खरीफ 2026: राजस्थान में उर्वरक कालाबाजारी रोकने के लिए टास्क फोर्स गठित
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने अधिकारियों को सीमावर्ती जिलों में सघन निगरानी और 'धरती माता बचाओ अभियान' के तहत संतुलित खाद उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जयपुर के पंत कृषि भवन में आयोजित वीसी के दौरान कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ खरीफ 2026 हेतु खाद की उपलब्धता और वितरण रणनीति पर चर्चा करते हुए।
जयपुर, 27 मार्च। खरीफ 2026 के दौरान कृषकों को उनकी मांग के अनुरूप उर्वरकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि एवं उद्यानिकी विभाग मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को पंत कृषि भवन के सभा कक्ष में वीसी के माध्यम से सभी अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार) खंड और सभी संयुक्त निदेशक जिला परिषद के साथ बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए उर्वरकों की प्रभावी निगरानी एवं समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अवैध परिवहन और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
कृषि मंत्री ने कहा कि "उर्वरकों के राज्य से बाहर अवैध परिगमन को रोकने के लिए सीमावर्ती जिलों में स्थापित चेकपोस्टों पर सघन निगरानी रखी जाएं।" साथ ही उर्वरक निरीक्षकों द्वारा नियमित निरीक्षण कर जमाखोरी, टैगिंग, कालाबाजारी एवं अनियमितताओं पर उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि "नीम कोटेड यूरिया के औद्योगिक एवं गैर-कृषि उपयोग पर विशेष निगरानी रखते हुए औचक निरीक्षण कर पकड़े जाने वाली इकाइयों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
टास्क फोर्स और "धरती माता बचाओ अभियान" की रणनीति
राज्य सरकार द्वारा उर्वरकों की आपूर्ति, गुणवत्ता नियंत्रण तथा विक्रय में पारदर्शिता बनाए रखने हेतु जिला स्तर पर गठित “फर्टिलाइजर रेगुलेटरी टास्क फोर्स” की बैठकें अप्रैल के प्रथम सप्ताह में आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही “धरती माता बचाओ अभियान” के अंतर्गत जिला, ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर निगरानी समितियों की बैठकें भी 15 अप्रैल तक आयोजित कर किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जैविक एवं कार्बनिक खेती को अपनाने तथा कालाबाजारी, अवैध भंडारण एवं गैर-कृषि उपयोग की रोकथाम के संबंध में जागरूक किया जाएगा। उन्होंने आईएफएमएस के साथ एग्री स्टैक को जोड़ने के भी निर्देश दिए, जिससे उर्वरकों के डाइवर्जन और कालाबाजारी पर रोक लग सके।
वितरण व्यवस्था और पारदर्शी निगरानी तंत्र
कृषि मंत्री ने कहा कि "प्रत्येक विक्रेता के यहां पीओएस मशीन के माध्यम से स्टॉक का सत्यापन, मूल्य सूची का प्रदर्शन एवं आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।" जिले में उर्वरकों के सुचारू वितरण के लिए कृषि पर्यवेक्षकों एवं सहायक कृषि अधिकारियों की विक्रेतावार ड्यूटी निर्धारित की जाएगी, जिससे किसानों को समान रूप से उर्वरक उपलब्ध हो सके। उर्वरक प्रबंधन हेतु स्थापित नियंत्रण कक्षों के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जाएगा तथा इसकी जानकारी सोशल मीडिया, समाचार पत्र एवं व्हाट्सएप के माध्यम से व्यापक रूप से प्रसारित की जाएगी। साथ ही सभी विक्रेताओं के परिसर में संतुलित उर्वरक उपयोग संबंधी बैनर एवं फ्लेक्स का प्रदर्शन अनिवार्य किया गया है।
खपत का भौतिक सत्यापन और जागरूकता अभियान
iFMS पोर्टल के माध्यम से अधिक खरीददारों एवं अधिक यूरिया विक्रय करने वाले विक्रेताओं की पहचान कर उनका भौतिक सत्यापन किया जाए। जिन जिलों में उर्वरकों, विशेषकर यूरिया की खपत अधिक पाई गई है, वहां विशेष अभियान चलाकर किसानों को संतुलित उपयोग हेतु प्रेरित किया जाए। कृषकों को खरीफ पूर्व गोष्ठियों, प्रशिक्षण एवं रात्रि चौपालों के माध्यम से डीएपी के विकल्प के रूप में 3 बैग एसएसपी एवं 1 बैग यूरिया के उपयोग की सलाह दी जाएगी। साथ ही कपास, मूंगफली एवं अन्य फसलों में एसएसपी एवं एनपीके उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा तथा जैविक खेती करने वाले उत्कृष्ट किसानों को सम्मानित कर उनके अनुभव साझा करवाए जाएंगे।
उर्वरकों की उपलब्धता और आपूर्ति का लक्ष्य
वर्तमान में राज्य में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, जिसमें यूरिया 3.67 लाख मैट्रिक टन, डीएपी 0.82 लाख मैट्रिक टन, एनपीके 0.66 लाख मैट्रिक टन एवं एसएसपी 1.94 लाख मैट्रिक टन शामिल हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। भारत सरकार द्वारा खरीफ 2026 के लिए राज्य हेतु यूरिया 11.00 लाख मैट्रिक टन, डीएपी 5.10 लाख मैट्रिक टन, एसएसपी 4.00 लाख मैट्रिक टन एवं एनपीके 1.50 लाख मैट्रिक टन की आपूर्ति की जाएगी।
राज्य सरकार द्वारा समुचित प्रबंधन एवं सतत निगरानी के माध्यम से किसानों को उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ किसानों की आय में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बैठक में प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी श्रीमती मंजू राजपाल, आयुक्त कृषि सुश्री चिन्मयी गोपाल, अतिरिक्त निदेशक कृषि (आदान) श्री गोपाल लाल, अतिरिक्त निदेशक कृषि (अनुसंधान) श्री अजय कुमार पचौरी, संयुक्त निदेशक कृषि (आदान) श्री महेंद्र कुमार जैन सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे एवं अतिरिक्त निदेशक कृषि खंड एवं सभी संयुक्त निदेशक जिला परिषद वीसी के माध्यम से जुड़े।

Pratahkal Bureau
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