राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे के दो वर्ष पूरे, उच्च शिक्षा, जनजातीय विकास और सहकारिता में कई बड़ी पहल
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने दो वर्ष का कार्यकाल पूरा किया। जानिए उच्च शिक्षा, जनजातीय विकास, सहकारिता और प्रशासनिक सुधारों की प्रमुख पहलें।

राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने राज्यपाल के रूप में अपने दो वर्ष पूरे होने पर कहा कि राजस्थान भक्ति और शक्ति का आत्मीयता भरा प्रदेश है, जहां के लोगों से उन्हें निरंतर स्नेह मिला। उन्होंने कहा कि राजस्थान की संस्कृति, यहां की भाषा और लोगों के बीच यह दो वर्ष कब बीत गए, इसका अहसास ही नहीं हुआ। लोकभवन में आयोजित विशेष दीक्षांत समारोह में अपने दो वर्ष के कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह अवधि ‘सहकार से सिद्धि’ के रूप में सबको साथ लेकर चलते हुए सबके आलोक का समय रही है।
श्री हरिभाऊ बागडे ने राजस्थान के 22वें राज्यपाल के रूप में 31 जुलाई 2024 को पदभार ग्रहण किया था। अपने दो वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों की पहल की। विश्वविद्यालयों में नैक एक्रीडिएशन की प्रक्रिया को गति दी गई। प्रवेश, परीक्षाएं, परीक्षा परिणाम और दीक्षांत समारोह समयबद्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा से नई पीढ़ी को जोड़ने, रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम प्रारंभ कराने तथा विश्वविद्यालयों के वित्तीय और नैतिक कार्यों से जुड़े अंकेक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए गुणात्मक सुधार की दिशा में पहल की गई। इस दौरान विश्वविद्यालयों में अनियमितताओं, गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली और नियुक्तियों से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई भी सुनिश्चित की गई।
पदभार ग्रहण के बाद पहले वर्ष उन्होंने राजस्थान के ‘अभ्युदय की ओर’ और दूसरे वर्ष ‘सहकार से सिद्धि’ के अंतर्गत आलोक पथ को आधार बनाते हुए विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कराई। मौलिक शोध और पेटेंट को प्रोत्साहन देने की नीति पर कार्य किया गया। प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षाएं, पाठ्यक्रमों को समयबद्ध पूरा करने तथा निर्धारित समय पर परीक्षा परिणाम जारी करने के निर्देश दिए गए, जिससे विश्वविद्यालयों में तय शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार कार्यप्रणाली लागू हुई। जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए उन्होंने स्वयं सभी जिलों का दौरा कर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का बारीकी से मूल्यांकन किया तथा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि जनजातीय समुदाय को योजनाओं का समय पर और प्रभावी लाभ मिले।
पिछले वर्ष उन्होंने राजस्थान के प्रत्येक जिले का दौरा कर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा बैठकें कीं। वर्तमान वर्ष में उन्होंने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों का दौरा कर उनकी सतत मॉनिटरिंग की, छोटी से छोटी समस्याओं के समाधान के साथ वित्तीय अंकेक्षण के जरिए पारदर्शिता और उच्च शिक्षा के गुणात्मक विस्तार पर बल दिया। जनजातीय जिलों में पहुंचकर योजनाओं की सूक्ष्म समीक्षा की गई तथा जनजातीय उत्पादों के प्रभावी विपणन की नीति पर कार्य करने के निर्देश दिए गए। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने लुप्त होती कलाओं के संरक्षण और राजस्थान के हस्तशिल्प उत्पादों के देश-विदेश में प्रभावी विपणन के लिए नीतियां बनाईं तथा शिल्प ग्राम उत्सवों के माध्यम से कारीगरों, शिल्पकारों और कलाकारों को निरंतर प्रोत्साहन दिया।
राज्यपाल श्री बागडे ने सहकारिता के माध्यम से आर्थिक सुदृढ़ीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी जिलों और सीमा क्षेत्रों का दौरा किया। प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों के प्रसार शिक्षा केंद्रों के माध्यम से अभियान चलाकर किसानों को प्रेरित किया। नई शिक्षा नीति के तहत विश्वविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों, आदर्श चरित्रों और भाषाई सद्भाव को बढ़ावा दिया गया। उनकी पहल पर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ हुई।
पिछले दो वर्षों में उन्होंने सीमा क्षेत्रों का दौरा कर सैनिकों से संवाद किया, सीमावर्ती गांवों के निवासियों की समस्याओं के समाधान का प्रयास किया, राज्यपाल राहत कोष से जरूरतमंदों को सहायता उपलब्ध कराई तथा जनजातीय खेलों को बढ़ावा देकर आदिवासी बालक-बालिकाओं के कल्याण को प्राथमिकता दी। उन्होंने सहकार की भावना को सबको साथ लेकर सामूहिक विकास का माध्यम बताते हुए सहकारिता आंदोलन को गति देने का कार्य किया। पूर्व सैनिकों को समय पर योजनाओं का लाभ और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सतत मॉनिटरिंग की गई।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर नशामुक्त और टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत राजस्थान के सभी जिलों में अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। राज्यपाल के प्रयासों से सहकारिता क्षेत्र की देश की चौथी सबसे बड़ी बैंक टीजेएसबी सहकारी बैंक लिमिटेड की राजधानी जयपुर में शाखा स्थापित हुई, जिसकी शुरुआत महाराष्ट्र के ठाणे से हुई थी। विश्वविद्यालयों में नैक एक्रीडिएशन के लिए शासन सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार, जयपुर के संयोजन में समिति का गठन किया गया। समयबद्ध परीक्षा, नियमित दीक्षांत समारोह, प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा कैलेंडर और सिलेबस निर्माण को व्यवस्थित किया गया। वित्तीय अनुशासन और अंकेक्षण की सतत मॉनिटरिंग शुरू हुई तथा विश्वविद्यालयों के रिक्त शैक्षणिक और अशैक्षणिक पदों पर भर्ती के लिए रोस्टर तैयार कर प्रक्रिया प्रारंभ की गई।
नई शिक्षा नीति के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा, इतिहास और कौशल विकास से जुड़े पाठ्यक्रम प्रारंभ कराने की पहल की गई। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर प्रदेश के विश्वविद्यालयों द्वारा स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले व्यक्तियों की जानकारी युवाओं तक पहुंचाने का अभियान चलाया गया। देश के गौरवशाली इतिहास, वैदिक गणित, स्थानीय स्थापत्य कला, जल प्रबंधन के पारंपरिक तरीकों, महापुरुषों की जीवनियों और नैतिक मूल्यों को विभिन्न पाठ्यक्रमों के फाउंडेशन कोर्स में शामिल करने की दिशा में पहल हुई।
जनजातीय क्षेत्रों में उत्पादों के विपणन के माध्यम से जीवन स्तर सुधारने के प्रयास किए गए। बांस की खेती, वनीकरण, ग्रामीण आजीविका और हरित समाधान के रूप में बांस की उपयोगिता पर विशेष बैठक आयोजित कर संभावनाओं को बढ़ावा दिया गया। अनुसूचित और सहरिया क्षेत्रों के आवासीय विद्यालयों, आश्रम छात्रावासों तथा चिकित्सा संस्थानों में शिक्षकों, चिकित्सकों, पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ के रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरने के लिए राज्य सरकार को निर्देश दिए गए। जनजातीय क्षेत्र के बच्चों को खेल प्रोत्साहन के तहत ‘राजस्थान लैक्रोज एसोसिएशन’ को कुल 20.20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इसी प्रोत्साहन के परिणामस्वरूप राष्ट्रीय प्रतियोगिता 2025-26 की छह अधिकृत प्रतियोगिताओं में राजस्थान टीम ने पांच स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीता।
शैक्षणिक उन्नयन के लिए राज्यपाल के विवेकाधीन कोष से आकांक्षी ब्लॉक सज्जनगढ़ (बांसवाड़ा) के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, लसोड़िया तथा ब्लॉक खैरवाड़ा (उदयपुर) के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, खैरवाड़ा को प्रति विद्यालय 7.50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। लोकभवन, जयपुर में ट्राइफेड द्वारा वनधन विकास केंद्रों के उत्पादों की प्रदर्शनी आयोजित की गई। यूनिवर्सिटी सोशल रिस्पांसिबिलिटी के चौथे चरण के अंतर्गत 24 राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालयों ने 59 गांव गोद लिए, जिनमें दो विश्वविद्यालयों द्वारा गोद लिए गए चार गांव अनुसूचित क्षेत्र में स्थित हैं। राज्यपाल ने सभी जिलों का दौरा कर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं तथा विकास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की और स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित किया।
पूर्व सैनिकों के हित में द्वितीय विश्व युद्ध के पूर्व सैनिकों की मासिक सहायता राशि 10,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये तथा उनके बच्चों के लिए कोचिंग सहायता राशि 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का निर्णय लिया गया। राजस्थान पर्यटन विकास निगम की इकाइयों में वीरांगनाओं को 50 प्रतिशत तथा पूर्व सैनिकों और सेवारत सैनिकों को 25 प्रतिशत शुल्क छूट देने का निर्णय हुआ। राज्यभर में 1,400 से अधिक वीरांगनाओं का सम्मान किया गया। पूर्व सैनिकों के लिए डिजिटल सेवाओं और ऑनलाइन सहायता प्रणाली शुरू की गई तथा सैनिक विश्राम गृहों का आधुनिकीकरण किया गया। रेडक्रॉस सोसायटी की जिला शाखाओं को सुदृढ़ किया गया और टीबी मुक्त तथा नशा मुक्त भारत अभियान में उनकी भूमिका तय की गई।
राज्यपाल सचिवालय में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के तहत लोकभवन इन्फॉर्मास पोर्टल विकसित करने, सचिवालय की पत्राचार और फाइलिंग प्रणाली को पूरी तरह ऑनलाइन करने, ‘फाइल बॉक्स’ विकसित कर फाइलों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था लागू करने तथा ‘सेव पेपर सेव एनवायरमेंट’ पहल के तहत आईटी सेल द्वारा इन-हाउस पोर्टल ‘आरबी कोर-ऑर्डर रिपॉजिटरी’ विकसित करने जैसी पहल भी इस दो वर्षीय कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहीं। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने अपने दो वर्षों के कार्यकाल को सहकार, पारदर्शिता, शिक्षा सुधार, जनजातीय विकास, सैनिक कल्याण और प्रशासनिक आधुनिकीकरण की दिशा में निरंतर प्रयासों का काल बताया।

Pratahkal Bureau
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