जयपुर, 15 मार्च 2026। राजस्थान दिवस के अवसर पर राजधानी में रंगमंच प्रेमियों के लिए विशेष नाट्य संध्या का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) की ओर से 17 मार्च को पौराणिक महागाथा पर आधारित नाटक ‘समुद्र मंथन’ का मंचन जवाहर कला केंद्र के मध्यवर्ती सभागार में सायं 7 बजे किया जाएगा। इस प्रस्तुति के निर्देशन का दायित्व प्रसिद्ध रंगकर्मी और एनएसडी के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने संभाला है। प्रवेश “पहले आओ–पहले पाओ” के आधार पर होगा।

राजस्थान दिवस समारोहों के तहत आयोजित इस सांस्कृतिक श्रृंखला में ‘समुद्र मंथन’ भारतीय पौराणिक साहित्य की महत्वपूर्ण कथा को समकालीन सामाजिक मुद्दों के साथ जीवंत करता है। नाटक का लेखन आसिफ अली हैदर ने किया है।

विष्णु पुराण में वर्णित समुद्र मंथन की कथा भारतीय सांस्कृतिक और रंगमंचीय परंपरा में विशेष स्थान रखती है। भरत मुनि के नाट्यशास्त्र में इसे प्रारंभिक नाट्य प्रयोगों में शामिल किया गया है और इसे रूपकों की ‘समवकार’ श्रेणी में रखा गया है। नाटक की कथा उस समय से आरंभ होती है जब ऋषि दुर्वासा के शाप से देवराज इंद्र और अन्य देवता शक्तिहीन हो जाते हैं। इसका लाभ उठाकर असुरों के राजा बलि स्वर्ग पर अधिकार कर लेते हैं और दैत्य प्रवृत्तियाँ सृष्टि पर हावी होने लगती हैं। सृष्टि के संतुलन के लिए देवता भगवान विष्णु की शरण लेते हैं। विष्णु के निर्देश पर देवता और दैत्य मिलकर क्षीर सागर का मंथन करते हैं, जिससे अमृत के साथ अनेक दिव्य और विनाशकारी तत्व प्रकट होते हैं।

नाटककार ने इस पौराणिक आख्यान को आधुनिक समाज की चुनौतियों से जोड़कर एक विचारोत्तेजक प्रस्तुति तैयार की है। नाटक वर्तमान समय के सवालों से प्रारंभ होकर पौराणिक कथा की यात्रा करता है और अंततः समाज के सामने आत्ममंथन का प्रश्न प्रस्तुत करता है—क्या विकास की तेज़ रफ्तार में हम सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को भूलते जा रहे हैं?

निर्देशक चित्तरंजन त्रिपाठी की सशक्त निर्देशन शैली और बड़े स्क्रीन पर दृश्य-प्रक्षेपण, सशक्त मंच-सज्जा, प्रकाश एवं संगीत का समन्वय नाटक को गतिशील और प्रभावशाली बनाता है। कलाकारों का ऊर्जावान अभिनय कथा को जीवंत करता है और नाटक की ऊर्जा आरंभ से अंत तक बनी रहती है।

‘समुद्र मंथन’ केवल पौराणिक कथा का मंचन नहीं है, बल्कि यह समकालीन समाज पर एक तीखा प्रश्न भी प्रस्तुत करता है। नाटक यह संदेश देता है कि जब समाज और सत्ता आत्ममंथन से दूर हो जाते हैं, तब संकट उत्पन्न होते हैं। समुद्र मंथन से निकले विष की तरह आज विकास की अंधी दौड़ से उत्पन्न प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट मानवता के सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़े हैं।

राजस्थान दिवस पर आयोजित यह प्रस्तुति दर्शकों को भव्य दृश्यात्मकता, सशक्त अभिनय और विचारोत्तेजक कथानक के साथ यादगार रंगमंचीय अनुभव प्रदान करेगी।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

Next Story