जापान टूरिज्म एक्सपो में छाया राजस्थान, राजस्थानी परिधान और हस्तशिल्प बने आकर्षण
टोक्यो में टूरिज्म एक्सपो जापान के तीसरे दिन राजस्थान पवेलियन पर जापानी पर्यटकों ने बंधेज, लहरिया, बगरू-सांगानेरी छपाई और जयपुर ब्लू पॉटरी में विशेष रुचि दिखाई।

तस्वीर में बाईं ओर संयुक्त निदेशक अजय शर्मा और दाईं ओर एक जापानी महिला आगंतुक टोक्यो में राजस्थान पवेलियन के भीतर नजर आ रही हैं।
टोक्यो में टूरिज्म एक्सपो जापान के तीसरे दिन राजस्थान के पवेलियन जी-38 पर जापानी पर्यटकों और पर्यटन कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों ने राजस्थानी पारंपरिक परिधानों, वस्त्रों और हस्तशिल्प में विशेष रुचि दिखाई। रंगों की विविधता, बारीक कारीगरी और सदियों पुरानी हस्तशिल्प परंपराओं ने राजस्थान की अलग पहचान प्रस्तुत की।
जयपुर/टोक्यो, 26 सितंबर। बंधेज, लहरिया, सांगानेरी और बगरू की छपाई तथा जयपुर की ब्लू पॉटरी के बारे में जानकारी लेने के लिए जापानी आगंतुकों में विशेष उत्सुकता रही। राजस्थान पर्यटन के पवेलियन पर आगंतुकों ने इन पारंपरिक कलाओं की निर्माण प्रक्रिया और कारीगरी से जुड़ी जानकारी भी ली।
पर्यटन सचिव शुचि त्यागी के नेतृत्व में संयुक्त निदेशक अजय शर्मा ने पवेलियन की गतिविधियों की कमान संभाली। उन्होंने जापानी पर्यटकों और पर्यटन कारोबारियों से संवाद करते हुए राजस्थान की पारंपरिक वस्त्र एवं शिल्प कलाओं की विशेषताओं की जानकारी दी।
संयुक्त निदेशक अजय शर्मा ने बताया कि इस बार जापान में राजस्थान की प्रस्तुति के दौरान राज्य की हस्तशिल्प और वस्त्र परंपराओं को लेकर खासी रुचि दिखाई गई। उन्होंने कहा कि राजस्थान के पारंपरिक परिधान केवल पहनावे का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इनमें अलग-अलग क्षेत्रों की संस्कृति, रंग, डिजाइन और पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी की झलक मिलती है।
उन्होंने बताया कि बंधेज और लहरिया के साथ बगरू और सांगानेर की हाथ से की जाने वाली छपाई जापानी आगंतुकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। सांगानेरी हाथ की छपाई और बगरू अपनी पारंपरिक लकड़ी की छपाई तथा प्राकृतिक रंगों के प्रयोग के लिए जाना जाता है। इन शिल्पों की निर्माण प्रक्रिया को लेकर भी जापानी पर्यटकों ने सवाल पूछे और कारीगरों की पारंपरिक तकनीकों के बारे में जानकारी ली।
जयपुर की ब्लू पॉटरी भी पवेलियन पर विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसके विशिष्ट रंग, बारीक सजावटी डिजाइन और निर्माण तकनीक जापानी आगंतुकों के लिए कौतूहल का विषय रहे।
अजय शर्मा ने बताया कि राजस्थान पर्यटन जापानी बाजार के सामने राज्य को ऐसे गंतव्य के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जहां पर्यटक तैयार उत्पाद खरीदने के साथ-साथ शिल्प निर्माण की प्रक्रिया को करीब से देख और समझ भी सकते हैं। कारीगरों से संवाद, पारंपरिक छपाई तकनीकों का अनुभव और स्थानीय वस्त्र परंपराओं से जुड़ाव को पर्यटन अनुभव का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
टूरिज्म एक्सपो जापान के तीसरे दिन राजस्थान पवेलियन पर रही सक्रियता और आगंतुकों की लगातार जिज्ञासा ने राजस्थानी हस्तशिल्प एवं पारंपरिक परिधानों के प्रति जापानी बाजार की रुचि को सामने रखा।

