मांड गायन की स्वर-साधिका गवरी देवी के निधन से लोक संगीत जगत शोकाकुल
राजस्थान की प्रसिद्ध मांड गायिका गवरी देवी के निधन पर राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश की लोक संगीत परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

राजस्थान की मांड गायिका गवरी देवी के निधन पर शोक व्यक्त करने वाले राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े एक शिष्टाचार भेंट के दौरान स्मृति चिह्न के रूप में ऊंट की कलाकृति ग्रहण करते हुए।
राजस्थान की सुप्रसिद्ध मांड गायिका गवरी देवी के निधन से लोक संगीत जगत में शोक की लहर फैल गई है। उनके निधन पर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
राज्यपाल श्री बागडे ने अपने शोक संदेश में कहा कि गवरी देवी ने राजस्थान की समृद्ध लोक संगीत परंपरा, विशेष रूप से मांड गायन शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अपने स्वर और साधना के माध्यम से मांड गायन की पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित किया तथा लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि गवरी देवी मांड गायन की महान हस्तियों में शामिल थीं और उनका निधन लोक संगीत जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
राज्यपाल ने दिवंगत पुण्यात्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों, प्रशंसकों और शुभचिंतकों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है।
गवरी देवी का निधन राजस्थान की लोक सांस्कृतिक परंपरा के एक महत्वपूर्ण अध्याय के अवसान के रूप में देखा जा रहा है, जिनकी स्वर विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

Pratahkal Bureau
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