खरीफ 2026: राजस्थान में उर्वरक आपूर्ति और जैविक खेती पर बड़ी बैठक संपन्न
प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग और 'धरती माता बचाओ' अभियान के जरिए 1.25 लाख नए किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा।

जयपुर। प्रदेश में आगामी खरीफ सीजन 2026 के दौरान कृषि को और अधिक टिकाऊ, लाभकारी एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में राजस्थान सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रमुख शासन सचिव, कृषि एवं उद्यानिकी श्रीमती मंजू राजपाल की अध्यक्षता में रविवार, 29 मार्च को जयपुर स्थित पंत कृषि भवन के सभा कक्ष में हाइब्रिड मोड में एक उच्च स्तरीय राज्य स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग को सुनिश्चित करना, जैविक व प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना तथा रासायनिक उर्वरकों पर कृषकों की निर्भरता को न्यूनतम करना रहा।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रमुख शासन सचिव श्रीमती मंजू राजपाल ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्रदेश के पास उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से जानकारी दी कि वर्तमान में राज्य के पास 3.76 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 0.83 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 0.66 लाख मीट्रिक टन एनपीके एवं 1.97 लाख मीट्रिक टन एसएसपी का स्टॉक मौजूद है, जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में काफी अधिक है। आगामी खरीफ 2026 के लिए भारत सरकार द्वारा राज्य को 11.00 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 5.10 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 4.00 लाख मीट्रिक टन एसएसपी एवं 1.50 लाख मीट्रिक टन एनपीके की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
श्रीमती राजपाल ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर बल देते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों को नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश के सटीक अनुपात के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों के महत्व के प्रति भी जागरूक किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता निरंतर गिर रही है, जिसे रोकना अनिवार्य है। इसी क्रम में उन्होंने भारत सरकार द्वारा संचालित ‘धरती माता बचाओ’ अभियान की महत्ता बताई, जिसके तहत अप्रैल माह से ग्राम पंचायत, ब्लॉक एवं जिला स्तर पर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अभियान का उद्देश्य उर्वरकों का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना, अनुदानित उर्वरकों के औद्योगिक उपयोग को रोकना तथा राज्य से बाहर इनके अवैध परिगमन पर अंकुश लगाना है।
मृदा स्वास्थ्य और दीर्घकालिक कृषि लाभ हेतु प्रमुख शासन सचिव ने हरी खाद, कंपोस्ट, देसी खाद, जैविक उर्वरक, फसल चक्र में दलहनी फसलों का समावेश और फसल अवशेष प्रबंधन जैसी विधियों को अपनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में 2 हजार क्लस्टरों के माध्यम से एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर 2.50 लाख किसानों को जोड़ा गया था। इसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2026-27 में एक हजार नए क्लस्टर बनाकर एक लाख 25 हजार अतिरिक्त किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा। साथ ही, परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में एक हजार क्लस्टरों के 20 हजार किसानों को जैविक खेती से संबद्ध किया जाएगा। इस पुनीत कार्य में 3,600 प्रशिक्षित कृषि सखी एवं आत्मा योजना के 10 हजार चिन्हित कृषक मित्र जमीनी स्तर पर जागरूकता फैला रहे हैं।
श्रीमती राजपाल ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे विभिन्न संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर कृषक गोष्ठियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, रात्रि चौपालों और कार्यशालाओं के माध्यम से किसानों तक पहुंच बनाएं। उन्होंने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक खेती के विकल्पों का प्रभावी प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए। इस महत्वपूर्ण बैठक में आयुक्त कृषि सुश्री चिन्मयी गोपाल, निदेशक आत्मा श्री हिरेंद्र कुमार शर्मा, अतिरिक्त निदेशक कृषि (प्रशासन) श्री हुशियार सिंह, (विस्तार) श्री एस एस शेखावत, (आदान) श्री गोपाल लाल, (अनुसंधान) श्री अजय कुमार पचौरी सहित आईसीएआर संस्थानों के प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के प्रसार शिक्षा निदेशक एवं जिला परिषदों के प्रतिनिधियों ने व्यक्तिगत एवं वीसी के माध्यम से सहभागिता कर कृषि सुधार के इस रोडमैप पर अपनी सहमति व्यक्त की।

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