राजस्थान में 130 गोदाम तैयार, सहकारिता विभाग जल्द शुरू करेगा संचालन
मुख्य सचिव ने समीक्षा बैठक में दिए निर्देश, प्रदेश के 130 कृषि गोदामों से किसानों को जल्द मिलेगी भंडारण और निर्यात की सुविधा।

जयपुर में सहकारिता विभाग की बैठक में अन्न भंडारण योजना की समीक्षा करते मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास।
जयपुर, 27 अक्टूबर। राजस्थान में किसानों को भंडारण की सुविधा उपलब्ध कराने और कृषि उपज को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के लिए सहकारिता क्षेत्र में बनाए गए गोदामों का जल्द संचालन शुरू किया जाएगा। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के तहत निर्मित गोदामों को समय पर उपयोग में लाने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में अब तक 130 गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 70 गोदामों का निर्माण कार्य जारी है।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास मंगलवार को शासन सचिवालय के चिंतन सभागार में सहकारिता विभाग की विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना और एनसीओएल, एनसीईएल तथा बीबीएसएसएल की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में गोदामों के निर्माण एवं उपयोग, किसानों को किराये पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने और सहकारी समितियों की विभिन्न गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की गई।
शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारिता डॉ. समित शर्मा ने बताया कि योजना के तहत तैयार गोदामों का उपयोग समर्थन मूल्य पर खरीदी गई कृषि उपज, राशन के अनाज, बीज और उर्वरकों के भंडारण के लिए किया जा सकता है। सहकारी समितियां इन गोदामों का स्वयं उपयोग करने के साथ इन्हें किराये पर भी दे सकती हैं। बैठक में गोदामों का जल्द संचालन शुरू करने और किसानों को भंडारण की सुविधा उपलब्ध कराने पर चर्चा की गई।
डॉ. शर्मा ने बताया कि प्रदेश में सहकारी समितियों के माध्यम से 1,575 कृषि यंत्र किराया केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के जरिए छोटे एवं सीमांत किसानों को ट्रैक्टर, रोटावेटर, थ्रेशर और बीज बोने के यंत्र किराये पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे किसानों को महंगे कृषि यंत्र खरीदने की आवश्यकता नहीं होती और खेती की लागत घटाने में मदद मिलती है। तीस लाख रुपये की लागत वाले केंद्र की स्थापना पर 80 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान है।
बैठक में राष्ट्रीय स्तर की बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं के माध्यम से सहकारी समितियों को गुणवत्तापूर्ण बीज, जैविक खेती और कृषि उपज के निर्यात से जोड़ने की प्रगति की भी समीक्षा की गई। नागौर में जैविक खेती करने वाले किसानों को प्रमाणन और बाजार की सुविधा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड का राजस्थान में कारोबार वर्ष 2024-25 के 2.34 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 24.28 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, श्रीगंगानगर की अतुल्य ग्रामीण सहकारी समिति ने राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड के सहयोग से वर्ष 2025 में संयुक्त अरब अमीरात को बाजरे के दो कंटेनर निर्यात किए।
बैठक में बाजरा, जीरा और किन्नू को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने के लिए कृषि उपज के संग्रहण, छंटाई, प्रसंस्करण और गुणवत्ता जांच की सुविधाएं विकसित करने से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा हुई। इससे सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों की उपज को बाजार से जोड़ने और निर्यात की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के विशेष कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने और उनके विदेशों में निर्यात की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए। इनमें सोजत की मेहंदी, बारां का चावल, नागौर की मैथी एवं जीरा और मथानिया की मिर्च शामिल हैं।
बैठक में प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी श्रीमती मंजू राजपाल, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राजस्थान राज्य भंडारण निगम डॉ. आरुषी अजेय मलिक सहित सहकारिता विभाग और संबंधित संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। गोदामों के शीघ्र संचालन, कृषि यंत्र किराया केंद्रों के उपयोग और क्षेत्रीय कृषि उत्पादों को निर्यात बाजारों से जोड़ने की पहल को प्रदेश में सहकारी कृषि व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

