जयपुर, 18 सितम्बर। कारागार विभाग में प्रशिक्षु प्रहरी संवर्ग के प्रशिक्षण को अधिक सरल, व्यवहारिक और उपयोगी बनाने के उद्देश्य से तैयार प्रशिक्षण पुस्तकों का महानिदेशक कारागार, राजस्थान श्री अशोक राठौड़ ने शुक्रवार को जेल प्रशिक्षण संस्थान, अजमेर में विमोचन किया।

इन प्रशिक्षण पुस्तकों का लेखन हाई सिक्योरिटी जेल, अजमेर के अधीक्षक पारस जांगिड़ ने किया है। पुस्तकों में प्रहरी प्रशिक्षण के निर्धारित नौ इंडोर विषयों को पाठ्यक्रम के अनुसार शामिल किया गया है। अध्ययन सामग्री को सरल भाषा, व्यवहारिक उदाहरणों और कारागार की वास्तविक कार्य परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया है।

विमोचन अवसर पर महानिदेशक कारागार श्री अशोक राठौड़ ने जेल प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिला प्रहरियों एवं प्रशिक्षु उप अधीक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण अवधि सेवा जीवन की मजबूत नींव होती है। सभी प्रशिक्षुओं को बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने ज्ञान, अनुशासन और दक्षता को बढ़ाना चाहिए तथा प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कारागार सेवा में सुरक्षा और अनुशासन के साथ-साथ बंदियों के प्रति संवेदनशील एवं सुधारात्मक दृष्टिकोण भी आवश्यक है। प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान को वास्तविक ड्यूटी में सही ढंग से लागू करना ही प्रशिक्षण की सार्थकता है।

प्रशिक्षण पुस्तकों में कारागार प्रशासन, सुरक्षा एवं अनुशासन, बंदियों की देखभाल एवं सुधार, विधिक एवं मानवाधिकार संबंधी जानकारी, समाजशास्त्र, अपराधशास्त्र एवं आपराधिक मनोविज्ञान, स्वास्थ्य एवं प्राथमिक चिकित्सा तथा कम्प्यूटर उपयोग सहित प्रहरी के दैनिक कर्तव्यों से जुड़े विषयों को शामिल किया गया है।

अधीक्षक पारस जांगिड़ ने बताया कि पुस्तकों को इस उद्देश्य से तैयार किया गया है कि प्रशिक्षुओं को पाठ्यक्रम की विषयवस्तु एक ही स्थान पर सरल एवं व्यवस्थित रूप में उपलब्ध हो तथा वे नियमों और सिद्धांतों को कारागार की व्यवहारिक परिस्थितियों से जोड़कर समझ सकें।

इस अवसर पर सेंट्रल जेल अधीक्षक आर. अनंतेश्वर, जेटीआई प्राचार्य वैभव भारद्वाज तथा एमडीआई अशोक कुमार शर्मा सहित स्टाफ मौजूद रहा।

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