राजस्थान में जीएसटी चोरी और कर अनियमितताओं के खिलाफ वाणिज्यिक कर विभाग ने विशेष जांच अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की है। प्रदेश के पांच जिलों में 9 और 10 अक्टूबर को की गई जांच, निरीक्षण और तलाशी के दौरान 9 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लगभग 3 करोड़ 15 लाख रुपये की संभावित कर अनियमितताएं सामने आईं। कार्रवाई के दौरान संबंधित करदाताओं ने लगभग 2 करोड़ 21 लाख रुपये स्वेच्छा से जमा कराए। कपड़ा, मिठाई, रेस्टोरेंट, तेल उद्योग, ट्रांसपोर्ट, फर्नीचर और मोबाइल कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों की जांच में स्टॉक, लेखा अभिलेखों, खरीद-बिक्री विवरण और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की पड़ताल की गई।

जयपुर, 16 अक्टूबर। राज्य में कर चोरी पर अंकुश लगाने, राजस्व हितों की सुरक्षा करने और जीएसटी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वाणिज्यिक कर विभाग ने जयपुर, अलवर, कोटा, हनुमानगढ़ और दौसा जिलों में कार्रवाई की। जांच के दौरान आवश्यकतानुसार दस्तावेज जब्त किए गए और संबंधित करदाताओं को समन जारी कर अग्रिम जांच शुरू की गई है।

कोटा में मैसर्स रिद्धि सिद्धि ऑयल इंडस्ट्रीज में जांच के दौरान करमुक्त आपूर्ति के विरुद्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने संबंधी अनियमितताएं सामने आईं। इस प्रकरण में लगभग 1 करोड़ 60 लाख रुपये की संभावित कर राशि आंकी गई। जांच के दौरान करदाता ने 10 अक्टूबर तक 1 करोड़ 21 लाख 38 हजार रुपये स्वेच्छा से जमा कराए। संबंधित अभिलेखों की जांच और अग्रिम कार्रवाई जारी है।

जयपुर के बगरू स्थित मैसर्स बगरू हस्तकला प्रिंटर्स में कपड़ों की बिक्री पर निर्धारित दर के बजाय सभी उत्पादों पर 5 प्रतिशत जीएसटी जमा कराने संबंधी अनियमितता सामने आई। भौतिक स्टॉक और पुस्तकीय स्टॉक के बीच अंतर मिलने पर करदाता ने 13 लाख 17 हजार 74 रुपये स्वेच्छा से जमा कराए। इस प्रकरण में लगभग 15 लाख रुपये की संभावित कर राशि आंकी गई है।

जयपुर के सी-स्कीम स्थित गोपाल सिंह पतासी भंडार में कर देयता से संबंधित अनियमितताओं की जांच के दौरान लगभग 20 लाख रुपये की संभावित कर राशि सामने आई। प्रतिष्ठान ने 3 लाख 32 हजार रुपये जमा कराए। वहीं, बॉम्बे मिष्ठान भंडार में रेस्टोरेंट सेवाओं से संबंधित अपात्र इनपुट टैक्स क्रेडिट के उपयोग की जांच की गई। वित्तीय वर्ष 2021-22 से संबंधित अवधि के लेनदेन और अभिलेखों के परीक्षण में लगभग 40 लाख रुपये की संभावित कर अनियमितता सामने आई। करदाता ने जांच के दौरान डीआरसी-03 के माध्यम से 25 लाख 4 हजार रुपये जमा कराए।

अलवर में शबीर खान ट्रांसपोर्ट कंपनी और राजस्थान गोल्डन ट्रांसपोर्ट कंपनी के खिलाफ इनपुट टैक्स क्रेडिट से संबंधित अनियमितताओं को लेकर कार्रवाई की गई। जांच में सामने आया कि 5 प्रतिशत कर दर अथवा करमुक्त आपूर्ति के अंतर्गत परिवहन सेवाएं प्रदान करने के बावजूद आईटीसी का लाभ लेने संबंधी प्रकरण हैं। शबीर खान ट्रांसपोर्ट कंपनी में लगभग 21.85 लाख रुपये की संभावित कर राशि के विरुद्ध 21.29 लाख रुपये जमा कराए गए। राजस्थान गोल्डन ट्रांसपोर्ट कंपनी में लगभग 22.83 लाख रुपये की संभावित कर राशि जमा कराई गई।

अलवर में ही राहुल डेकोर और संबंधित फर्म निखिल फोम एंड फर्निशिंग पर बिना वैध दस्तावेजों के खरीद-बिक्री की आशंका के आधार पर जांच की गई। अधिकारियों ने भौतिक स्टॉक का सत्यापन करने के साथ आवश्यक अभिलेखों की पड़ताल की। इस प्रकरण में लगभग 12 लाख रुपये की संभावित कर राशि आंकी गई है।

हनुमानगढ़ जिले के नोहर स्थित श्री हरि स्वीट्स में वास्तविक कारोबार कम दर्शाने और संभावित कर चोरी की आशंका के आधार पर जांच की गई। प्रारंभिक जांच में लगभग 7 लाख 30 हजार रुपये की संभावित कर देयता सामने आई। करदाता ने मौके पर ही 7 लाख रुपये स्वेच्छा से जमा करा दिए।

दौसा जिले के महुवा स्थित मैसर्स खंडेलवाल टेलीकॉम सेंटर में कर देयता का भुगतान नहीं करने से संबंधित प्रकरण में कार्रवाई की गई। जांच दल ने प्रतिष्ठान और संचालक के आवास पर तलाशी लेकर भौतिक स्टॉक का सत्यापन किया तथा संबंधित दस्तावेज जब्त किए। इस दौरान करदाता ने 7 लाख रुपये जमा कराए।

वाणिज्यिक कर विभाग खरीद-बिक्री विवरण, वास्तविक स्टॉक, कर विवरणियों और इनपुट टैक्स क्रेडिट का परीक्षण कर कर अपवंचन के मामलों की जांच कर रहा है। विभाग का उद्देश्य कर व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना, ईमानदार करदाताओं के हितों की रक्षा करना और राजस्व हानि रोकना है। जांच में सामने आई अनियमितताओं के संबंध में संबंधित करदाताओं से आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्राप्त कर नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि कर चोरी, कारोबार छिपाने, गलत कर दर लागू करने और अपात्र इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने जैसे मामलों में नियमानुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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