डॉ. अनुराधा गोगिया ने 16 जून तक चलने वाले राज्यव्यापी अभियान को मिशन मोड पर पूरा करने और डिजिटल मैपिंग के निर्देश दिए।

जयपुर। राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में कला एवं संस्कृति विभाग ने एक निर्णायक कदम उठाया है। विभाग की शासन उप सचिव डॉ. अनुराधा गोगिया ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से प्रदेश के समस्त जिला नोडल अधिकारियों के साथ ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत संचालित विशेष सर्वे अभियान की व्यापक समीक्षा की। शासन उप सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि 16 मार्च से 16 जून तक चलने वाले इस तीन माह के राज्यव्यापी सर्वेक्षण अभियान को पूरी गंभीरता के साथ 'मिशन मोड' पर क्रियान्वित किया जाए, ताकि राजस्थान में विभिन्न विषयों पर बिखरी हुई अमूल्य पांडुलिपियों का प्रमाणिक दस्तावेजीकरण सुनिश्चित हो सके।

बैठक के दौरान डॉ. गोगिया ने प्रदेश के सभी जिलों में सर्वेक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया और उनकी वर्तमान कार्य स्थिति का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया। प्रशासनिक सुदृढ़ता सुनिश्चित करने हेतु उन्होंने निर्देशित किया कि अब से प्रत्येक जिले को अपनी विशिष्ट कार्ययोजना के साथ-साथ सर्वेक्षण की साप्ताहिक प्रगति (Weekly Progress) रिपोर्ट अनिवार्य रूप से मुख्यालय को प्रेषित करनी होगी। मिशन की तकनीकी प्रगति पर चर्चा करते हुए बताया गया कि विभाग ने राज्य भर में मौजूद पांडुलिपि भंडारों (Manuscript Repositories) की लोकेशन मैपिंग का कार्य प्रारंभ कर दिया है, जिसके माध्यम से प्राचीन ग्रंथों और दुर्लभ लिपियों के संग्रहण केंद्रों को डिजिटल मानचित्र पर अंकित किया जाएगा। इन समस्त पांडुलिपियों के विवरण को 'ज्ञान भारतम' ऐप पर संकलित किया जाएगा, जिससे भविष्य में इनके डिजिटलीकरण का मार्ग प्रशस्त हो सके।

इस समीक्षा बैठक का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू उन ऐतिहासिक पांडुलिपियों का संरक्षण रहा, जो वर्तमान में व्यक्तिगत कस्टडी (Individual Custody) अथवा निजी संग्रहकर्ताओं के पास सुरक्षित हैं। शासन उप सचिव ने अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित किया कि वे ऐसे निजी संरक्षकों से निरंतर संवाद स्थापित करें और उन्हें इस सांस्कृतिक महाकुंभ में सहयोग हेतु प्रेरित करें, ताकि निजी अधिकार क्षेत्र की पांडुलिपियों का भी सर्वे और डिजिटलीकरण सुगमता से पूर्ण हो सके। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के समापन पर डॉ. अनुराधा गोगिया ने दोहराया कि राजस्थान अपनी गौरवशाली संस्कृति के लिए विश्व पटल पर विख्यात है और इस मिशन का ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक संस्थानों अथवा निजी हाथों में मौजूद हमारी प्राचीन पांडुलिपियां भावी पीढ़ियों के लिए पूर्णतः सुरक्षित और सुलभ रहें।

Pratahkal Newsroom

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