राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि किसी समाज, उत्पाद या विचार को सामान्य से श्रेष्ठ बनाने में मानकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। श्रेष्ठता केवल भौतिक पैमानों से नहीं, बल्कि वैचारिक, नैतिक और व्यावहारिक शुद्धता से भी तय होनी चाहिए। उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो से गुणवत्ता और मानकीकरण के महत्व के साथ उपभोक्ताओं में रचनात्मकता, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे बुधवार, 14 अक्टूबर को जयपुर के कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में भारतीय मानक ब्यूरो की ओर से आयोजित विश्व मानक दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्राचीन भारतीय परंपराओं में निर्धारित मानकों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रेष्ठता भारतीय जीवन का आधार रही है। उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो की ओर से श्रेष्ठता के लिए निर्धारित मानकों को महत्वपूर्ण बताते हुए इनके प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने की आवश्यकता जताई।

राज्यपाल ने कहा कि सेवाओं और उत्पादों के लिए निर्धारित आईएसआई, आईएसओ और आईसी मानकों की श्रेष्ठता के प्रति शहरों के साथ-साथ गांवों में भी जागरूकता का प्रसार होना चाहिए। उन्होंने विभिन्न प्रकार के उत्पादों, सेवाओं और तकनीकी आयामों के नियम तथा मानक निर्धारित करने वाले वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और विशेषज्ञों के योगदान की सराहना की।

हरिभाऊ बागडे ने कहा कि मानकों के पालन से जीवन सुरक्षित, सुगम और बेहतर बनता है। आईएसआई मार्क और हॉलमार्क जैसे मानक आज विश्वास के प्रतीक हैं। कड़े मानकों का पालन करने से भारतीय उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता वैश्विक स्तर पर देश की श्रेष्ठता और साख को मजबूत करती है।

राज्यपाल ने भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता, नवाचार और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में गुणवत्ता को आदत बनाना होगा। इससे ‘वन नेशन, वन स्टैंडर्ड’ की नीति अपनाकर ‘गुणवत्ता सम्पन्न भारत’ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा जा सकेगा।

समारोह से पहले राज्यपाल ने मानक दिवस की शपथ दिलाई। इसके बाद उन्होंने मानक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया। समारोह में गुणवत्ता, मानकीकरण और निर्धारित मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ भारतीय उत्पादों और सेवाओं की विश्वसनीयता मजबूत करने का संदेश दिया गया।

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