केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और सीएम भजनलाल शर्मा ने संवाद में निवेश व रोजगार की संभावनाओं को रेखांकित किया; सालाना 6 करोड़ चिप उत्पादन का लक्ष्य।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में राजस्थान एक बहुत बड़े वैश्विक हिस्सेदार के रूप में उभरने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय संवाद कार्यक्रम में केन्द्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों और विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए राज्य में इस क्षेत्र की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने निवेशकों से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य तय कर आगे बढ़ने का आह्वान किया और सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग तथा इसके माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का भरोसा दिलाया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश इस क्षेत्र में निरंतर तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। इसी का परिणाम है कि पिछले दो वर्षों में देश के भीतर 450 फैक्ट्रियों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ है। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के तहत मात्र एक वर्ष की अवधि में 75 फैक्ट्रियां स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिसके लिए केन्द्रीय कैबिनेट ने बजट को भी बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने इस बात पर विशेष बल दिया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो चुका है जो स्वयं सेमीकंडक्टर का उत्पादन करते हैं। देश में 76 हजार करोड़ रुपये से अधिक के भारी-भरकम प्रोत्साहन पैकेज के साथ 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' को अत्यंत तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।

वर्तमान तकनीक-प्रधान युग में सिम से लेकर स्पेस तक और मोबाइल से लेकर मिसाइल तक, हर एक आधुनिक क्षेत्र में सेमीकंडक्टर चिप की भूमिका सर्वोपरि हो चुकी है। भविष्य की रणनीतिक और आर्थिक मजबूती अब उन्हीं देशों और राज्यों के पास होगी जो इस क्षेत्र में अपनी क्षमता को सुदृढ़ करेंगे। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए राजस्थान के भिवाड़ी में प्रदेश के पहले सेमीकंडक्टर क्लस्टर का इसी माह सफलतापूर्वक शुभारंभ किया गया है। 50 एकड़ के इस विशाल परिसर में प्रतिवर्ष करीब 6 करोड़ चिप का उत्पादन किया जाएगा। यह क्लस्टर औद्योगिक रूप से कितना आकर्षक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके माध्यम से अब तक 20 कंपनियों से 1,200 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की बड़ी योजनाएं राज्य की ओर आकर्षित की जा चुकी हैं।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर राजस्थान सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार, युवा मामले एवं खेल, कौशल, नियोजन एवं उद्यमिता और सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने वैश्विक भू-राजनीति और अर्थव्यवस्था के संदर्भ में इसकी गहराई को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में सेमीकंडक्टर वैश्विक शक्ति संतुलन और आर्थिक आत्मनिर्भरता का मुख्य आधार बन चुका है। उन्होंने इसकी तुलना इतिहास से करते हुए कहा कि जिस प्रकार औद्योगिक युग में खनिज तेल और परमाणु युग में यूरेनियम रणनीतिक शक्ति के सबसे बड़े केंद्र हुआ करते थे, ठीक उसी प्रकार आज के डिजिटल एज की सबसे बड़ी और निर्णायक ताकत सेमीकंडक्टर है।

कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक और नीतिगत पहलुओं को सामने रखते हुए उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री शिखर अग्रवाल ने एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया, जिसमें राज्य सरकार की विभिन्न औद्योगिक नीतियों और निवेशकों को मिलने वाली सहूलियतों को साझा किया गया। इस ऐतिहासिक संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास सहित संबंधित विभागों के तमाम वरिष्ठ अधिकारी और देश-विदेश से आए बड़ी संख्या में स्टेक होल्डर्स मौजूद रहे, जो राजस्थान को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग का नया हब बनाने की दिशा में एक बड़े मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।

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