राजस्थान में गोबर और मिट्टी के दीयों से मनेगी दीपावली, मंत्री जोराराम कुमावत ने की अपील
राजस्थान में दीपावली पर गोबर और मिट्टी के दीयों के इस्तेमाल को लेकर मंत्री जोराराम कुमावत ने आमजन से अपील की है। जानिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर मंदिरों की सजावट और लाइटिंग के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।

दीपावली पर गोबर और मिट्टी के उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान करने वाले राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत।
जयपुर, 02 नवंबर। इस बार दीपावली पर राजस्थान में गोबर और मिट्टी से बने दीयों तथा पारंपरिक कलाकृतियों से घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सजाने की अपील की गई है। पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने आमजन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' संकल्प को आगे बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया है।
मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि दीपावली पर सजावट के लिए गाय के गोबर और मिट्टी से बने दीयों एवं कलाकृतियों का उपयोग किया जाना चाहिए। गो-उत्पादों और पारंपरिक मिट्टी के दीयों को अपनाने से भारतीय संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण होगा। साथ ही, इससे ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर तबके को सीधे तौर पर रोजगार एवं आर्थिक संबल मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंदिरों की सजावट के लिए बजट जारी
मंत्री कुमावत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि उनके निर्देश पर इस बार दीपावली के अवसर पर देवस्थान विभाग के अंतर्गत आने वाले प्रमुख मंदिरों की विशेष साज-सज्जा और रोशनी की व्यवस्था के लिए राज्य सरकार ने बजट जारी किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश के आराध्य देवों और प्रमुख मंदिरों की दीपावली पर सजावट के लिए लगातार योगदान दे रही है। प्रत्येक वर्ष किए जा रहे इन प्रयासों से मंदिरों में त्योहारों की रौनक बढ़ी है। इसके साथ ही मंदिरों में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है।
मंत्री ने विश्वास जताया कि इस बार की दीपावली राजस्थान में समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता का संदेश लेकर आएगी। स्थानीय स्तर पर तैयार गोबर और मिट्टी के उत्पादों को अपनाने तथा प्रमुख मंदिरों की विशेष सजावट के लिए सरकारी सहयोग से पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और धार्मिक पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

