जयपुर, 17 अगस्त। राजस्थान में कृषि क्षेत्र को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी, सुगम एवं लक्षित तरीके से उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई कृषि स्टैक राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की बैठक में कृषि स्टैक की प्रगति, किसान रजिस्ट्री, डिजिटल क्रॉप सर्वे, उर्वरक वितरण व्यवस्था और किसान कल्याण योजनाओं के डिजिटलीकरण की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में कृषि विभाग, राजस्व विभाग, बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, सहकारिता, वित्त एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के मुख्य ज्ञान अधिकारी श्री राजीव चावला भी मौजूद रहे।

राज्य में अब तक 87.44 लाख किसानों का किसान रजिस्ट्री में पंजीकरण पूरा हो चुका है। यह भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य का 96.95 प्रतिशत है। इनमें 49.46 लाख पीएम-किसान लाभार्थी सफलतापूर्वक किसान रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं। ग्रामीण सेवा शिविरों, जन आधार के माध्यम से सत्यापन और कृषि पर्यवेक्षकों को डिजिटल प्रणाली से जोड़ने के प्रयासों से किसान रजिस्ट्री के कार्य में तेजी आई है।

कृषि विभाग की किसान-केंद्रित योजनाओं में किसान आईडी को प्राथमिक पहचानकर्ता के रूप में अपनाया जा चुका है। कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने यह जानकारी दी। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि किसान हित से जुड़ी सभी योजनाओं में किसान आईडी के अनिवार्य उपयोग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

कृषि स्टैक के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए कृषि विभाग के अधीन समर्पित कृषि स्टैक आयुक्तालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। कृषि आयुक्त को कृषि स्टैक आयुक्त का दायित्व सौंपा जाएगा। इससे कृषि स्टैक से जुड़े विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म, किसान रजिस्ट्री, डेटा एकीकरण और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन को एकीकृत दिशा मिलेगी।

बैठक में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को सहकारिता विभाग से कृषि विभाग में स्थानांतरित करने के संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया। वहीं मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 26वीं किस्त से किसान आईडी को अनिवार्य किए जाने की दिशा में भी कार्रवाई की जाएगी।

राज्य के RoR (Record of Rights) सिस्टम और किसान रजिस्ट्री के बीच डेटा सिंक्रनाइजेशन का कार्य 31 अगस्त 2026 तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद निरंतर डेटा आदान-प्रदान की व्यवस्था विकसित की जाएगी और आरओआर सत्यापन मॉड्यूल लागू किया जाएगा। बोर्ड ऑफ रेवेन्यू को म्यूटेशन प्रक्रिया में आवेदक का आधार नंबर एवं किसान आईडी अनिवार्य रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी समय-सीमा 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।

राजसमंद एवं सिरोही जिलों में लगभग 70 हजार किसानों को लाभ पहुंचाने वाले फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (FFS) के सफल पायलट के बाद इसे अगस्त 2026 में पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे उर्वरक वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने में मदद मिलेगी।

किसान रजिस्ट्री को खाद्य विभाग एवं राजफेड की एमएसपी खरीद प्रणाली से प्राथमिकता के आधार पर एकीकृत किया जाएगा। वर्तमान खरीद सीजन में दो जिलों में इसका पायलट शुरू किया जाएगा। इससे पात्र किसानों की पहचान और खरीद प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

बैठक में किरायेदार एवं कृषक किसानों को किसान रजिस्ट्री में शामिल करने के लिए एसओपी को प्राथमिकता से अंतिम रूप देने तथा फील्ड स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कम प्रदर्शन वाले जिलों एवं अधिक अनक्लेम्ड बकेट वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देते हुए नवंबर 2026 से राज्यव्यापी सैचुरेशन अभियान चलाया जाएगा। शेष 600 ऑफलाइन गांवों को 15 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन करने का लक्ष्य रखा गया है।

रबी 2082 (2025-26) के डिजिटल क्रॉप सर्वे की समीक्षा में बताया गया कि कुल 4,54,71,878 खसरों में से सरकारी, गैर-कृषि एवं परती भूमि को अलग करने के बाद 2,36,45,253 खसरों को सर्वे के लिए लक्ष्य बनाया गया। इनमें से 80.21 प्रतिशत खसरों का डिजिटल क्रॉप सर्वे/गिर्दावरी पूर्ण हो चुकी है। इसके लिए 20,465 निजी सर्वेक्षकों और 7,718 सरकारी पटवारियों को तैनात किया गया।

खरीफ 2083 (2026-27) में सभी 424 ऑनलाइन तहसीलों में डिजिटल सर्वे किया जाएगा। कम से कम 25 प्रतिशत सर्वे किसान सेल्फ-गिर्दावरी के माध्यम से कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रति खसरा 10 रुपए की दर से भुगतान किया जाएगा और इसके लिए लगभग 29.10 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है। बेरोजगारी भत्ता प्राप्त कर रहे बेरोजगार युवाओं को सर्वे कार्य में प्राथमिकता दी जाएगी।

सैटेलाइट डेटा के माध्यम से रबी सीजन में लगभग 75 लाख परती भूमि के खसरे चिन्हित किए गए, जिससे करीब 7.5 करोड़ रुपए की बचत हुई। वहीं एआई आधारित फोटो वैलिडेशन के माध्यम से डिजिटल सर्वे की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में सुधार हुआ है।

कृषि स्टैक एवं किसान रजिस्ट्री के संबंध में किसानों को जागरूक करने के लिए समर्पित सोशल मीडिया एजेंसी नियुक्त कर व्यापक आईईसी अभियान चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को किसान आईडी, किसान रजिस्ट्री तथा डिजिटल कृषि सेवाओं की उपयोगिता एवं प्रक्रिया की जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराना है।

नई उर्वरक वितरण प्रणाली से संबंधित 665 करोड़ रुपए के प्रोत्साहन में से 100 करोड़ रुपए आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर एवं कृषि स्टैक के उपयोग के लिए पूंजीगत व्यय के रूप में आवंटित करने का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जाएगा।

मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने सभी संबंधित विभागों को कृषि स्टैक से जुड़े निर्णयों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मासिक स्टीयरिंग समीक्षा तथा पाक्षिक विभागीय समीक्षा आयोजित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि स्टैक को केवल तकनीकी परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि किसानों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में आगे बढ़ाया जाए। बैठक में लिए गए फैसलों से किसान रजिस्ट्री, डिजिटल सर्वे, उर्वरक वितरण और किसान कल्याण योजनाओं के डिजिटलीकरण को एकीकृत दिशा देने पर जोर स्पष्ट हुआ।

Pratahkal Newsroom

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