ICMR भुवनेश्वर का दौरा: राजस्थान के पत्रकारों ने जानी रिसर्च और लिंगराज मंदिर की शैली
पत्रकारों ने मलेरिया वैक्सीन AdFalciVax और ट्राइबल हेल्थ ऑब्जर्वेटरी परियोजना समेत कई शोध कार्यों की जानकारी ली और 11वीं सदी के लिंगराज मंदिर के दर्शन किए।

तस्वीर में आईसीएमआर भुवनेश्वर भवन के बाहर लोगों का समूह खड़ा दिख रहा है।
राजस्थान से ओडिशा पहुंचे पत्रकार दल ने भुवनेश्वर स्थित आईसीएमआर-राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (ICMR-NIHRBB) का दौरा कर संस्थान में चल रहे विभिन्न अनुसंधानों और क्षेत्र-विशिष्ट सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के प्रयासों की जानकारी ली। दौरे के दौरान पत्रकारों को मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस, आदिवासी स्वास्थ्य, पोषण, संक्रामक एवं उभरती जूनोटिक बीमारियों तथा जलवायु-संवेदनशील स्वास्थ्य जोखिमों पर किए जा रहे शोध से अवगत कराया गया।
आईसीएमआर-राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान, भुवनेश्वर भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अधीन भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) का एक स्थायी अनुसंधान केंद्र है।
आईसीएमआर, भुवनेश्वर की अपर महानिदेशक डॉ. संघमित्रा पाती ने पत्रकार दल को ऑनलाइन संबोधित करते हुए बताया कि संस्थान पूर्वी एवं उत्तर-पूर्वी भारत की क्षेत्र-विशिष्ट सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए बहुविषयक अनुसंधान कर रहा है। इनमें मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया एवं जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों के साथ-साथ आदिवासी स्वास्थ्य, पोषण, संक्रामक एवं उभरती जूनोटिक बीमारियां तथा जलवायु-संवेदनशील स्वास्थ्य जोखिम प्रमुख हैं। संस्थान के अनुसंधान में वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ-साथ उनके सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पर विशेष जोर दिया जाता है।
डॉ. पाती ने बताया कि संस्थान ने आउटब्रेक की जांच, मॉलिक्यूलर सर्विलांस तथा नए डायग्नोस्टिक एवं एंटोमोलॉजिकल टूल्स के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। परिचालन अनुसंधान एवं नीतिगत सुझावों के माध्यम से यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सक्रिय रूप से सहयोग प्रदान करता है। साथ ही, क्षेत्र में प्रयोगशाला नेटवर्क एवं फील्ड एपिडेमियोलॉजी की क्षमता को मजबूत करने में भी संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका है।
केंद्र द्वारा एक्सट्राम्यूरल एवं इंट्राम्यूरल रिसर्च परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। पीयर-रिव्यूड जर्नल्स में व्यापक शोध प्रकाशन, प्रतिस्पर्धी अनुदान प्राप्त करने और अत्याधुनिक प्रयोगशाला एवं फील्ड सुविधाओं के विकास की दिशा में भी निरंतर कार्य किया जा रहा है। क्षमता निर्माण के लिए कार्यशालाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इस अवसर पर अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. देबदत्त भट्टाचार्य ने बताया कि ICMR-NIHR भुवनेश्वर ने पिछले चार दशकों के दौरान राज्य सरकार के साथ समन्वय एवं उसके मिशन और विजन के अनुरूप कार्य करते हुए क्षेत्र की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा संस्थान को ट्राइबल हेल्थ ऑब्जर्वेटरी परियोजना का नोडल केंद्र बनाया गया है। इस परियोजना के अंतर्गत देश के 65 जिलों में लगभग 6 लाख विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) को शामिल किया जाएगा।
डॉ. भट्टाचार्य ने बताया कि AdFalciVax भारत की पहली स्वदेशी रिकॉम्बिनेंट मल्टी-स्टेज मलेरिया वैक्सीन है, जिसे ICMR-राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान, भुवनेश्वर द्वारा विकसित किया गया है। उन्होंने बताया कि यह संस्थान भारत में ट्यूबरकुलोसिस (TB) के लिए छह नेशनल रेफरेंस लैबोरेटरी (NRLs) में से एक है। यह सात उत्तर-पूर्वी राज्यों सहित कुल दस राज्यों में TB प्रयोगशाला सेवाओं को सहयोग प्रदान करता है। संस्थान की NRL को वर्ष 2018 में NABL से मान्यता प्राप्त हुई थी।
डॉ. भट्टाचार्य ने बताया कि केंद्र की वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी (VRDL) को वर्ष 2018 में क्षेत्रीय स्तर पर अपग्रेड किया गया। ओडिशा सरकार ने इसे जापानी इंसेफेलाइटिस (JE), डेंगू, चिकनगुनिया एवं H1N1 के लिए प्रमुख प्रयोगशाला तथा मीज़ल्स एवं रूबेला के लिए WHO से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला के रूप में मान्यता दी है।
उन्होंने बताया कि संस्थान की HIV-1 वायरल लोड लेबोरेटरी ओडिशा के 14 ART केंद्रों में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) की सेवाओं को सहयोग प्रदान कर रही है। यह देश की NABL से मान्यता प्राप्त पहली गैर-NACP प्रयोगशाला भी है।
ICMR-NIHR भुवनेश्वर के दौरे के बाद पत्रकार दल ने भुवनेश्वर स्थित ऐतिहासिक लिंगराज मंदिर के दर्शन किए। लगभग 180 फीट ऊंचा यह मंदिर 11वीं शताब्दी ईस्वी में निर्मित भुवनेश्वर की समृद्ध मंदिर स्थापत्य परंपरा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर में विकसित कलिंग मंदिर स्थापत्य शैली के उत्कर्ष का प्रतिनिधित्व करता है। मंदिर परिसर में लगभग 150 सहायक मंदिर स्थित हैं।
भारतीय स्थापत्य कला की दृष्टि से लिंगराज मंदिर अपनी सुव्यवस्थित स्थापत्य योजना, संतुलित अनुपात, उत्कृष्ट शिल्पकला, बारीक नक्काशी तथा भव्य संरचनात्मक स्वरूप के लिए विशेष महत्व रखता है। मंदिर परिसर को मुख्य रूप से चार प्रमुख भागों—गर्भगृह, यज्ञ मंडप, नाट्य मंडप और भोग मंडप—में विभाजित किया गया है। मंदिर की स्थापत्य सज्जा में दैनिक जीवन एवं सामाजिक गतिविधियों से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का कलात्मक चित्रण किया गया है, जो उस समय की सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की झलक प्रस्तुत करता है।
पत्रकार दल ने लिंगराज मंदिर के दर्शन के दौरान ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं स्थापत्य विरासत का परिचय प्राप्त किया। ICMR-NIHR भुवनेश्वर में अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी से लेकर लिंगराज मंदिर की स्थापत्य विरासत के अवलोकन तक, दौरे में ओडिशा की स्वास्थ्य अनुसंधान क्षमता और सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पक्षों से परिचय प्राप्त किया गया।

