनाव परिणामों में एक और प्रमुख पहलू 9 प्रशासनिक जिलों में कांग्रेस का पूरी तरह सफाया होना रहा। बालोतरा, बाड़मेर, ब्यावर, भरतपुर, डीग, डूंगरपुर, कोटा, फलोदी और पाली जिलों में कांग्रेस एक भी नगर निकाय में अपना बोर्ड नहीं बना सकी। इसके अलावा अजमेर, बांसवाड़ा, जैसलमेर, जालौर, प्रतापगढ़ और सिरोही ऐसे 6 जिले रहे, जहां कांग्रेस केवल 1-1 बोर्ड जीत सकी।

भाजपा ने इस प्रदर्शन को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के राजनीतिक नेतृत्व और रणनीति से जोड़ते हुए कहा कि आमतौर पर स्थानीय निकाय चुनावों में सत्ताधारी दलों को एंटी-इन्कम्बेंसी और असंतोष का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री शर्मा ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों, शहरी विकास की प्राथमिकताओं और सुशासन को चुनाव का मुख्य एजेंडा बनाया। उन्होंने स्वयं अग्रिम मोर्चे पर रहकर चुनाव अभियान की कमान संभाली, प्रमुख शहरों में तूफानी प्रचार किया और संगठन व सरकार के बीच बेहतर तालमेल के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया। भाजपा के अनुसार मुख्यमंत्री के विकास केंद्रित रिपोर्ट कार्ड और बूथ-स्तरीय प्रबंधन ने पार्टी के लिए इस जीत की राह आसान की।

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